PM मोदी ने जल शक्ति शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता की, 'जल उत्सव' और AI डेटा गवर्नेंस का सुझाव
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में जल शक्ति मंत्रालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय विभागीय जल शिखर सम्मेलन के समापन सत्र की अध्यक्षता की। इस सम्मेलन में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्री तथा वरिष्ठ अधिकारी भारत की जल सुरक्षा पर केंद्रित चर्चाओं के लिए एक मंच पर एकत्रित हुए।
शिखर सम्मेलन का उद्देश्य और महत्व
यह आयोजन विभागीय शिखर सम्मेलनों की उस श्रृंखला में पहला सम्मेलन है, जिसे प्रधानमंत्री की उस सोच के अनुरूप तैयार किया गया है जो 'टीम इंडिया' की भावना को सुदृढ़ करने, सहकारी संघवाद को गहरा करने और केंद्र तथा राज्यों के बीच राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित है। गौरतलब है कि जल प्रबंधन को इस श्रृंखला के पहले विषय के रूप में चुना जाना इस क्षेत्र की नीतिगत प्राथमिकता को रेखांकित करता है।
प्रधानमंत्री के मुख्य सुझाव
मोदी ने दो दिनों की गहन चर्चा की सराहना करते हुए स्पष्ट किया कि सम्मेलन से निकले कार्यान्वयन योग्य और समय-सीमा वाले कार्य बिंदुओं की समीक्षा एक सतत प्रक्रिया बनी रहनी चाहिए — यह आयोजन महज एकबारगी गतिविधि नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने शहरी स्थानीय निकायों के लिए विशेष चिंतन शिविर आयोजित करने का सुझाव दिया, ताकि शहरीकरण से उत्पन्न जल चुनौतियों — जैसे बढ़ती आबादी और भविष्य की माँग — के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके। जल संरक्षण तकनीकों को व्यापक पैमाने पर अपनाने और वैश्विक सर्वोत्तम पद्धतियों को साझा करने के लिए विशेष प्रदर्शनियों एवं कार्यशालाओं के आयोजन की भी वकालत की गई।
जन भागीदारी के संदर्भ में, प्रधानमंत्री ने 'जल उत्सव' को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने गाद निकालने को एक नियमित कार्यक्रम बनाने और इसके लिए स्पष्ट नियम व मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करने का निर्देश दिया। बांध सुरक्षा के मामले में उन्होंने हर मॉनसून से पहले पूरी तैयारी, तय सावधानियों का पालन और स्कूली पाठ्यक्रम में जागरूकता सामग्री को उचित ढंग से शामिल करने पर जोर दिया।
डेटा गवर्नेंस और AI का उपयोग
प्रधानमंत्री ने मजबूत जल डेटा गवर्नेंस की आवश्यकता पर बल दिया — जल-क्षेत्र से जुड़े डेटा को एकत्रित कर उसे व्यवस्थित रूप से प्रबंधित और विश्लेषित किया जाए। उन्होंने समान प्रारूप में डेटा संग्रह और विश्लेषण के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग की सिफारिश की। कृषि और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए उपचारित जल के पुनः उपयोग पर भी जोर दिया गया, ताकि जल संकट से पहले ही एकीकृत योजना बनाई जा सके।
अनुभव से सबक और अंतर-राज्यीय सहयोग
गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि सही योजना, दृढ़ इरादे, आवश्यक संसाधन और सक्षम अधिकारियों की तैनाती से जल की कमी को एक अवसर में बदला जा सकता है। उन्होंने जन-प्रतिनिधियों, अधिकारियों और किसानों के बीच व्यवस्थित अंतर-राज्यीय अध्ययन-दौरों का सुझाव दिया, ताकि सफल मॉडलों को अन्य राज्यों में भी दोहराया जा सके। विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में जल प्रबंधन की जानकारी और क्षमता बढ़ाने पर भी बल दिया गया।
केंद्रीय मंत्री ने गिनाए चार प्रमुख नतीजे
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने सम्मेलन के चार मुख्य परिणाम रेखांकित किए — जल अवसंरचना परियोजनाओं को गति देना; जल संरक्षण को एक निरंतर जन-आंदोलन के रूप में सुदृढ़ करना; पेयजल स्रोतों की दीर्घकालिक उपलब्धता सुनिश्चित करना; और ग्रामीण पेयजल योजनाओं के संचालन व रखरखाव को संस्थागत स्वरूप देना। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई हिस्सों में भूजल स्तर में गिरावट और मानसून की अनिश्चितता जल सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। आगे इन कार्य बिंदुओं की नियमित समीक्षा और राज्यों के साथ फॉलोअप इस पहल की सफलता की कुंजी होगी।