राम मंदिर दान घोटाले पर सपा का संसद में हमला, अवधेश प्रसाद बोले- 'सोमवार को उठाएंगे मुद्दा'
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) ने राम मंदिर दान प्रकरण को लेकर सरकार को संसद में घेरने की पूरी तैयारी कर ली है। अयोध्या से सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने स्पष्ट किया कि सोमवार को सदन की कार्यवाही सुचारू रहने पर पार्टी इस मामले को पूरी ताकत के साथ उठाएगी। नीट पेपर लीक विवाद के चलते संसद में पहले यह चर्चा नहीं हो सकी थी।
अवधेश प्रसाद का आरोप
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा, 'काफी समय से यह कहा जा रहा है कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की नगरी में भगवान राम के मंदिर में करोड़ों रुपए के सोने, चांदी, हीरे, गहनों और जमीन से जुड़ा एक बड़ा घोटाला हुआ है। भगवान राम के लाखों भक्तों की आस्था और भावनाओं के साथ धोखा हुआ है।' उन्होंने यह भी कहा कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक महीने से भी पहले इस मुद्दे को उठाया था, फिर भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
सरकार पर बचाव का आरोप
अवधेश प्रसाद ने सरकार पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा, 'सरकार पूरी तरह से बड़ी मछलियों को बचाने की कोशिश कर रही है, लेकिन वे लोग बच नहीं सकते।' उन्होंने बताया कि अखिलेश यादव और उन्होंने स्वयं इस मुद्दे को संसदीय नियमों के तहत सदन में उठाया था, परंतु सदन के बाधित रहने के कारण विधिवत चर्चा नहीं हो सकी। यह ऐसे समय में आया है जब संसद का मानसून सत्र जारी है और विपक्ष कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश में है।
नई एसआईटी पर सपा का रुख
सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने अयोध्या मामले की जांच के लिए नई एसआईटी (SIT) के गठन पर कहा कि सर्वोच्च न्यायालय को पहली एसआईटी की जांच पर भरोसा नहीं था, इसलिए नई एसआईटी बनाई गई। उन्होंने कहा, 'समाजवादी पार्टी का मानना है कि यह करोड़ों सनातन धर्म को मानने वाले लोगों की आस्था का सवाल है। जो भी दोषी हैं, उन पर कार्रवाई होनी चाहिए।'
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच
फखरुल हसन चांद ने यह भी स्पष्ट किया कि यह पूरी जांच सर्वोच्च न्यायालय के ऑब्जर्वेशन में चल रही है और समाजवादी पार्टी को पूरा भरोसा है कि दोषियों पर कार्रवाई होगी। गौरतलब है कि यह Nवीं बार है जब राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय मामलों पर संसद में सवाल उठाने की कोशिश की जा रही है।
आगे क्या होगा
सोमवार को संसद में सपा के इस कदम से सदन में तीखी बहस की संभावना है। सपा का दावा है कि वह इस मामले में दस्तावेज़ी साक्ष्य के साथ सरकार को जवाब देने पर मजबूर करेगी। यदि सदन सुचारू रहा तो यह मुद्दा मानसून सत्र की सबसे बड़ी राजनीतिक टकराहट बन सकता है।