3 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जेपीएससी अध्यक्ष नियुक्ति पर झारखंड हाईकोर्ट सख्त, सरकार को 10 सितंबर तक जवाब देने का आदेश

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जेपीएससी अध्यक्ष नियुक्ति पर झारखंड हाईकोर्ट सख्त, सरकार को 10 सितंबर तक जवाब देने का आदेश

सारांश

झारखंड हाईकोर्ट ने जेपीएससी के अध्यक्ष पद को लंबे समय से रिक्त रखने पर कड़ा रुख अपनाया है। सरकार द्वारा एसीएफ-आरएफओ परीक्षा रद्द किए जाने के बाद वन विभाग की भर्ती प्रक्रिया अटकी है। अदालत ने 10 सितंबर तक जवाब माँगा है।

मुख्य बातें

झारखंड हाईकोर्ट ने 3 सितंबर को जेपीएससी अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की समय-सीमा पर राज्य सरकार से जवाब माँगा।
अदालत ने सरकार को 10 सितंबर तक स्पष्ट जानकारी देने का निर्देश दिया।
राज्य सरकार ने एसीएफ और आरएफओ की नियुक्ति के लिए चल रही परीक्षा प्रक्रिया रद्द कर दी, जिसमें मुख्य परीक्षा परिणाम और शारीरिक दक्षता परीक्षा की तारीख भी घोषित हो चुकी थी।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एम.एस.
सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि जेपीएससी एक संवैधानिक संस्था है और अध्यक्ष पद लंबे समय तक रिक्त नहीं रखा जा सकता।
यह मामला वन विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी पर स्वत: संज्ञान से दर्ज याचिका से जुड़ा है।

झारखंड हाईकोर्ट ने 3 सितंबर 2026 को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) में अध्यक्ष और सदस्यों के रिक्त पदों को भरने की समय-सीमा पर राज्य सरकार से जवाब माँगा है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि 10 सितंबर तक सरकार नियुक्ति प्रक्रिया की स्पष्ट समय-सीमा बताए। यह सुनवाई वन विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों की भारी कमी के मामले में स्वत: संज्ञान से दर्ज याचिका पर हुई।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल और अधिवक्ता प्रिंस कुमार ने अदालत को सूचित किया कि असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (एसीएफ) और रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर (आरएफओ) की नियुक्ति के लिए चल रही परीक्षा प्रक्रिया राज्य सरकार द्वारा रद्द कर दी गई है। इस खुलासे के बाद अदालत ने जेपीएससी के रिक्त पदों को भरने की समय-सीमा तय करने का निर्देश दिया।

परीक्षा प्रक्रिया रद्द होने का असर

गौरतलब है कि एसीएफ और आरएफओ के लिए प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा पूर्व में पूरी हो चुकी थी। मुख्य परीक्षा का परिणाम भी जारी किया जा चुका था और शारीरिक दक्षता परीक्षा की तारीख भी घोषित हो चुकी थी। इस पूरी प्रक्रिया को सरकार द्वारा अचानक रद्द किए जाने से वन विभाग में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने की संभावना एक बार फिर अधर में लटक गई है।

अदालत का संवैधानिक रुख

हाईकोर्ट पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि जेपीएससी एक संवैधानिक संस्था है और इसका अध्यक्ष पद लंबे समय तक रिक्त नहीं रखा जा सकता। अदालत ने माना है कि वन विभाग में रिक्त पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए आयोग का कामकाज सुचारु रूप से चलना अनिवार्य है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में वन विभाग में अधिकारियों की कमी से प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

पिछली सुनवाई की पृष्ठभूमि

पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने सरकार के अधिवक्ता को निर्देश दिया था कि वे सरकार से परामर्श कर बताएँ कि जेपीएससी अध्यक्ष की नियुक्ति कब तक होगी। उस समय जेपीएससी की ओर से अदालत को बताया गया था कि वन विभाग के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है — लेकिन बाद में सरकार द्वारा परीक्षा रद्द किए जाने से स्थिति बदल गई।

आगे क्या होगा

अब सभी की नज़रें 10 सितंबर की सुनवाई पर टिकी हैं, जब राज्य सरकार को अदालत के समक्ष जेपीएससी में नियुक्ति की ठोस समय-सीमा प्रस्तुत करनी होगी। यदि सरकार संतोषजनक जवाब नहीं दे पाई, तो अदालत अधिक कड़े निर्देश जारी कर सकती है। वन विभाग में रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया का भविष्य काफी हद तक जेपीएससी में नेतृत्व की बहाली पर निर्भर करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो रद्दीकरण का आधार क्या था — और यह पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक क्यों नहीं हुआ। हाईकोर्ट का हस्तक्षेप ज़रूरी था, लेकिन असली परीक्षा 10 सितंबर को होगी जब सरकार को ठोस समय-सीमा देनी होगी — न कि महज़ आश्वासन।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड हाईकोर्ट ने जेपीएससी नियुक्ति पर क्या आदेश दिया?
झारखंड हाईकोर्ट ने 3 सितंबर को राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह 10 सितंबर तक जेपीएससी में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की स्पष्ट समय-सीमा बताए। यह आदेश वन विभाग में रिक्त पदों के मामले में स्वत: संज्ञान से दर्ज याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया।
एसीएफ और आरएफओ की परीक्षा प्रक्रिया क्यों रद्द की गई?
राज्य सरकार ने असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (एसीएफ) और रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर (आरएफओ) की नियुक्ति के लिए चल रही परीक्षा प्रक्रिया रद्द कर दी। रद्दीकरण का विशेष कारण अदालत में स्पष्ट नहीं किया गया, जबकि मुख्य परीक्षा का परिणाम और शारीरिक दक्षता परीक्षा की तारीख पहले ही घोषित हो चुकी थी।
जेपीएससी का अध्यक्ष पद रिक्त रहने से क्या समस्या होती है?
जेपीएससी एक संवैधानिक संस्था है और इसके अध्यक्ष पद के रिक्त रहने से भर्ती प्रक्रियाएँ रुक जाती हैं। झारखंड हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वन विभाग सहित अन्य विभागों में नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए आयोग का सुचारु संचालन अनिवार्य है।
इस मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
अदालत ने राज्य सरकार को 10 सितंबर तक जवाब देने का निर्देश दिया है, इसलिए अगली सुनवाई 10 सितंबर को होने की संभावना है। उस दिन सरकार को जेपीएससी नियुक्ति की ठोस समय-सीमा प्रस्तुत करनी होगी।
यह याचिका मूल रूप से किस विषय पर दायर हुई थी?
यह याचिका झारखंड के वन विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों की भारी कमी के मुद्दे पर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर दर्ज की थी। इसी मामले की सुनवाई के दौरान जेपीएससी में नेतृत्व की रिक्तता का मुद्दा सामने आया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 1 सप्ताह पहले
  6. 1 सप्ताह पहले
  7. 3 सप्ताह पहले
  8. 1 साल पहले