भारत में डेटा सेंटर बूम: 2030 तक 1 लाख इंजीनियरों की माँग, ₹22 अरब डॉलर का बाज़ार
सारांश
मुख्य बातें
भारत का डेटा सेंटर उद्योग 2030 तक लगभग 1 लाख कुशल पेशेवरों की माँग उत्पन्न कर सकता है — यह निष्कर्ष एनएलबी सर्विसेज की एक ताज़ा रिपोर्ट में सामने आया है, जो 14 जुलाई को जारी की गई। रिपोर्ट के अनुसार, देश की स्थापित डेटा सेंटर क्षमता मौजूदा लगभग 1.5 गीगावाट से बढ़कर दशक के अंत तक 6.5 गीगावाट तक पहुँचने का अनुमान है, और यह क्षेत्र भारत के सबसे तेज़ी से विस्तार लेते इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टरों में शामिल हो चुका है।
निवेश और बाज़ार का आकार
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के डेटा सेंटर बाज़ार का आकार 22 अरब डॉलर से अधिक हो सकता है। इस क्षेत्र में अब तक 126 अरब डॉलर से अधिक की निवेश प्रतिबद्धताएँ दर्ज की जा चुकी हैं। यह आँकड़ा दर्शाता है कि वैश्विक और घरेलू दोनों निवेशक भारत को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के अगले बड़े केंद्र के रूप में देख रहे हैं।
किन भूमिकाओं में होगी सबसे अधिक माँग
रिपोर्ट में उन विशेषज्ञ भूमिकाओं की पहचान की गई है जिनकी माँग सबसे तेज़ी से बढ़ रही है। इनमें एआई इंफ्रास्ट्रक्चर ऑपरेशंस इंजीनियर, लिक्विड कूलिंग इंजीनियर, एनर्जी ऑप्टिमाइज़ेशन स्पेशलिस्ट, क्रिटिकल फैसिलिटीज़ इंजीनियर और पावर सिस्टम एक्सपर्ट प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त, क्लाउड ऑपरेशंस, प्लेटफॉर्म इंजीनियरिंग, DevOps, MLOps और डेटा सेंटर ऑटोमेशन जैसे डिजिटल क्षेत्रों में भी विशेषज्ञों की भारी कमी का अनुमान है।
रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले वर्षों में एआई-आधारित वर्कलोड भारत की कुल डेटा सेंटर क्षमता का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा बन जाएगा। इससे इस क्षेत्र में प्रवेश करने वाले इंजीनियरों के लिए एआई इंफ्रास्ट्रक्चर की समझ एक अनिवार्य कौशल बनती जा रही है।
विशेषज्ञ की राय
एनएलबी सर्विसेज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सचिन अलुग ने कहा कि भारत में डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार केवल एक बुनियादी ढाँचा परियोजना नहीं, बल्कि देश के युवाओं के लिए राष्ट्र निर्माण का बड़ा अवसर है।
उन्होंने कहा, 'भारत जिस तेज़ी से डिजिटल परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ रहा है, उससे एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लाउड ऑपरेशंस, ऑटोमेशन, पावर सिस्टम और क्रिटिकल फैसिलिटी मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञ पेशेवरों की नई पीढ़ी की माँग तेज़ी से बढ़ रही है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह केवल रिक्त पदों को भरने का मामला नहीं है, बल्कि आने वाले दशकों तक भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को मज़बूत आधार देने वाले कुशल कार्यबल का निर्माण करना है।
कौशल की कमी: सबसे बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि शिक्षा संस्थान, उद्योग और नीति-निर्माता मिलकर भविष्य के अनुरूप कुशल कार्यबल तैयार नहीं करते, तो स्किल गैप इस क्षेत्र की तेज़ रफ़्तार वृद्धि में बड़ी बाधा बन सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार डिजिटल इंडिया और राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन जैसी योजनाओं के ज़रिए तकनीकी कार्यबल तैयार करने पर ज़ोर दे रही है।
अगली पीढ़ी के एआई-संचालित डेटा सेंटरों को उन्नत कूलिंग सिस्टम, बेहतर ऊर्जा प्रबंधन और अत्याधुनिक बुनियादी ढाँचे की आवश्यकता होगी — जो इन विशेषज्ञ भूमिकाओं की माँग को और तेज़ करेगा। यदि भारत इस कौशल अंतराल को समय रहते नहीं पाटता, तो निवेश के बावजूद रोज़गार के लाभ सीमित रह सकते हैं।