उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का उत्तराखंड दौरा: LBSNAA में IAS बैच और IGNFA में IFS प्रोबेशनर्स को करेंगे संबोधित
सारांश
मुख्य बातें
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन बुधवार, 18 अगस्त 2026 से शुरू हो रहे अपने दो दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर नौकरशाहों और वन सेवा के नए अधिकारियों से सीधे संवाद करेंगे। आधिकारिक बयान के अनुसार, यह यात्रा प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों के साथ उपराष्ट्रपति की सक्रिय भागीदारी की कड़ी में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है।
दौरे का कार्यक्रम
यात्रा के पहले दिन उपराष्ट्रपति देहरादून स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (IGNFA) पहुँचेंगे, जहाँ वे 2025-27 बैच के भारतीय वन सेवा (IFS) प्रोबेशनर्स को संबोधित करेंगे और उनसे संवाद करेंगे। दूसरे दिन, गुरुवार को, वे मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में 2024 बैच के IAS प्रोफेशनल कोर्स के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।
LBSNAA के दौरे के दौरान राधाकृष्णन सरदार वल्लभभाई पटेल और पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय लाल बहादुर शास्त्री को पुष्पांजलि भी अर्पित करेंगे।
शिक्षा और युवाओं पर उपराष्ट्रपति का संदेश
इस दौरे से पूर्व, तिरुवरुर स्थित तमिलनाडु केंद्रीय विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में राधाकृष्णन ने स्नातकों को संबोधित करते हुए कहा कि केवल ज्ञान पर्याप्त नहीं है — भविष्य के लिए निरंतर सीखने, नवाचार और परिस्थितियों के अनुसार ढलने की क्षमता अनिवार्य है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे 'ज्ञान के उपभोक्ता के बजाय निर्माता, नकल करने वाले के बजाय इनोवेटर और अनुयायी के बजाय लीडर बनें।'
सार्वजनिक परीक्षा सुधार पर जोर
संसद द्वारा हाल ही में पारित 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक' का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा, 'अच्छे लोगों के हितों की रक्षा के लिए समाज के बुरे तत्वों को सजा दी जानी चाहिए।' झारखंड के राज्यपाल के रूप में अपने कार्यकाल का स्मरण करते हुए उन्होंने बताया कि उस दौरान झारखंड सरकार ने भी इसी प्रकार का विधेयक पारित किया था और उन्होंने तत्काल उस पर हस्ताक्षर कर उसे कानून का रूप दिया था।
तंजावुर स्थित SASTRA डीम्ड विश्वविद्यालय के रूबी और सिल्वर जुबली समापन समारोह में उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परीक्षा सुधार केंद्र सरकार की युवाओं के प्रति निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति और उच्च शिक्षा लक्ष्य
उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 को 'क्रांतिकारी' और 'प्रगतिशील' बताते हुए कहा कि यह केजी से लेकर पीएचडी तक सभी स्तरों पर शिक्षा की प्रगति का मार्गदर्शक स्तंभ है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात को मौजूदा 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 2035 तक 50 प्रतिशत तक पहुँचाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र के माध्यम से सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देने वाला एक आत्मनिर्भर इकोसिस्टम विकसित कर रही है।
आगे क्या
LBSNAA में IAS प्रोफेशनल कोर्स के समापन समारोह के साथ 2024 बैच के अधिकारी अपनी संस्थागत प्रशिक्षण यात्रा के अगले चरण की ओर बढ़ेंगे। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब सरकार प्रशासनिक क्षमता-निर्माण और वन प्रबंधन दोनों क्षेत्रों में नई पीढ़ी के अधिकारियों को तैयार करने पर विशेष ध्यान दे रही है।