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राम मंदिर ट्रस्ट में पहले सीईओ की नियुक्ति पर अजय राय का हमला, चढ़ावा विवाद में जवाबदेही की माँग

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राम मंदिर ट्रस्ट में पहले सीईओ की नियुक्ति पर अजय राय का हमला, चढ़ावा विवाद में जवाबदेही की माँग

सारांश

राम मंदिर ट्रस्ट ने पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को पहला सीईओ और स्वामी गोविंददेव गिरि को महासचिव नियुक्त किया। UP कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने इसे अधूरा कदम बताते हुए कथित चढ़ावा विवाद में चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव पर कार्रवाई की माँग की।

मुख्य बातें

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर का पहला सीईओ नियुक्त किया।
स्वामी गोविंददेव गिरि को ट्रस्ट का महासचिव बनाया गया; महेश भगचंदका , मदन मोहन पांडेय और निर्मला यादव नए ट्रस्टी नियुक्त हुए।
UP कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कथित चढ़ावा विवाद में चंपत राय , अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ कार्रवाई की माँग की।
राय ने सवाल उठाया कि क्या नए सीईओ की नियुक्ति अनियमितताओं को 'अधिकृत व्यवस्था' देने की कोशिश तो नहीं।
राय ने तर्क दिया कि मंदिर में प्रशासनिक अधिकारी की बजाय धर्माचार्यों की नियुक्ति होनी चाहिए थी।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने 2 सितंबर 2026 को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। राय ने आरोप लगाया कि जब तक कथित चढ़ावा विवाद में जिम्मेदार व्यक्तियों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह प्रशासनिक फेरबदल महज एक औपचारिकता है।

मुख्य घटनाक्रम

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बुधवार को बड़े प्रशासनिक बदलाव करते हुए पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का पहला सीईओ नियुक्त किया। इसके साथ ही स्वामी गोविंददेव गिरि को ट्रस्ट का महासचिव बनाया गया, जबकि महेश भगचंदका, मदन मोहन पांडेय और निर्मला यादव को नए ट्रस्टी के रूप में नियुक्त किया गया।

ट्रस्ट के अनुसार, पूर्व वायुसेना अधिकारी मिश्रा के दीर्घकालिक प्रशासनिक और नेतृत्व अनुभव का उपयोग मंदिर प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय के लिए किया जाएगा।

अजय राय की प्रतिक्रिया

कांग्रेस नेता अजय राय ने इस नियुक्ति को अपर्याप्त बताते हुए कहा, 'जो चढ़ावा चोर हैं, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई? क्या नए सीईओ चढ़ावा चोरी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे? या भगवान के दरबार से जो पैसे गायब हुए हैं, क्या वे फिर से दान पात्र में आएंगे या रिकॉर्ड में वापस दर्ज होंगे?'

राय ने यह भी आरोप लगाया कि 'जो अनियमितताएं चल रही थीं, उन्हें अब एक अधिकृत व्यवस्था के तहत संचालित करने की कोशिश की जा रही है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि सिर्फ किसी को सीईओ बना देने से वे इसे बड़ी उपलब्धि मानने को तैयार नहीं हैं।

जवाबदेही की माँग

राय ने नाम लेते हुए कहा कि 'जब तक चंपत राय, अनिल मिश्रा, गोपाल राव और ट्रस्ट से जुड़े अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह कदम अधूरा है।' उनका कहना है कि कथित चढ़ावा विवाद में जिन लोगों पर आरोप लगे हैं, उनके खिलाफ जवाबदेही तय होनी चाहिए।

गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब राम मंदिर को लेकर देशभर में श्रद्धालुओं की आस्था और सार्वजनिक दान का प्रवाह बड़े पैमाने पर जारी है। ऐसे में वित्तीय पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है।

धार्मिक नेतृत्व बनाम प्रशासनिक नियुक्ति

राय ने यह भी तर्क दिया कि राम मंदिर जैसे धार्मिक संस्थान में प्रशासनिक अधिकारी की बजाय धार्मिक परंपराओं और आध्यात्मिक नेतृत्व से जुड़े व्यक्तियों को प्रमुख भूमिका दी जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि 'परम पूज्य शंकराचार्य जी से जुड़े लोगों द्वारा नामित व्यक्तियों को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए थी — वहाँ धर्माचार्यों की नियुक्ति होनी चाहिए थी, सीईओ की नहीं।'

यह टिप्पणी इस बात की ओर इशारा करती है कि विपक्ष धार्मिक संस्थाओं के प्रशासनिक ढाँचे को लेकर एक व्यापक बहस खड़ी करने की कोशिश कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि ट्रस्ट इन आरोपों का जवाब किस रूप में देता है और क्या कोई स्वतंत्र जाँच की माँग और बल पकड़ती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और क्या यह पारदर्शिता लाएगा या केवल जिम्मेदारी की परतें बढ़ाएगा? अजय राय के आरोप राजनीतिक हैं, लेकिन उनके भीतर एक वैध प्रश्न है — देश के सबसे बड़े धार्मिक स्थल पर दान-प्रबंधन का स्वतंत्र ऑडिट अभी तक सार्वजनिक नहीं हुआ। मुख्यधारा की कवरेज नियुक्ति के ब्यौरे पर केंद्रित है, लेकिन यह नहीं पूछती कि ट्रस्ट का वित्तीय जवाबदेही ढाँचा क्या है और नए सीईओ की शक्तियाँ व सीमाएँ क्या होंगी। जब तक ये उत्तर सार्वजनिक नहीं होते, विपक्ष का यह मुद्दा बना रहेगा।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले सीईओ कौन हैं?
पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किया गया है। ट्रस्ट के अनुसार उनके प्रशासनिक और नेतृत्व अनुभव का उपयोग मंदिर प्रबंधन, सुरक्षा और श्रद्धालु सुविधाओं के लिए किया जाएगा।
अजय राय ने राम मंदिर ट्रस्ट की नई नियुक्ति पर आपत्ति क्यों जताई?
UP कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय का कहना है कि केवल सीईओ नियुक्त करना पर्याप्त नहीं है जब तक कथित चढ़ावा विवाद में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ जवाबदेही तय करने की माँग की है।
राम मंदिर ट्रस्ट में और कौन-से प्रशासनिक बदलाव हुए हैं?
सीईओ नियुक्ति के साथ ही स्वामी गोविंददेव गिरि को ट्रस्ट का महासचिव बनाया गया है। इसके अलावा महेश भगचंदका, मदन मोहन पांडेय और निर्मला यादव को नए ट्रस्टी के रूप में शामिल किया गया है।
अजय राय के अनुसार राम मंदिर में किस तरह की नियुक्ति होनी चाहिए थी?
अजय राय का मानना है कि राम मंदिर जैसे धार्मिक संस्थान में प्रशासनिक अधिकारी की बजाय धर्माचार्यों की नियुक्ति होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य से जुड़े लोगों द्वारा नामित व्यक्तियों को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए थी।
कथित चढ़ावा विवाद क्या है जिसका अजय राय ने उल्लेख किया?
अजय राय ने आरोप लगाया है कि राम मंदिर ट्रस्ट में दान-चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताएं हुई हैं और इस संबंध में जिम्मेदार लोगों पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ये आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं और ट्रस्ट की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
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