राम मंदिर ट्रस्ट CEO तैनाती पर अवधेश प्रसाद: 'चंदा चोरी करने वाले बचेंगे नहीं, 2027 में BJP का सफाया'
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी के अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद ने 2 सितंबर 2026 को लखनऊ में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति, महाराष्ट्र में मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) विवाद और नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ पर तीखी प्रतिक्रिया दी। प्रसाद ने आरोप लगाया कि ट्रस्ट में हुई कथित चंदा चोरी के मामले में 'बड़ी मछलियों' को बचाने का काम हो रहा है और सरकार जवाबदेही से बच रही है।
CEO तैनाती पर विरोध
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा CEO की नियुक्ति किए जाने पर अवधेश प्रसाद ने कहा, 'सीईओ की तैनाती का कोई मतलब नहीं है। इस पद पर चाहे आईएएस हो या आईपीएस, उसे सरकार के दबाव में काम करना पड़ेगा।' उन्होंने यह भी कहा कि अखिलेश यादव ने कथित चंदा चोरी का खुलासा किया था, जिसे 2 महीने से अधिक हो चुके हैं, परंतु उनके अनुसार अभी तक कोई सार्थक कार्रवाई नहीं हुई।
प्रसाद ने आरोप लगाया कि यह कथित 'चोरी और डकैती' प्रभु श्रीराम के दरबार की है और इसमें शामिल लोग अंततः न्याय से नहीं बचेंगे। उन्होंने धार्मिक संदर्भ देते हुए कहा, 'जब-जब धर्म की हानि होती है, तब-तब किसी शक्ति का उदय होता है।' उन्होंने दावा किया कि इसकी 'शुरुआत 2024 लोकसभा चुनाव से हो चुकी है' और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का 'सफाया' होगा।
महाराष्ट्र SIR विवाद पर आरोप
महाराष्ट्र में विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत 2 करोड़ से अधिक नाम मतदाता सूची से कटने के आरोपों पर प्रसाद ने BJP पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है और BJP सरकार ने लगातार दलितों, पिछड़े वर्गों तथा अल्पसंख्यकों के मतदान अधिकार छीनने की कोशिश की है।
उन्होंने बिहार और पश्चिम बंगाल का भी उल्लेख किया और कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय गई थीं। प्रसाद के अनुसार, 'लोगों का BJP से भरोसा और विश्वास उठ गया है और अब पार्टी के पास मतदाताओं को गुमराह करने के अलावा कुछ नहीं बचा है।' यह आरोप उन्होंने अपनी ओर से लगाए हैं; BJP की ओर से इस पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं थी।
नेपाल बाढ़ पर मानवीय अपील
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ पर प्रसाद ने इसे 'बेहद दुखद और दिल दहला देने वाली घटना' करार दिया। उन्होंने भारत सरकार से मानवीय आधार पर 'युद्ध स्तर' पर सहायता प्रदान करने की माँग की।
प्रसाद ने विशेष रूप से उन भारतीय नागरिकों की चिंता जताई जो नेपाल में अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को खोज अभियान चलाकर लापता लोगों को उनके परिवारों से मिलाना चाहिए और इसके लिए तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय प्रबंधन को लेकर विपक्षी दलों ने लगातार सवाल उठाए हैं। गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पहले ही ट्रस्ट में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया था। CEO की नियुक्ति को सरकार ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने का कदम बताया है, जबकि विपक्ष इसे अपर्याप्त बता रहा है। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नज़दीक आने के साथ, यह मुद्दा राजनीतिक रूप से और अधिक संवेदनशील होता जा रहा है।