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उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का उत्तराखंड दौरा: LBSNAA में IAS बैच और IGNFA में IFS प्रोबेशनर्स को करेंगे संबोधित

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उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का उत्तराखंड दौरा: LBSNAA में IAS बैच और IGNFA में IFS प्रोबेशनर्स को करेंगे संबोधित

सारांश

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन 18-19 अगस्त को उत्तराखंड में हैं — देहरादून में IFS प्रोबेशनर्स और मसूरी की LBSNAA में IAS 2024 बैच से संवाद करेंगे। यह दौरा प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों के साथ उनकी सक्रिय भागीदारी को दर्शाता है।

मुख्य बातें

राधाकृष्णन 18-19 अगस्त 2026 को उत्तराखंड के दो दिवसीय दौरे पर हैं।
पहले दिन देहरादून की IGNFA में 2025-27 बैच के IFS प्रोबेशनर्स को संबोधित करेंगे।
दूसरे दिन मसूरी की LBSNAA में IAS 2024 बैच के प्रोफेशनल कोर्स के समापन समारोह में मुख्य अतिथि होंगे।
सरदार पटेल और स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री को LBSNAA में पुष्पांजलि अर्पित करेंगे।
उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात 2035 तक 30% से 50% तक ले जाने का लक्ष्य — राधाकृष्णन।

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन बुधवार, 18 अगस्त 2026 से शुरू हो रहे अपने दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर नौकरशाहों और वन सेवा के नए अधिकारियों से सीधे संवाद करेंगे। आधिकारिक बयान के अनुसार, यह यात्रा प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों के साथ उपराष्ट्रपति की सक्रिय भागीदारी की कड़ी में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है।

दौरे का कार्यक्रम

यात्रा के पहले दिन उपराष्ट्रपति देहरादून स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (IGNFA) पहुँचेंगे, जहाँ वे 2025-27 बैच के भारतीय वन सेवा (IFS) प्रोबेशनर्स को संबोधित करेंगे और उनसे संवाद करेंगे। दूसरे दिन, गुरुवार को, वे मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में 2024 बैच के IAS प्रोफेशनल कोर्स के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।

LBSNAA के दौरे के दौरान राधाकृष्णन सरदार वल्लभभाई पटेल और पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री को पुष्पांजलि भी अर्पित करेंगे।

शिक्षा और युवाओं पर उपराष्ट्रपति का संदेश

इस दौरे से पूर्व, तिरुवरुर स्थित तमिलनाडु केंद्रीय विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में राधाकृष्णन ने स्नातकों को संबोधित करते हुए कहा कि केवल ज्ञान पर्याप्त नहीं है — भविष्य के लिए निरंतर सीखने, नवाचार और परिस्थितियों के अनुसार ढलने की क्षमता अनिवार्य है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे 'ज्ञान के उपभोक्ता के बजाय निर्माता, नकल करने वाले के बजाय इनोवेटर और अनुयायी के बजाय लीडर बनें।'

सार्वजनिक परीक्षा सुधार पर जोर

संसद द्वारा हाल ही में पारित 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक' का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा, 'अच्छे लोगों के हितों की रक्षा के लिए समाज के बुरे तत्वों को सजा दी जानी चाहिए।' झारखंड के राज्यपाल के रूप में अपने कार्यकाल का स्मरण करते हुए उन्होंने बताया कि उस दौरान झारखंड सरकार ने भी इसी प्रकार का विधेयक पारित किया था और उन्होंने तत्काल उस पर हस्ताक्षर कर उसे कानून का रूप दिया था।

तंजावुर स्थित SASTRA डीम्ड विश्वविद्यालय के रूबी और सिल्वर जुबली समापन समारोह में उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परीक्षा सुधार केंद्र सरकार की युवाओं के प्रति निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति और उच्च शिक्षा लक्ष्य

उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 को 'क्रांतिकारी' और 'प्रगतिशील' बताते हुए कहा कि यह केजी से लेकर पीएचडी तक सभी स्तरों पर शिक्षा की प्रगति का मार्गदर्शक स्तंभ है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात को मौजूदा 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 2035 तक 50 प्रतिशत तक पहुँचाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र के माध्यम से सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देने वाला एक आत्मनिर्भर इकोसिस्टम विकसित कर रही है।

आगे क्या

LBSNAA में IAS प्रोफेशनल कोर्स के समापन समारोह के साथ 2024 बैच के अधिकारी अपनी संस्थागत प्रशिक्षण यात्रा के अगले चरण की ओर बढ़ेंगे। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब सरकार प्रशासनिक क्षमता-निर्माण और वन प्रबंधन दोनों क्षेत्रों में नई पीढ़ी के अधिकारियों को तैयार करने पर विशेष ध्यान दे रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

ध्यान देने योग्य है कि ऐसे संबोधनों का दीर्घकालिक प्रभाव तब ही मापा जा सकता है जब नव-नियुक्त अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में इन मूल्यों की परिणति दिखे। सार्वजनिक परीक्षा विधेयक पर उनकी टिप्पणी उल्लेखनीय है — झारखंड के राज्यपाल के अनुभव को राष्ट्रीय नीति से जोड़ना उनकी बात को व्यक्तिगत विश्वसनीयता देता है। उच्च शिक्षा नामांकन का 2035 तक 50% का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, लेकिन गुणवत्ता बनाम संख्या का प्रश्न अभी भी अनुत्तरित है।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन उत्तराखंड दौरे पर क्या करेंगे?
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन 18-19 अगस्त 2026 को उत्तराखंड में देहरादून की IGNFA में IFS प्रोबेशनर्स और मसूरी की LBSNAA में IAS 2024 बैच के समापन समारोह में संबोधन देंगे। वे LBSNAA में सरदार पटेल और स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री को पुष्पांजलि भी अर्पित करेंगे।
LBSNAA मसूरी में IAS 2024 बैच का समापन समारोह कब है?
LBSNAA मसूरी में IAS प्रोफेशनल कोर्स 2024 बैच का समापन समारोह गुरुवार, 19 अगस्त 2026 को होगा, जिसमें उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि होंगे।
IGNFA देहरादून में किस बैच के IFS अधिकारियों को संबोधित किया जाएगा?
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन देहरादून की इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (IGNFA) में 2025-27 बैच के भारतीय वन सेवा (IFS) प्रोबेशनर्स को संबोधित करेंगे। यह दौरे का पहला दिन, 18 अगस्त, होगा।
सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक पर राधाकृष्णन का क्या रुख है?
उपराष्ट्रपति ने संसद द्वारा पारित 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक' का समर्थन करते हुए कड़े उपायों की जरूरत पर बल दिया है। उन्होंने बताया कि झारखंड के राज्यपाल रहते हुए उन्होंने वहाँ के ऐसे ही विधेयक पर तत्काल हस्ताक्षर किए थे।
उच्च शिक्षा नामांकन के बारे में उपराष्ट्रपति ने क्या कहा?
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने विश्वास जताया कि भारत उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात को मौजूदा 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 2035 तक 50 प्रतिशत तक पहुँचाएगा। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 को इस लक्ष्य का मार्गदर्शक स्तंभ बताया।
राष्ट्र प्रेस
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