उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का 29 अगस्त से चार राज्यों का तीन दिवसीय दौरा, शिक्षा-संस्कृति के कार्यक्रमों में होंगे शामिल
सारांश
मुख्य बातें
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन 29 अगस्त 2026 से तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और लक्षद्वीप के तीन दिवसीय दौरे पर रवाना होंगे। इस यात्रा के दौरान वह शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण आयोजनों में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेंगे। आधिकारिक बयान के अनुसार, यह दौरा 31 अगस्त 2026 तक चलेगा।
पहले दिन का कार्यक्रम — तमिलनाडु और कर्नाटक
29 अगस्त को उपराष्ट्रपति सबसे पहले तमिलनाडु के इरोड पहुँचेंगे, जहाँ वह कोंगु वेल्लालर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ट्रस्ट के संस्थापक दिवस समारोह में शिरकत करेंगे। इसके बाद वह बेंगलुरु की ओर प्रस्थान करेंगे, जहाँ विधान सौधा में आयोजित कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री रामकृष्ण हेगड़े की जन्मशती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।
दूसरे दिन का कार्यक्रम — केरल में तीन आयोजन
30 अगस्त को उपराष्ट्रपति का पूरा दिन केरल में बीतेगा। वह सुबह अलप्पुझा में केरल कौमुदी के 115वें स्थापना दिवस समारोह में भाग लेंगे, जो लियो 13वाँ उच्च माध्यमिक विद्यालय में आयोजित होगा। इसके बाद वह पथानामथिट्टा जाएंगे और ऐतिहासिक अरनमुला जल महोत्सव 2026 का उद्घाटन करेंगे। शाम को तिरुवनंतपुरम में ओणम पर्व के अवसर पर आयोजित ओणम पेजेंट्री का उद्घाटन करेंगे — यह केरल का प्रमुख सांस्कृतिक उत्सव है।
तीसरे दिन का कार्यक्रम — लक्षद्वीप और कोच्चि
31 अगस्त को उपराष्ट्रपति लक्षद्वीप के अगाती द्वीप का दौरा करेंगे, जहाँ मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के एक जनसंपर्क कार्यक्रम में वह मुख्य अतिथि होंगे। इसके बाद वह केरल लौटेंगे और कोच्चि के कक्कनाड स्थित राजागिरि स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के रजत जयंती समारोह तथा कॉनफ्लुएंस 3.0 इंडस्ट्री-अकादमिक सम्मेलन में भाग लेंगे।
विश्व संस्कृत दिवस पर संदेश
दौरे से एक दिन पहले, शुक्रवार 28 अगस्त को, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने विश्व संस्कृत दिवस के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएँ दीं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने लिखा, 'संस्कृत भारत के ज्ञान, दर्शन और सभ्यता की शाश्वत भाषा है। संस्कृत ने सदियों से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और बौद्धिक परंपराओं को आकार दिया है।' उन्होंने नागरिकों से इस अमूल्य धरोहर को संरक्षित, प्रोत्साहित और आगे बढ़ाने का संकल्प लेने की अपील की।
दौरे का महत्व
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब दक्षिण भारत के राज्यों में केंद्र-राज्य संबंधों को लेकर विमर्श जारी है। उपराष्ट्रपति की इन राज्यों में उपस्थिति और सांस्कृतिक-शैक्षणिक आयोजनों में भागीदारी को राष्ट्रीय एकता और संवाद की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गौरतलब है कि लक्षद्वीप जैसे केंद्र शासित प्रदेश में उपराष्ट्रपति की यात्रा द्वीपीय विकास पर केंद्र सरकार के ध्यान को भी रेखांकित करती है।