राम मंदिर के नए सीईओ एयर मार्शल (रिटायर्ड) जीतेंद्र मिश्रा, अयोध्या के संतों ने किया स्वागत
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के पद पर एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जीतेंद्र मिश्रा की नियुक्ति के बाद धार्मिक जगत में उत्साहपूर्ण प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं। अधिकांश संतों और धार्मिक नेताओं ने पूर्व सशस्त्र बल अधिकारी को यह दायित्व सौंपे जाने का स्वागत किया, हालाँकि कुछ ने ट्रस्ट सदस्यों की नियुक्ति और मंदिर की परंपराओं को लेकर अपनी अपेक्षाएँ भी रखीं।
संतों की प्रतिक्रिया और शुभकामनाएँ
महंत सीताराम दास जी महाराज ने जीतेंद्र मिश्रा को सीईओ नियुक्त किए जाने पर शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति ने देश की सेवा की है, उसे अब रामलला की सेवा का सुअवसर प्राप्त हुआ है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संत समाज में ट्रस्ट के तीन सदस्यों की नियुक्ति को लेकर आपत्ति है, क्योंकि उनका मानना है कि नियुक्त सदस्य राम जन्मभूमि आंदोलन के ऐतिहासिक संघर्षों से जुड़े नहीं रहे हैं।
महंत राजू दास ने नई नियुक्ति को सकारात्मक कदम बताते हुए मिश्रा को बधाई दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि मंदिर में पूजा-अर्चना वैष्णव, संत, विरक्त और रामानंदी परंपरा के अनुरूप होनी चाहिए। उन्होंने नए सीईओ से अयोध्या में गोशालाओं की व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की भी अपील की। राजू दास ने यह भी कहा कि उनकी व्यक्तिगत राय शुरू से रही है कि मंदिर की जिम्मेदारी किसी संत को दी जाती तो अधिक उपयुक्त होता, फिर भी उन्होंने पूर्व सैन्य अधिकारी की नियुक्ति का खुले मन से स्वागत किया।
वीएचपी और हनुमानगढ़ी का रुख
विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के महासचिव बजरंग लाल बागड़ा ने इस नियुक्ति को संस्थागत विकास का स्वाभाविक हिस्सा बताया। उनके अनुसार किसी भी बड़े संगठन को समय, परिस्थितियों और आवश्यकताओं के अनुरूप अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव करना होता है। उन्होंने कहा कि मंदिर ट्रस्ट के सभी दस ट्रस्टियों ने सर्वसम्मति से प्रबंधन में दक्षता और सुधार के लिए यह निर्णय लिया है।
सिद्ध पीठ हनुमानगढ़ी के महंत देवेशाचार्य जी महाराज ने बताया कि संत समाज पहले सीईओ पद सृजित करने के विचार का विरोध कर रहा था। परंतु ट्रस्ट द्वारा जीतेंद्र मिश्रा की सर्वसम्मति से नियुक्ति के बाद संतों में संतोष का भाव है। उन्होंने विशेष रूप से यह रेखांकित किया कि किसी आईएएस या आईपीएस अधिकारी की बजाय पूर्व सशस्त्र बल अधिकारी को यह दायित्व दिया गया है, जिससे मंदिर की पवित्रता और अनुशासन बनाए रखने की उम्मीद है।
विशेषज्ञ और धर्मगुरुओं का मत
महामंडलेश्वर विष्णु दास जी महाराज ने नियुक्ति को सराहनीय बताते हुए कहा कि राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी को लेकर विपक्ष ने राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश की थी। उनके अनुसार नए सीईओ जीतेंद्र मिश्रा ने 'ऑपरेशन सिंदूर' में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और देश व समाज के लिए उल्लेखनीय कार्य किया है।
धर्मगुरु करपात्री जी महाराज ने मिश्रा के सैन्य करियर का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मिश्रा ने कारगिल युद्ध में भाग लिया, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का आशीर्वाद प्राप्त किया, एयर मार्शल के पद तक पहुँचे और 'ऑपरेशन सिंदूर' में भी सहभागी रहे। उनके अनुसार इतने अनुभवी व्यक्ति का राम मंदिर का सीईओ बनना सौभाग्य की बात है।
बाबरी मामले के पूर्व पक्षकार की प्रतिक्रिया
बाबरी मस्जिद मामले के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने भी इस नियुक्ति की सराहना की। उन्होंने कहा कि अयोध्या का राम मंदिर देश और दुनिया के करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और सैन्य पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को इसका सीईओ बनाना एक अच्छा निर्णय है। अंसारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सैन्य सेवा से जुड़े लोगों पर देश का भरोसा सदा रहा है।
आगे की राह
नई नियुक्ति के बाद अब सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि जीतेंद्र मिश्रा मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता, अनुशासन और धार्मिक परंपराओं के बीच किस प्रकार संतुलन स्थापित करते हैं। संतों की अपेक्षाओं और ट्रस्ट की संस्थागत जरूरतों के बीच यह नियुक्ति एक नई शुरुआत के रूप में देखी जा रही है।