3 सितंबर 2026
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राम मंदिर के नए सीईओ एयर मार्शल (रिटायर्ड) जीतेंद्र मिश्रा, संतों ने सैन्य पृष्ठभूमि को बताया सही चुनाव

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राम मंदिर के नए सीईओ एयर मार्शल (रिटायर्ड) जीतेंद्र मिश्रा, संतों ने सैन्य पृष्ठभूमि को बताया सही चुनाव

सारांश

राम मंदिर को पहली बार मिला पेशेवर सीईओ — और वह एक पूर्व एयर मार्शल हैं। जीतेंद्र मिश्रा की नियुक्ति पर संत समाज ने राहत जताई कि आईएएस की जगह सशस्त्र बल अधिकारी चुना गया, लेकिन ट्रस्ट सदस्यों की नियुक्ति पर आपत्तियाँ अभी भी बनी हैं।

मुख्य बातें

एयर मार्शल (रिटायर्ड) जीतेंद्र मिश्रा को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 2 सितंबर को राम मंदिर का नया सीईओ नियुक्त किया।
ट्रस्ट के सभी दस ट्रस्टियों ने यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया।
मिश्रा ने कारगिल युद्ध और ऑपरेशन सिंदूर में भूमिका निभाई है।
महंत देवेशाचार्य सहित कई संतों ने राहत जताई कि आईएएस/आईपीएस की जगह सशस्त्र बल अधिकारी को चुना गया।
महंत सीताराम दास ने ट्रस्ट के तीन सदस्यों की नियुक्ति पर संत समाज की आपत्ति का उल्लेख किया — उनके अनुसार ये लोग राम जन्मभूमि आंदोलन के संघर्षों से नहीं जुड़े रहे।
बाबरी मामले के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने भी नियुक्ति को सराहनीय बताया।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एयर मार्शल (रिटायर्ड) जीतेंद्र मिश्रा को राम मंदिर, अयोध्या का नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किया है। 2 सितंबर को सामने आई इस नियुक्ति पर अयोध्या के संतों और धार्मिक नेताओं ने मिली-जुली, परंतु मुख्यतः सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। ट्रस्ट के अनुसार यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया है।

संतों की प्रतिक्रिया

महंत सीताराम दास जी महाराज ने मिश्रा को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि देश की सेवा कर चुके व्यक्ति को अब रामलला की सेवा का अवसर मिला है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संत समाज ट्रस्ट के तीन सदस्यों की नियुक्ति पर आपत्ति जता रहा है। उनका कहना है कि नियुक्त किए गए लोग राम जन्मभूमि आंदोलन के ऐतिहासिक संघर्षों से जुड़े नहीं रहे हैं।

महंत राजू दास ने नियुक्ति को अच्छा कदम बताते हुए जीतेंद्र मिश्रा को बधाई दी। उन्होंने नए सीईओ से अपेक्षा जताई कि मंदिर में पूजा-अर्चना वैष्णव, संत, विरक्त और रामानंदी परंपरा के अनुरूप होनी चाहिए और अयोध्या में गोशालाओं की व्यवस्था पर भी ध्यान दिया जाए। राजू दास ने यह भी कहा कि शुरुआत से उनकी राय रही है कि मंदिर की जिम्मेदारी किसी संत को दी जाती तो बेहतर होता, क्योंकि संत भगवान की सेवा और भक्ति के लिए अधिक समर्पित भाव से काम कर सकते हैं।

वीएचपी और धार्मिक संगठनों का रुख

विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के महासचिव बजरंग लाल बागड़ा ने इस नियुक्ति को संगठनात्मक बदलाव का स्वाभाविक हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े संस्थान को समय, परिस्थितियों और जरूरतों के अनुसार अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव करना पड़ता है। मंदिर की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए सभी दस ट्रस्टियों ने प्रबंधन में दक्षता और सुधार के लिए यह निर्णय लिया।

सिद्ध पीठ हनुमानगढ़ी के महंत देवेशाचार्य जी महाराज ने बताया कि संत समाज पहले सीईओ नियुक्त करने के विचार का विरोध कर रहा था, लेकिन ट्रस्ट ने यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया। उन्होंने संतोष जताया कि किसी आईएएस या आईपीएस अधिकारी के बजाय पूर्व सशस्त्र बल अधिकारी को चुना गया, क्योंकि सैन्य पृष्ठभूमि से आने वाले व्यक्ति से मंदिर की पवित्रता और अनुशासन बनाए रखने की उम्मीद है।

