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भारत में डेटा सेंटर की क्षमता 2020 के बाद 4 गुना बढ़कर 1,500 मेगावाट हुई: केंद्रीय मंत्री

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भारत में डेटा सेंटर की क्षमता 2020 के बाद 4 गुना बढ़कर 1,500 मेगावाट हुई: केंद्रीय मंत्री

सारांश

भारत के डेटा सेंटर उद्योग ने 2020 के बाद से तेजी से वृद्धि की है, 375 मेगावाट से बढ़कर 2025 में लगभग 1,500 मेगावाट तक पहुँचने की उम्मीद है। केंद्रीय मंत्री ने इस वृद्धि के पीछे की रणनीतियों और तकनीकों की जानकारी दी है।

मुख्य बातें

2020 में डेटा सेंटर की क्षमता 375 मेगावाट थी।
2025 तक यह 1,500 मेगावाट होने की उम्मीद है।
डेटा सेंटर में 38,231 जीपीयू उपलब्ध कराए गए हैं।
बिजली की मांग 2031-32 तक 13.56 गीगावाट तक पहुँच सकती है।
नए कूलिंग तकनीकें पानी की खपत को कम करने में सहायक हैं।

नई दिल्ली, 13 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को संसद में बताया कि भारत का डेटा सेंटर उद्योग तेज़ी से विकसित हो रहा है। 2020 में देश की कुल डेटा सेंटर क्षमता लगभग 375 मेगावाट थी, जो 2025 तक चार गुना बढ़कर लगभग 1,500 मेगावाट हो जाएगी।

केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के विकास के लिए एआई कंप्यूटिंग क्षमता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 14 पंजीकृत सेवा प्रदाताओं और डेटा सेंटरों के माध्यम से लगभग 38,231 जीपीयू उपलब्ध कराए गए हैं।

इन कंप्यूटिंग संसाधनों को स्टार्टअप, शोधकर्ताओं, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य योग्य उपयोगकर्ताओं को औसतन 65 रुपए प्रति घंटे की सब्सिडी दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है, जो वैश्विक औसत लागत का लगभग एक-तिहाई है।

भारत के प्रमुख तकनीकी केंद्रों जैसे मुंबई, नवी मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु, नोएडा और जामनगर में डेटा सेंटर स्थापित किए गए हैं।

मंत्री ने कहा कि सरकार डेटा सेंटर इकोसिस्टम की बढ़ती ज़रूरतों, जैसे कि बिजली और पानी की मांग, से पूरी तरह अवगत है।

ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, डेटा सेंटर की बिजली की मांग 2031-32 तक लगभग 13.56 गीगावाट तक पहुँच सकती है, क्योंकि एआई और बड़े पैमाने की कंप्यूटिंग सेवाओं के साथ यह क्षेत्र तेज़ी से बढ़ रहा है।

उन्होंने बताया कि देश के राष्ट्रीय ट्रांसमिशन इन्फ्रास्ट्रक्चर को लगातार बढ़ाया जा रहा है ताकि बढ़ती बिजली मांग को पूरा किया जा सके और सभी क्षेत्रों में विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।

हाल ही में लागू किया गया सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (एसएचएएनटीआई) अधिनियम भी भविष्य में छोटे मॉड्यूलर और माइक्रो न्यूक्लियर रिएक्टरों के उपयोग को संभव बनाकर एआई और डेटा सेंटर जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए विश्वसनीय बिजली उपलब्ध कराने में मदद करेगा।

मंत्री ने बताया कि डेटा सेंटर में पानी की खपत इस्तेमाल की जाने वाली कूलिंग तकनीक पर निर्भर करती है।

उन्होंने कहा कि डेटा सेंटर जैसे औद्योगिक उपयोगों के लिए भूजल का उपयोग जल शक्ति मंत्रालय के दिशानिर्देशों के तहत नियंत्रित किया जाता है।

पानी की खपत कम करने के लिए उद्योग अब डायरेक्ट-टू-चिप लिक्विड कूलिंग, एडियाबेटिक कूलिंग और इमर्शन कूलिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रहा है।

इसके अलावा, कंपनियां हाई-डेंसिटी रैक सिस्टम भी स्थापित कर रही हैं ताकि उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग और एआई कार्यभार को बेहतर तरीके से संभाला जा सके और बिजली एवं पानी की खपत को भी कम किया जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि ऊर्जा और संसाधनों के प्रबंधन के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। यह विकास न केवल देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी भारत के स्थान को और अधिक दृढ़ करेगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में डेटा सेंटर की क्षमता कितनी है?
भारत में डेटा सेंटर की क्षमता 2020 के बाद बढ़कर लगभग 1,500 मेगावाट हो गई है।
डेटा सेंटर की वृद्धि का कारण क्या है?
डेटा सेंटर की वृद्धि का कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बड़े पैमाने की कंप्यूटिंग सेवाओं की बढ़ती मांग है।
कौन सी तकनीकें पानी की खपत को कम करने में मदद कर रही हैं?
डायरेक्ट-टू-चिप लिक्विड कूलिंग, एडियाबेटिक कूलिंग और इमर्शन कूलिंग जैसी तकनीकें पानी की खपत को कम करने में मदद कर रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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