उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन 16-17 अगस्त को तमिलनाडु दौरे पर, चार शहरों में शैक्षणिक व साहित्यिक कार्यक्रम
सारांश
मुख्य बातें
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन 16 और 17 अगस्त को तमिलनाडु के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे। इस यात्रा के दौरान वे चेन्नई, चेंगलपट्टू, तिरुवरूर और तंजावुर में अनेक शैक्षणिक, स्मृति और साहित्यिक आयोजनों में भाग लेंगे। यह दौरा स्वतंत्रता दिवस के तत्काल बाद हो रहा है, जो इसे राष्ट्रीय पर्व की भावना से जोड़ता है।
16 अगस्त के कार्यक्रम
पहले दिन उपराष्ट्रपति चेंगलपट्टू के कट्टनकुलथुर स्थित एसआरएम इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के 22वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। इसके बाद वे चेन्नई के टी. नगर स्थित वाणी महल में नागालैंड, मणिपुर और पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल ला. गणेशन की पहली पुण्यतिथि के स्मृति समारोह में शामिल होंगे।
इसी दिन राधाकृष्णन चेन्नई के डी.जी. वैष्णव कॉलेज ऑडिटोरियम में 'इकोज ऑफ ए नेशनलिस्ट माइंड' पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में भी भाग लेंगे। यह पुस्तक हिंदू मुन्नानी के संस्थापक स्वर्गीय के. रामागोपालन के विचारों और लेखों पर आधारित है।
17 अगस्त के कार्यक्रम
दूसरे दिन उपराष्ट्रपति तिरुवरूर में तमिलनाडु केंद्रीय विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में शिरकत करेंगे। तत्पश्चात वे तंजावुर पहुँचकर शास्त्र डीम्ड यूनिवर्सिटी के रूबी और सिल्वर जुबली समापन समारोह में भाग लेंगे।
हर घर तिरंगा अभियान में भागीदारी
तमिलनाडु दौरे से पूर्व उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन 14 अगस्त को नई दिल्ली के भारत मंडपम में हर घर तिरंगा अभियान के अंतर्गत आयोजित विशेष कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने हरी झंडी दिखाकर एक बाइक रैली को भी रवाना किया।
वंदे मातरम पर उपराष्ट्रपति के विचार
इस अवसर पर राधाकृष्णन ने कहा, 'हमारे राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150वें वर्ष का जश्न मनाते हुए मैं गहरी भावनाओं से भर गया हूँ। इन शब्दों ने भारतीयों के दिलों में देशभक्ति की भावना जगाई और औपनिवेशिक शासन से मुक्ति के संघर्ष में एक बड़ी शक्ति के रूप में काम किया।'
उन्होंने आगे कहा, 'हमारा स्वतंत्रता संग्राम भारतीय मन, आत्मा और चेतना की जागृति था। इसने आज़ादी के एक साझे सपने के ज़रिए अलग-अलग क्षेत्रों, भाषाओं, धर्मों और सामाजिक पृष्ठभूमियों के लोगों को एकजुट किया।' राधाकृष्णन ने यह भी उल्लेख किया कि संसद में वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर हुई चर्चा 12 घंटे से अधिक चली और यह उनके राज्यसभा के पीठासीन अधिकारी के रूप में पहले सत्र की सबसे सार्थक चर्चाओं में से एक रही।
आगे का महत्व
यह दौरा शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्रीय स्मृति — तीनों आयामों को एक साथ समेटता है। गौरतलब है कि उपराष्ट्रपति के तमिलनाडु दौरे ऐसे समय में हो रहे हैं जब केंद्र और राज्य के बीच शैक्षणिक नीतियों को लेकर संवाद जारी है। दीक्षांत समारोहों में उनकी उपस्थिति उच्च शिक्षा संस्थानों को केंद्र सरकार के समर्थन का प्रतीकात्मक संदेश भी देती है।