जीतेंद्र मिश्रा का परिचय

महामंडलेश्वर विष्णु दास जी महाराज ने नियुक्ति को सकारात्मक बताते हुए कहा कि राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी को लेकर विपक्ष ने राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश की थी। उनके अनुसार नए सीईओ जीतेंद्र मिश्रा ने 'ऑपरेशन सिंदूर' में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और देश तथा समाज के लिए सराहनीय कार्य किया है।

धर्मगुरु करपात्री जी महाराज ने मिश्रा के सैन्य करियर का विस्तार से उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने कारगिल युद्ध में हिस्सा लिया, अटल बिहारी वाजपेयी का आशीर्वाद प्राप्त किया और बाद में एयर चीफ मार्शल के पद तक पहुंचे। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में भी भूमिका निभाई। करपात्री जी ने ऐसे अनुभवी व्यक्ति की नियुक्ति को सौभाग्य की बात बताया।

इकबाल अंसारी की प्रतिक्रिया

बाबरी मस्जिद मामले के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने भी इस नियुक्ति को सराहनीय निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि अयोध्या का राम मंदिर देश और दुनिया के करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और सैन्य पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को सीईओ बनाया जाना अच्छा फैसला है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार जताते हुए कहा कि सैन्य सेवा से जुड़े लोगों पर देश का भरोसा रहा है।

आगे की राह

यह नियुक्ति ऐसे समय में आई है जब राम मंदिर प्रबंधन पारदर्शिता और प्रशासनिक दक्षता को लेकर सवालों के घेरे में रही है। गौरतलब है कि ट्रस्ट के कुछ सदस्यों की नियुक्ति पर संत समाज की आपत्तियाँ अभी भी बनी हुई हैं। नए सीईओ के सामने मंदिर की धार्मिक परंपराओं की रक्षा के साथ-साथ प्रशासनिक सुधार का दोहरा दायित्व होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

और यदि धार्मिक-प्रशासनिक तनाव बना रहा तो सीईओ की प्रभावशीलता सीमित हो सकती है। मंदिर में चढ़ावे की पारदर्शिता और परंपरागत पूजा-पद्धति की रक्षा — दोनों मोर्चों पर मिश्रा की परीक्षा होगी।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर के नए सीईओ जीतेंद्र मिश्रा कौन हैं?
जीतेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त एयर मार्शल हैं, जिन्होंने कारगिल युद्ध और ऑपरेशन सिंदूर में भूमिका निभाई है। उन्हें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 2 सितंबर को राम मंदिर, अयोध्या का सीईओ नियुक्त किया।
संत समाज ने इस नियुक्ति पर क्या प्रतिक्रिया दी?
अधिकांश संतों ने नियुक्ति का स्वागत किया और सैन्य पृष्ठभूमि को उचित चुनाव बताया। हालांकि, महंत सीताराम दास जी महाराज ने ट्रस्ट के तीन सदस्यों की नियुक्ति पर आपत्ति जताई, यह कहते हुए कि वे राम जन्मभूमि आंदोलन के ऐतिहासिक संघर्षों से जुड़े नहीं रहे।
क्या ट्रस्ट ने यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया?
हाँ, वीएचपी महासचिव बजरंग लाल बागड़ा और महंत देवेशाचार्य दोनों ने पुष्टि की कि ट्रस्ट के सभी दस ट्रस्टियों ने यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया। महंत देवेशाचार्य ने बताया कि संत समाज पहले सीईओ नियुक्ति के विचार का विरोध कर रहा था, लेकिन अंततः सहमति बनी।
महंत राजू दास ने नए सीईओ से क्या अपेक्षाएं रखीं?
महंत राजू दास ने नियुक्ति का स्वागत करते हुए कहा कि मंदिर में पूजा-अर्चना वैष्णव, संत, विरक्त और रामानंदी परंपरा के अनुरूप होनी चाहिए। उन्होंने अयोध्या में गोशालाओं की व्यवस्था पर भी ध्यान देने की अपील की।
इकबाल अंसारी ने इस नियुक्ति पर क्या कहा?
बाबरी मस्जिद मामले के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने नियुक्ति को सराहनीय बताया और कहा कि सैन्य सेवा से जुड़े लोगों पर देश का भरोसा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार भी जताया।
राष्ट्र प्रेस
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