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भारत में डेटा सेंटर क्षमता 2029 तक 6 गीगावाट पहुँचने की उम्मीद, ₹9.2 लाख करोड़ निवेश की दरकार

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भारत में डेटा सेंटर क्षमता 2029 तक 6 गीगावाट पहुँचने की उम्मीद, ₹9.2 लाख करोड़ निवेश की दरकार

सारांश

भारत का डेटा सेंटर उद्योग 2029 तक 1.6 गीगावाट से 6 गीगावाट की छलाँग लगाने को तैयार है — और इसके पीछे AI की भूख, हाइपरस्केलर दाँव और सरकार की 20 साल की टैक्स हॉलिडे का संयोग है। 110 अरब डॉलर का यह दांव भारत को वैश्विक क्लाउड मानचित्र पर नई धुरी बना सकता है।

मुख्य बातें

भारत की डेटा सेंटर क्षमता जून 2026 के 1.6 गीगावाट से बढ़कर 2029 तक 6 गीगावाट होने का अनुमान है।
इस विस्तार के लिए लगभग 110 अरब डॉलर (करीब ₹9.2 लाख करोड़) की पूँजी आवश्यक होगी।
2026 की पहली छमाही में 101 मेगावाट माँग दर्ज हुई — तीन वर्षों के औसत से 20% अधिक ; खाली क्षमता रिकॉर्ड निचले स्तर 2.8% पर।
वैश्विक हाइपरस्केलर कंपनियाँ नई क्षमता का 30% सेल्फ-बिल्ड सुविधाओं से विकसित करेंगी; 2029 तक 1.4 गीगावाट इसी माध्यम से।
केंद्रीय बजट में विदेशी क्लाउड प्रदाताओं के लिए 31 मार्च 2047 तक 20 वर्षीय टैक्स हॉलिडे की घोषणा; 50 अरब डॉलर से अधिक की विदेशी निवेश प्रतिबद्धताएँ।
हैदराबाद और विशाखापत्तनम गीगावाट-स्तरीय हब के रूप में उभर रहे हैं; 2033 तक SMR-आधारित ऑफ-ग्रिड ऊर्जा की संभावना।

भारत का डेटा सेंटर उद्योग तेज़ रफ़्तार से विस्तार की ओर बढ़ रहा है — जून 2026 तक 1.6 गीगावाट की मौजूदा स्थापित क्षमता 2029 तक 6 गीगावाट तक पहुँचने का अनुमान है। जेएलएल की बुधवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, इस विस्तार के लिए लगभग 110 अरब डॉलर (करीब ₹9.2 लाख करोड़) की पूँजी की आवश्यकता होगी। इस उछाल को मुख्य रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) वर्कलोड और हाइपरस्केल क्लाउड तैनाती से बल मिल रहा है।

माँग और आपूर्ति का मज़बूत समीकरण

जेएलएल की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में डेटा सेंटर क्षेत्र में 101 मेगावाट की माँग दर्ज की गई, जो पिछले तीन वर्षों की पहली छमाही के औसत से 20 प्रतिशत से अधिक है। यह आँकड़ा दर्शाता है कि डिजिटल बुनियादी ढाँचे की भूख भारत में तेज़ी से बढ़ रही है।

आपूर्ति पक्ष भी पीछे नहीं रहा — इसी अवधि में 85 मेगावाट नई क्षमता जोड़ी गई, जो मुख्यतः मुंबई और चेन्नई में केंद्रित रही। पहले से बुक क्षमता की त्वरित डिलीवरी के कारण बाज़ार में खाली क्षमता (vacancy) घटकर रिकॉर्ड निचले स्तर 2.8 प्रतिशत पर आ गई है, जो बाज़ार की असाधारण मज़बूती को रेखांकित करती है।

हाइपरस्केलर कंपनियाँ बदल रही हैं बाज़ार की तस्वीर

रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक हाइपरस्केलर कंपनियाँ भारत के डेटा सेंटर बाज़ार की मूलभूत संरचना को बदल रही हैं। ये कंपनियाँ नई क्षमता का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा सेल्फ-बिल्ड सुविधाओं के ज़रिये विकसित करने की प्रतिबद्धता जता रही हैं। हाइपरस्केल सेल्फ-बिल्ड परियोजनाओं के तहत 2029 तक 1.4 गीगावाट अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होने की उम्मीद है।

गौरतलब है कि बड़े निवेश के चलते हैदराबाद और विशाखापत्तनम जैसे शहर गीगावाट-स्तरीय डेटा सेंटर हब के रूप में उभर रहे हैं, जबकि मुंबई और चेन्नई जैसे स्थापित बाज़ार भी तेज़ विस्तार जारी रखे हुए हैं।

