भारत की डेटा सेंटर क्षमता 2030 तक 4 गुना बढ़ने की उम्मीद: 1.5 लाख करोड़ रुपए का निवेश

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भारत की डेटा सेंटर क्षमता 2030 तक 4 गुना बढ़ने की उम्मीद: 1.5 लाख करोड़ रुपए का निवेश

सारांश

भारत की डेटा सेंटर क्षमता में वित्त वर्ष 2030 तक चार गुना वृद्धि की संभावना है। इसमें 1.5 लाख करोड़ रुपए का निवेश होने की उम्मीद है, जो डिजिटल परिवर्तन और एआई के उपयोग से प्रेरित है।

Key Takeaways

  • भारत की डेटा सेंटर क्षमता 2030 तक 4 गुना बढ़ने की संभावना।
  • 1.5 लाख करोड़ रुपए का निवेश अपेक्षित।
  • डिजिटलीकरण और एआई क्षेत्र की वृद्धि में सहायक।
  • उच्च लागत और कमीशनिंग की समयसीमा में वृद्धि।
  • लंबी अवधि के समझौतों से स्थिरता में वृद्धि।

नई दिल्ली, 25 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत की डेटा सेंटर क्षमता वित्त वर्ष 2030 तक लगभग चार गुना बढ़कर 4 गीगावाट होने की संभावना है, जिसमें 1.5 लाख करोड़ रुपए का निवेश होने की उम्मीद जताई गई है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में साझा की गई।

केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में प्रति मिलियन इंटरनेट उपभोक्ताओं के लिए केवल 1.2 मेगावाट की डेटा सेंटर क्षमता है, जो कि वैश्विक औसत 5 मेगावाट से काफी कम है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटलीकरण, लागत प्रतिस्पर्धा, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का बढ़ता उपयोग भारत के डेटा सेंटर क्षेत्र में महत्वपूर्ण वृद्धि का कारण बन रहा है। 2025 तक भारत की वैश्विक डेटा सेंटर बाजार में हिस्सेदारी लगभग 4 प्रतिशत और क्षमता 1.2 गीगावाट होने की उम्मीद है।

वित्त वर्ष 2022-2025 के दौरान देश की को-लोकेशन डेटा सेंटर क्षमता दोगुनी होकर 1.2 गीगावाट हो गई, और उच्च उपयोग स्तर (औसतन 90 प्रतिशत से अधिक) ने भी इसमें योगदान दिया।

रेटिंग एजेंसी ने वित्त वर्ष 2026-2030 के दौरान उद्योग के राजस्व में लगभग 24 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) का अनुमान लगाया है, जबकि ईबीआईटीडीए मार्जिन लगभग 40-42 प्रतिशत पर स्थिर रहने की उम्मीद है। हालांकि, विकास के चरण में उच्च पूंजीगत व्यय के कारण लीवरेज स्तर अपेक्षाकृत ऊँचा रह सकता है।

लंबी अवधि के समझौतों के माध्यम से इस क्षेत्र में राजस्व की स्पष्टता है, जो स्थिर नकदी प्रवाह सुनिश्चित करती है और ग्राहकों की उच्च स्तर की प्रतिबद्धता को बढ़ावा देती है।

केयरएज रेटिंग्स की निदेशक पूजा जालान ने कहा, "उच्च पूंजीगत व्यय, मजबूत प्रायोजकों की धन जुटाने की क्षमता और भारतीय डेटा सेंटर संस्थाओं को लक्षित बड़े इक्विटी निवेशों के साथ यह उद्योग तेजी से विकास कर रहा है।"

उन्होंने कहा कि एआई-आधारित मांग विकास की गति को बढ़ाएगी, जबकि उद्योग की पूरी क्षमता को साकार करने के लिए विद्युत अवसंरचना का समर्थन अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने आगे कहा कि बढ़ती लागत और कमीशनिंग की समयसीमा में वृद्धि के बीच नकदी प्रवाह को प्रबंधित करने की क्षमता निरंतरता के लिए महत्वपूर्ण होगी।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि हाल के वर्षों में डेटा सेंटर की लागत में 50-70 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिसका मुख्य कारण भूमि की ऊंची कीमतें, एडवांस कूलिंग तकनीक का अपनाना और नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश शामिल हैं। इसके अलावा, कार्यक्षेत्र में बदलाव और मंजूरी मिलने में देरी के कारण कमीशनिंग की समयसीमा भी बढ़ गई है।

केयरएज रेटिंग्स के एसोसिएट डायरेक्टर तेज किरण ने कहा कि डेटा सेंटर की मांग वर्तमान में एंटरप्राइज आईटी और क्लाउड स्टोरेज द्वारा संचालित है, लेकिन अगले 5-7 वर्षों में एआई-आधारित कार्यभार विकास के अगले चरण को गति प्रदान करेगा।

Point of View

जो तकनीकी विकास और निवेश के लिए एक सकारात्मक संकेत है। यह महत्वपूर्ण है कि हम इस क्षेत्र की क्षमता को पूर्ण रूप से साकार करने के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचा तैयार करें।
NationPress
26/03/2026

Frequently Asked Questions

भारत की डेटा सेंटर क्षमता कितनी बढ़ने की उम्मीद है?
भारत की डेटा सेंटर क्षमता वित्त वर्ष 2030 तक लगभग चार गुना बढ़कर 4 गीगावाट होने की संभावना है।
इस क्षेत्र में कितना निवेश होगा?
इस क्षेत्र में 1.5 लाख करोड़ रुपए का निवेश होने की उम्मीद है।
डिजिटलीकरण का डेटा सेंटर क्षमता पर क्या प्रभाव है?
डिजिटलीकरण, लागत प्रतिस्पर्धा और एआई का बढ़ता उपयोग भारत के डेटा सेंटर क्षेत्र में वृद्धि का कारण बन रहा है।
डेटा सेंटर की लागत में वृद्धि का कारण क्या है?
डेटा सेंटर की लागत में 50-70 प्रतिशत की वृद्धि का मुख्य कारण भूमि की ऊंची कीमतें और एडवांस कूलिंग तकनीक का अपनाना है।
भविष्य में डेटा सेंटर की मांग कैसे बढ़ेगी?
भविष्य में एंटरप्राइज आईटी और क्लाउड स्टोरेज से संचालित डेटा सेंटर की मांग बढ़ने की उम्मीद है।
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