कश्मीरी पंडित भूषण लाल की PM मोदी से अपील: '36 साल बाद भी इंसाफ नहीं, कातिलों के केस खोले जाएं'
सारांश
मुख्य बातें
कश्मीरी पंडित समुदाय के प्रतिनिधि भूषण लाल ने 3 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में अपनी गहरी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि 1990 के विस्थापन के 36 वर्ष बाद भी कश्मीरी पंडितों को न्याय नहीं मिला है और उन्हें आज भी धमकियाँ मिल रही हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधी अपील की कि समुदाय पर हुए अत्याचारों के सभी मामले पुनः खोले जाएँ।
'फुटबॉल की तरह हो रहा बर्ताव'
भूषण लाल ने कहा, 'यह दुख की बात है कि कश्मीरी पंडितों के साथ फुटबॉल जैसा बर्ताव किया जा रहा है, मानो हमें एक तरफ से दूसरी तरफ लात मारी जा सकती है।' उन्होंने सवाल उठाया कि उन्हें प्रतिदिन यहाँ से चले जाने के नोटिस क्यों मिलते हैं, जबकि यह उनकी अपनी मातृभूमि है। उनके शब्दों में, 'हमने क्या अपराध किया है? क्या कश्मीरी पंडित होना ही हमारी एकमात्र गलती है?'
विस्थापन की त्रासदी और ज़मीनों पर अतिक्रमण
भूषण लाल ने बताया कि जहाँ से वे आते हैं, वहाँ हिंदुओं के 60 घर थे। 1990 में ही 50 घरों के लोग पलायन कर गए और 2003 में शेष 10 घरों के निवासियों को कथित तौर पर मार दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि समुदाय की ज़मीनों, घरों, बगानों, श्मशान भूमि और धर्मशालाओं पर अतिक्रमण कर लिया गया है। उनका कहना है, 'कुछ लोग नहीं चाहते कि हम वापस आएँ, क्योंकि हमारी संपत्तियों पर कब्ज़ा हो चुका है।'
अनुच्छेद 370 हटने के बाद की स्थिति
भूषण लाल के अनुसार, जब अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए को समाप्त कर कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया, तो कुछ तत्वों की 'दुकानें बंद हो गईं।' उनका आरोप है कि अब ये तत्व नए सिरे से अपना प्रभाव स्थापित करने के लिए कश्मीरी पंडितों को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने कहा, 'पहले हमारे नेताओं को खत्म किया, फिर पूरी कॉलोनियों को। इसके बावजूद, कश्मीरी पंडित वहाँ रहना चाहते हैं।'
फारूक अब्दुल्ला के बयान पर प्रतिक्रिया
जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को मिल रही धमकियों से संबंधित बयान पर भूषण लाल ने कहा कि अब्दुल्ला एक अनुभवी और वरिष्ठ राजनेता हैं, जिन्हें 1990 के पलायन की जानकारी है। उन्होंने कहा, 'उस समय वह स्वयं भी एक प्रवासी थे और देश छोड़कर चले गए थे। अगर उन्होंने ऐसा कहा है तो यह बहुत गलत बात है।'
PM मोदी से न्याय की अपील
भूषण लाल ने प्रधानमंत्री मोदी से सीधी अपील करते हुए माँग की कि समुदाय के विरुद्ध हुए हत्याओं और अत्याचारों के सभी मामले पुनः खोले जाएँ। उन्होंने कहा, 'हम 36 वर्षों से इंसाफ माँग रहे हैं। हम कैदी की ज़िंदगी जी रहे हैं। हमारे कातिलों के मुकदमे खुलने चाहिए।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कश्मीरी पंडित समुदाय ने कभी हथियार नहीं उठाए — 'हम कलम और लैपटॉप चलाना जानते हैं।' यह अपील ऐसे समय में आई है जब कश्मीर में पंडित कर्मचारियों को धमकियों की खबरें एक बार फिर सुर्खियों में हैं।