सरकारी नीति और विदेशी निवेश

हालिया केंद्रीय बजट में विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए 20 वर्ष की टैक्स हॉलिडे की घोषणा की गई है, जिसे 31 मार्च 2047 तक बढ़ाया गया है। इस नीतिगत प्रोत्साहन के परिणामस्वरूप 50 अरब डॉलर से अधिक की विदेशी पूँजी निवेश प्रतिबद्धताएँ आकर्षित हुई हैं।

यह नीति भारत को वैश्विक AI और क्लाउड सेवाओं के लिए एक प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के साथ-साथ दीर्घकालिक पूँजी निवेश के जोखिम को कम करने में सहायक बताई जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत डिजिटल अर्थव्यवस्था में वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

निवेश का विस्तृत ढाँचा

जेएलएल की रिपोर्ट के अनुसार, 6 गीगावाट क्षमता विस्तार के लिए आवश्यक 110 अरब डॉलर का खर्च तीन प्रमुख श्रेणियों में बँटा होगा: रियल एस्टेट निर्माण पर 4 अरब डॉलर, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और प्लंबिंग (MEP) बुनियादी ढाँचे पर 18 अरब डॉलर, और सर्वर व रैक सहित IT उपकरणों पर 88 अरब डॉलर

भविष्य की ऊर्जा संभावनाएँ

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि 2033 तक छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) विकसित होने से बड़े डेटा सेंटर परिसरों के लिए ऑफ-ग्रिड बिजली समाधान की भविष्य में संभावनाएँ पैदा हो सकती हैं। यह विकल्प डेटा सेंटर उद्योग की ऊर्जा-सघन प्रकृति को देखते हुए दीर्घकालिक स्थिरता के लिए महत्त्वपूर्ण हो सकता है। भारत के डेटा सेंटर परिदृश्य की अगली परीक्षा यह होगी कि क्या बिजली आपूर्ति और भूमि अधिग्रहण की चुनौतियाँ इस महत्त्वाकांक्षी विस्तार की रफ़्तार को बनाए रख सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती बिजली आपूर्ति और भूमि अधिग्रहण की है — दो ऐसे क्षेत्र जहाँ भारत का ट्रैक रिकॉर्ड मिला-जुला रहा है। 20 वर्षीय टैक्स हॉलिडे ने विदेशी प्रतिबद्धताएँ तो खींची हैं, पर 'प्रतिबद्धता' और 'तैनाती' के बीच की खाई अक्सर नीति-निर्माताओं को चौंकाती है। हैदराबाद और विशाखापत्तनम का उभरना भू-राजनीतिक विविधीकरण का संकेत है, लेकिन इन शहरों में ग्रिड स्थिरता और जल संसाधन की उपलब्धता पर ध्यान देना ज़रूरी है। बिना इन बाधाओं के ठोस समाधान के, 110 अरब डॉलर का निवेश अनुमान महज़ एक आशावादी स्लाइड बनकर रह सकता है।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2029 तक भारत की डेटा सेंटर क्षमता कितनी होगी?
जेएलएल की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की डेटा सेंटर क्षमता जून 2026 के 1.6 गीगावाट से बढ़कर 2029 तक 6 गीगावाट होने का अनुमान है। इस विस्तार के लिए लगभग 110 अरब डॉलर की पूँजी आवश्यक होगी।
भारत में डेटा सेंटर विस्तार के लिए 110 अरब डॉलर कहाँ खर्च होंगे?
जेएलएल रिपोर्ट के अनुसार, 110 अरब डॉलर में से 88 अरब डॉलर IT उपकरणों (सर्वर, रैक) पर, 18 अरब डॉलर MEP बुनियादी ढाँचे पर, और 4 अरब डॉलर रियल एस्टेट निर्माण पर खर्च होंगे।
भारत में डेटा सेंटर विस्तार को कौन-सी सरकारी नीति बढ़ावा दे रही है?
केंद्रीय बजट में विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए 31 मार्च 2047 तक 20 वर्षीय टैक्स हॉलिडे की घोषणा की गई है। इस नीति के तहत 50 अरब डॉलर से अधिक की विदेशी निवेश प्रतिबद्धताएँ आकर्षित हुई हैं।
हाइपरस्केल सेल्फ-बिल्ड डेटा सेंटर का भारत में क्या महत्त्व है?
वैश्विक हाइपरस्केलर कंपनियाँ नई क्षमता का लगभग 30 प्रतिशत सेल्फ-बिल्ड सुविधाओं के ज़रिये विकसित करने की प्रतिबद्धता जता रही हैं। 2029 तक इन परियोजनाओं से 1.4 गीगावाट अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होने की उम्मीद है।
भारत में डेटा सेंटर हब के रूप में कौन-से नए शहर उभर रहे हैं?
हैदराबाद और विशाखापत्तनम बड़े निवेश के कारण गीगावाट-स्तरीय डेटा सेंटर हब के रूप में उभर रहे हैं। मुंबई और चेन्नई जैसे स्थापित बाज़ार भी तेज़ विस्तार जारी रखे हुए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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