राम मंदिर ट्रस्ट में CEO नियुक्ति पर अजय राय का हमला — 'चढ़ावा चोरों पर कार्रवाई पहले'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने 2 सितंबर 2026 को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में हुए बड़े प्रशासनिक फेरबदल पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। ट्रस्ट ने पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है, जिसके बाद राय ने सवाल उठाया कि जब तक कथित चढ़ावा विवाद में जिम्मेदार व्यक्तियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह नियुक्ति महज एक अधूरा कदम है।
मुख्य घटनाक्रम
ट्रस्ट ने बुधवार को कई अहम बदलाव एक साथ किए। पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का पहला CEO नियुक्त किया गया। इसके साथ ही स्वामी गोविंददेव गिरि को महासचिव बनाया गया, जबकि महेश भगचंदका, मदन मोहन पांडेय और निर्मला यादव को नए ट्रस्टी के रूप में शामिल किया गया।
ट्रस्ट के अनुसार, मिश्रा के दीर्घकालीन प्रशासनिक और नेतृत्व अनुभव का उपयोग मंदिर प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और विभागों के बीच समन्वय के लिए किया जाएगा।
अजय राय की प्रतिक्रिया
कांग्रेस नेता अजय राय ने इस नियुक्ति को नाकाफी बताते हुए कहा, 'जो चढ़ावा चोर हैं, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई? क्या नए सीईओ चढ़ावा चोरी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे? या भगवान के दरबार से जो पैसे गायब हुए हैं, क्या वे फिर से दान पात्र में आएंगे या रिकॉर्ड में वापस दर्ज होंगे?'
राय ने स्पष्ट किया कि सिर्फ किसी को पद पर बैठा देने से वे इसे उपलब्धि नहीं मानते। उनका आरोप है कि कथित चढ़ावा विवाद में जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ जवाबदेही तय होनी चाहिए।
किन नामों पर उठाए सवाल
राय ने कहा, 'जब तक उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, जो भगवान का पैसा खा गए, तब तक यह कदम अधूरा है।' उन्होंने चंपत राय, अनिल मिश्रा, गोपाल राव और ट्रस्ट से जुड़े अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की।
यह ऐसे समय में आया है जब ट्रस्ट पर कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप पहले से ही विपक्षी दलों द्वारा उठाए जाते रहे हैं। राय ने यह भी आरोप लगाया कि 'ऐसा लगता है कि जो अनियमितताएं चल रही थीं, उन्हें अब एक अधिकृत व्यवस्था के तहत संचालित करने की कोशिश की जा रही है।'
धार्मिक नेतृत्व बनाम प्रशासनिक नियुक्ति
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि राम मंदिर जैसे धार्मिक संस्थान में प्रशासनिक अधिकारी की बजाय धार्मिक परंपराओं और आध्यात्मिक नेतृत्व से जुड़े व्यक्तियों को प्रमुख भूमिका दी जानी चाहिए थी। राय के अनुसार, 'परम पूज्य शंकराचार्य जी से जुड़े लोगों द्वारा नामित व्यक्तियों को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए थी। वहाँ धर्माचार्यों की नियुक्ति होनी चाहिए थी, सीईओ की नहीं।'
गौरतलब है कि राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ट्रस्ट के प्रशासनिक ढाँचे को लेकर विभिन्न पक्षों से सवाल उठते रहे हैं। यह पहला मौका है जब ट्रस्ट ने एक पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति की है।
आगे क्या होगा
ट्रस्ट ने नई नियुक्तियों के बाद प्रशासनिक ढाँचे को और मजबूत करने की योजना बताई है। विपक्ष की माँग है कि कथित वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र जाँच कराई जाए। यह देखना होगा कि नए CEO के नेतृत्व में ट्रस्ट इन आरोपों का जवाब किस तरह देता है और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाता है।