राम मंदिर ट्रस्ट CEO चयन पर सपा सांसद अवधेश प्रसाद का हमला, हाई कोर्ट निगरानी की मांग
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद अवधेश प्रसाद ने मंगलवार, 1 सितंबर को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) चयन प्रक्रिया को लेकर तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट को इस प्रक्रिया में पर्याप्त अधिकार नहीं दिए गए हैं और उन्होंने उच्च न्यायालय की देखरेख में एक स्वतंत्र समिति गठित करने की माँग एक बार फिर दोहराई।
सपा का विरोध और मुख्य आरोप
प्रसाद ने कहा, 'जो कुछ भी हुआ है उसका कोई मतलब नहीं है और इस मामले में ट्रस्ट को कोई अधिकार नहीं दिया गया है। हमने कई बार यह बात कही है और हमारे नेता अखिलेश ने भी कहा है कि हाई कोर्ट की देखरेख में एक समिति बनाई जानी चाहिए थी, क्योंकि यह एक बड़ा मुद्दा है।'
उन्होंने आगे कहा, 'जो लोग जिम्मेदार और जवाबदेह हैं, उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। यह घटना जिम्मेदार लोगों को बचाने के लिए हुई है और इस रिपोर्ट का कोई मतलब नहीं है। एक दिन पूरा देश इसके खिलाफ आवाज उठाएगा और भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगियों को इसके नतीजे भुगतने होंगे।'
चयन प्रक्रिया का घटनाक्रम
राम मंदिर के पहले सीईओ की नियुक्ति के लिए गठित सर्च कमेटी ने 11 जुलाई को अपनी पहली बैठक की थी, जिसमें पद के लिए योग्यता के मानदंड तय किए गए और इच्छुक उम्मीदवारों से आवेदन माँगे गए। मंगलवार को चयन समिति ट्रस्ट को शॉर्टलिस्ट किए गए तीन उम्मीदवारों के नाम सौंपने वाली थी।
सीईओ पद के लिए साक्षात्कार लेने वाले पैनल में रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी और विशेषज्ञ सदस्य सुरेश हवाडे शामिल हैं। ये सदस्य अयोध्या पहुँच चुके हैं।
बुधवार की बैठक में बड़े फैसले संभव
चयन प्रक्रिया की अंतिम रिपोर्ट राम जन्मभूमि परिसर में ट्रस्ट को सौंपी जाएगी। बुधवार को दोपहर 2 बजे मणिरामदास छावनी में बैठकों का दौर शुरू होगा, जहाँ ट्रस्टी मंदिर के पहले सीईओ के नाम की घोषणा कर सकते हैं। इसके अलावा ट्रस्ट के रिक्त पदों को भरने पर भी विचार होगा।
इस्तीफों से उपजी रिक्तियाँ और पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि यह नियुक्ति ऐसे समय में हो रही है जब राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी की घटना सामने आई थी। ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद दो महत्वपूर्ण पद रिक्त हो गए थे, जिन्हें भरने की प्रक्रिया भी बुधवार की बैठक में आगे बढ़ सकती है। आलोचकों का कहना है कि इन परिस्थितियों में पारदर्शी चयन प्रक्रिया और भी ज़रूरी हो जाती है।
राम मंदिर ट्रस्ट के पहले सीईओ की नियुक्ति की यह प्रक्रिया आने वाले दिनों में मंदिर प्रशासन की दिशा तय करने में निर्णायक साबित होगी।