राम मंदिर CEO नियुक्ति: ट्रस्ट का स्वतंत्र फैसला, BJP बोली — बाहरी टिप्पणी बंद करें
सारांश
मुख्य बातें
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अयोध्या के राम मंदिर के प्रबंधन को पेशेवर और पारदर्शी स्वरूप देने के लिए पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की प्रक्रिया आरंभ कर दी है। 2 सितंबर को ट्रस्ट की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसके बाद पहले CEO के नाम की आधिकारिक घोषणा संभावित है। इस घटनाक्रम पर राजनीतिक दलों की तीखी प्रतिक्रियाएँ भी सामने आई हैं।
भाजपा का रुख: ट्रस्ट की स्वायत्तता अक्षुण्ण
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद दिनेश शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक स्वतंत्र संस्था है, जिसका गठन सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले के बाद विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत हुआ था। उन्होंने कहा, 'ट्रस्ट का अपना संविधान है और वे उसी के अनुसार जो भी कानूनी रूप से उचित निर्णय लेंगे, वह धार्मिक भावनाओं का पूरा सम्मान करेगा। किसी भी बाहरी व्यक्ति को इस पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।'
शर्मा ने यह भी रेखांकित किया कि राम मंदिर करोड़ों भक्तों की आस्था का केंद्र है और ट्रस्ट का प्रत्येक निर्णय उन्हीं की भावनाओं को प्राथमिकता देते हुए लिया जाएगा।
बिहार सरकार की प्रतिक्रिया: पारदर्शिता पर जोर
पटना से बिहार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने CEO नियुक्ति प्रक्रिया का समर्थन करते हुए कहा कि राम मंदिर में किसी भी परिस्थिति में अनियमितता स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा, 'चढ़ावा चोरी के मामले में भी त्वरित कार्रवाई की गई और अब CEO की नियुक्ति से प्रशासनिक ढाँचा और मज़बूत होगा।' गौरतलब है कि हाल के महीनों में मंदिर परिसर में चढ़ावा चोरी के कथित मामले सामने आए थे, जिन पर ट्रस्ट ने संज्ञान लिया था।
कांग्रेस का विरोध: भरोसे पर सवाल
लखनऊ में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने चढ़ावा चोरी के आरोपों का हवाला देते हुए ट्रस्ट पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'जिस ट्रस्ट ने भगवान राम के भक्तों का भरोसा खो दिया है और जहाँ दान व चढ़ावे की चोरी के आरोप सामने आए हैं, वह अब CEO नियुक्त कर रहा है — यह बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।' आलोचकों का कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया में जवाबदेही का ठोस तंत्र होना चाहिए।
पृष्ठभूमि: CEO नियुक्ति क्यों जरूरी
यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि हुई है और दान-संग्रह का आँकड़ा भी तेज़ी से बढ़ा है। एक पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति मंदिर प्रशासन को संस्थागत रूप देने और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में पहला बड़ा कदम माना जा रहा है। ट्रस्ट के सूत्रों के अनुसार, CEO का चयन योग्यता और अनुभव के आधार पर किया जाएगा।
आगे क्या होगा
2 सितंबर की बैठक के बाद ट्रस्ट द्वारा CEO के नाम की घोषणा अपेक्षित है। इस नियुक्ति से राम मंदिर प्रबंधन में एक नया अध्याय शुरू होने की उम्मीद है, हालाँकि विपक्षी दलों की आपत्तियाँ और जवाबदेही की माँग राजनीतिक विमर्श में बनी रहेगी।