2 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

राम मंदिर CEO नियुक्ति: ट्रस्ट का स्वतंत्र फैसला, BJP बोली — बाहरी टिप्पणी बंद करें

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
राम मंदिर CEO नियुक्ति: ट्रस्ट का स्वतंत्र फैसला, BJP बोली — बाहरी टिप्पणी बंद करें

सारांश

अयोध्या के राम मंदिर को पहली बार मिलेगा पूर्णकालिक CEO — ट्रस्ट की बैठक में नाम तय होने की उम्मीद। BJP ने बाहरी टिप्पणी को अनुचित बताया, तो कांग्रेस ने चढ़ावा चोरी के आरोपों का हवाला देकर ट्रस्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।

मुख्य बातें

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अयोध्या राम मंदिर के लिए पहले पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की।
2 सितंबर को ट्रस्ट की अहम बैठक हुई, जिसके बाद CEO के नाम की घोषणा संभावित।
BJP सांसद दिनेश शर्मा ने कहा — ट्रस्ट स्वतंत्र संस्था है, बाहरी लोगों को टिप्पणी का अधिकार नहीं।
बिहार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने पारदर्शिता और अनियमितता-मुक्त प्रबंधन पर जोर दिया।
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने चढ़ावा चोरी के कथित मामलों का हवाला देते हुए नियुक्ति प्रक्रिया को अस्वीकार्य बताया।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अयोध्या के राम मंदिर के प्रबंधन को पेशेवर और पारदर्शी स्वरूप देने के लिए पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की प्रक्रिया आरंभ कर दी है। 2 सितंबर को ट्रस्ट की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसके बाद पहले CEO के नाम की आधिकारिक घोषणा संभावित है। इस घटनाक्रम पर राजनीतिक दलों की तीखी प्रतिक्रियाएँ भी सामने आई हैं।

भाजपा का रुख: ट्रस्ट की स्वायत्तता अक्षुण्ण

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद दिनेश शर्मा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक स्वतंत्र संस्था है, जिसका गठन सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले के बाद विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत हुआ था। उन्होंने कहा, 'ट्रस्ट का अपना संविधान है और वे उसी के अनुसार जो भी कानूनी रूप से उचित निर्णय लेंगे, वह धार्मिक भावनाओं का पूरा सम्मान करेगा। किसी भी बाहरी व्यक्ति को इस पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।'

शर्मा ने यह भी रेखांकित किया कि राम मंदिर करोड़ों भक्तों की आस्था का केंद्र है और ट्रस्ट का प्रत्येक निर्णय उन्हीं की भावनाओं को प्राथमिकता देते हुए लिया जाएगा।

बिहार सरकार की प्रतिक्रिया: पारदर्शिता पर जोर

पटना से बिहार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने CEO नियुक्ति प्रक्रिया का समर्थन करते हुए कहा कि राम मंदिर में किसी भी परिस्थिति में अनियमितता स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा, 'चढ़ावा चोरी के मामले में भी त्वरित कार्रवाई की गई और अब CEO की नियुक्ति से प्रशासनिक ढाँचा और मज़बूत होगा।' गौरतलब है कि हाल के महीनों में मंदिर परिसर में चढ़ावा चोरी के कथित मामले सामने आए थे, जिन पर ट्रस्ट ने संज्ञान लिया था।

कांग्रेस का विरोध: भरोसे पर सवाल

लखनऊ में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने चढ़ावा चोरी के आरोपों का हवाला देते हुए ट्रस्ट पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'जिस ट्रस्ट ने भगवान राम के भक्तों का भरोसा खो दिया है और जहाँ दान व चढ़ावे की चोरी के आरोप सामने आए हैं, वह अब CEO नियुक्त कर रहा है — यह बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।' आलोचकों का कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया में जवाबदेही का ठोस तंत्र होना चाहिए।

पृष्ठभूमि: CEO नियुक्ति क्यों जरूरी

यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि हुई है और दान-संग्रह का आँकड़ा भी तेज़ी से बढ़ा है। एक पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति मंदिर प्रशासन को संस्थागत रूप देने और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में पहला बड़ा कदम माना जा रहा है। ट्रस्ट के सूत्रों के अनुसार, CEO का चयन योग्यता और अनुभव के आधार पर किया जाएगा।

आगे क्या होगा

2 सितंबर की बैठक के बाद ट्रस्ट द्वारा CEO के नाम की घोषणा अपेक्षित है। इस नियुक्ति से राम मंदिर प्रबंधन में एक नया अध्याय शुरू होने की उम्मीद है, हालाँकि विपक्षी दलों की आपत्तियाँ और जवाबदेही की माँग राजनीतिक विमर्श में बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता में है — न कि महज पद के सृजन में। चढ़ावा चोरी के कथित मामलों के बाद ट्रस्ट की विश्वसनीयता पहले से ही सवालों के घेरे में है, और बिना स्वतंत्र जवाबदेही तंत्र के CEO की नियुक्ति आलोचकों को संतुष्ट नहीं करेगी। BJP का 'बाहरी टिप्पणी बंद करो' का रुख राजनीतिक दृष्टि से समझ में आता है, परंतु जब सार्वजनिक आस्था और करोड़ों भक्तों का दान दाँव पर हो, तो जवाबदेही 'बाहरी हस्तक्षेप' नहीं, बल्कि नागरिक अधिकार है।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर में CEO की नियुक्ति क्यों हो रही है?
अयोध्या के राम मंदिर में बढ़ती श्रद्धालु संख्या और दान-संग्रह को देखते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने प्रबंधन को पेशेवर और पारदर्शी बनाने के लिए पहले पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की है। यह मंदिर प्रशासन को संस्थागत रूप देने का पहला बड़ा कदम माना जा रहा है।
राम मंदिर CEO की नियुक्ति कब होगी?
2 सितंबर को ट्रस्ट की बैठक के बाद CEO के नाम की घोषणा अपेक्षित है। हालाँकि ट्रस्ट की ओर से अभी कोई आधिकारिक तिथि नहीं बताई गई है।
BJP ने इस नियुक्ति पर क्या कहा?
BJP सांसद दिनेश शर्मा ने कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक स्वतंत्र संस्था है और उसका हर निर्णय उसके अपने संविधान के अनुसार होगा। उन्होंने बाहरी लोगों से इस विषय पर टिप्पणी न करने की अपील की।
कांग्रेस ने ट्रस्ट पर क्या आरोप लगाए?
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने चढ़ावा चोरी के कथित मामलों का हवाला देते हुए कहा कि ट्रस्ट ने भक्तों का भरोसा तोड़ा है और ऐसे में CEO की नियुक्ति स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने ट्रस्ट की जवाबदेही पर सवाल उठाए।
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला क्या है?
हाल के महीनों में राम मंदिर परिसर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले सामने आए थे, जिन पर ट्रस्ट ने त्वरित कार्रवाई का दावा किया। बिहार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने भी इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा कि मंदिर में किसी भी अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 6 घंटे पहले
  2. कल
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 महीना पहले