राम मंदिर ट्रस्ट के नए CEO जितेंद्र मिश्र पर विपक्ष का हमला, इमरान मसूद बोले — साधु-संतों से छीना काम
सारांश
मुख्य बातें
विपक्षी दलों ने जितेंद्र मिश्र को अयोध्या स्थित राम मंदिर ट्रस्ट का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और समाजवादी पार्टी (SP) के नेताओं ने इस नियुक्ति को चढ़ावा चोरी और ट्रस्ट में कथित अनियमितताओं के संदर्भ में रखते हुए सरकार पर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस की आपत्ति: जाति प्रतिनिधित्व और पारदर्शिता
कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा, 'चयन की लंबी प्रक्रिया दिखाने की कोशिश की गई, लेकिन सब आंतरिक कार्यप्रणाली है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में अच्छी भूमिका निभाई थी और एक बेहतरीन अधिकारी रहे हैं, लेकिन एक मिश्रा गए तो दूसरे मिश्रा आ गए।' उन्होंने यह भी कहा कि यह एक प्रशासनिक पद है, इसलिए किसी ओबीसी या एससी-एसटी समुदाय के व्यक्ति को भी इस पद पर नियुक्त किया जा सकता था। उनके अनुसार, हिंदू धर्म सबका है, लेकिन भागीदारी देने के समय पिछड़े वर्गों को नजरअंदाज किया जाता है।
कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों सनातनियों की आस्था का विषय है। उनके अनुसार, CEO की नियुक्ति तभी सार्थक होगी जब ट्रस्ट पूर्ण पारदर्शिता के साथ काम करे। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार सनातनियों की आस्था के साथ खिलवाड़ कर रही है।
इमरान मसूद का आरोप: साधु-संतों से छीना अधिकार
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि मंदिर प्रबंधन का यह काम मूलतः साधु-संतों का था। उन्होंने कहा, 'इन लोगों को कोई ईमानदार साधु-संत नहीं मिला क्या? साधु-संतों से काम छीन लिया, इसी वजह से चढ़ावा चोरी हुई है। रामलला का काम तो वर्षों से चल रहा था।' मसूद ने यह भी जोड़ा कि इसी तर्ज पर कल को साधु-संतों को भी बेईमान करार दे दिया जाएगा।
RJD का रुख: असली मुद्दा चोरी और जमीन विवाद
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कहा कि खबर CEO की नियुक्ति नहीं है — खबर है चोरी, जमीन का बंदरबांट और आस्था के नाम पर खिलवाड़। उन्होंने कहा, 'ये चीजें चिंताजनक हैं, बाकी सब बेईमानी है।' उनके अनुसार, नियुक्ति को असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के रूप में देखा जाना चाहिए।
सपा नेताओं की प्रतिक्रिया: दोषियों पर कार्रवाई पहले
समाजवादी पार्टी के सलेमपुर सांसद रामाशंकर राजभर ने बताया कि जितेंद्र मिश्र उनके संसदीय क्षेत्र के भूपतपूरा गांव के निवासी हैं। उन्होंने नियुक्ति का स्वागत करते हुए कहा कि यह एक बड़ी चुनौती है, विशेष रूप से ऐसे माहौल में जहाँ IAS और IPS अधिकारियों पर सरकारी दबाव के कारण इस्तीफे हो रहे हों।
सपा नेता उदयवीर सिंह ने कहा कि मूल मुद्दा जिम्मेदारी देने का नहीं, बल्कि आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई न होने का है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक दोषियों को चिह्नित कर दंडित नहीं किया जाता, तब तक व्यवस्था परिवर्तन को केवल जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश के रूप में देखा जाएगा।
पृष्ठभूमि और आगे की राह
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब राम मंदिर ट्रस्ट पर चढ़ावे में चोरी और भूमि अधिग्रहण से जुड़े कथित घोटालों के आरोप सुर्खियों में हैं। गौरतलब है कि जितेंद्र मिश्र की नियुक्ति इन्हीं विवादों के बीच हुई है, जिससे ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर सवाल और गहरे हो गए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए CEO किस प्रकार पारदर्शिता सुनिश्चित करते हैं और क्या कथित अनियमितताओं की जाँच आगे बढ़ती है।