भारत के डेटा सेंटर की क्षमता में 2026 तक 30 प्रतिशत का इजाफा: नई रिपोर्ट

Click to start listening
भारत के डेटा सेंटर की क्षमता में 2026 तक 30 प्रतिशत का इजाफा: नई रिपोर्ट

सारांश

भारत में डेटा सेंटर की क्षमता में तेजी से वृद्धि होने वाली है। 2026 तक इसमें सालाना 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी की उम्मीद है, जो निवेशकों और मांग की बढ़ती रुचि का परिणाम है। जानें इस रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु।

Key Takeaways

  • भारत की डेटा सेंटर क्षमता में 2026 तक 30 प्रतिशत वृद्धि की संभावना है।
  • इस वर्ष लगभग 500 मेगावाट नई क्षमता जोड़ी जाएगी।
  • डेटा सेंटर में निवेश में तेजी आ रही है।
  • मुंबई भारत का सबसे बड़ा डेटा सेंटर केंद्र बना हुआ है।
  • सरकारी नीतियों से निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

नई दिल्ली, 1 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत की डेटा सेंटर क्षमता 2026 में हर साल 30 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद जताई गई है। यह वृद्धि मुख्य रूप से मांग में वृद्धि और इस क्षेत्र में निवेशकों की निरंतर रुचि के कारण होने जा रही है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में सामने आई है।

सीबीआरई के अध्ययन के अनुसार, इस वर्ष लगभग 500 मेगावाट की नई डेटा सेंटर क्षमता जोड़ी जाएगी, जो 2025 में जोड़ी गई 440 मेगावाट की रिकॉर्ड क्षमता से भी अधिक है।

रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के अंत तक देश में डेटा सेंटर की कुल क्षमता लगभग 1,700 मेगावाट तक पहुँच जाएगी।

यह क्षेत्र नई पूंजी को भी आकर्षित कर रहा है और 2025 में 56.4 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धताएं मिली हैं, जिससे कुल निवेश की प्रतिबद्धताएं 126 अरब डॉलर तक पहुँच गई हैं।

इन प्रतिबद्धताओं में इस वर्ष लगभग 45 प्रतिशत की वृद्धि की संभावना है, जिससे यह राशि संभवतः 180 अरब डॉलर से अधिक हो सकती है।

सीबीआरई के अध्यक्ष और सीईओ अंशुमन मैगजीन ने कहा, "भारत में डेटा सेंटर का विकास अब संभावनाओं की बात नहीं रह गई है, बल्कि यह बड़े पैमाने पर कार्यान्वयन की ओर बढ़ रहा है।" उन्होंने यह भी कहा कि विकास को बढ़ावा देने में विदेशी पूंजी की महत्वपूर्ण भूमिका है।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख राज्य निवेश में अग्रणी भूमिका निभाएंगे, लेकिन कम लेटेंसी, 5जी रोलआउट और डेटा स्थानीयकरण की बढ़ती मांग के कारण अहमदाबाद, विशाखापत्तनम, पटना और भोपाल जैसे टियर-II शहरों में भी गतिविधियों में तेजी आ रही है।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि मुंबई सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है - भारत के कुल चालू डेटा सेंटरों में से 50 प्रतिशत से अधिक डेटा सेंटर मुंबई में स्थित हैं।

मुंबई, चेन्नई, दिल्ली-एनसीआर और बेंगलुरु मिलकर कुल क्षमता का लगभग 90 प्रतिशत योगदान करते हैं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि एआई और क्लाउड कंप्यूटिंग की बढ़ती मांग के कारण बिजली के बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे ऑपरेटर नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

भारत ने 2025 में रिकॉर्ड 44.5 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी।

सीबीआरई के अनुसार, कर प्रोत्साहन, हरित पूंजीगत व्यय समर्थन और नियामकीय सरलीकरण जैसे सहायक सरकारी नीतियों से निवेश में तेजी आएगी और भारत को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक प्रमुख डेटा सेंटर केंद्र के रूप में स्थापित होने की उम्मीद है।

Point of View

NationPress
03/04/2026

Frequently Asked Questions

भारत में डेटा सेंटर की क्षमता क्यों बढ़ रही है?
भारत में डेटा सेंटर की क्षमता बढ़ने का मुख्य कारण मांग में वृद्धि और निवेशकों की बढ़ती रुचि है।
2026 तक डेटा सेंटर की क्षमता में कितनी वृद्धि होगी?
2026 तक डेटा सेंटर की क्षमता में सालाना 30 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद है।
कौन से राज्य डेटा सेंटर निवेश में अग्रणी हैं?
महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य डेटा सेंटर निवेश में अग्रणी हैं।
भारत ने कितनी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी है?
भारत ने 2025 में रिकॉर्ड 44.5 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी।
डेटा सेंटर क्षेत्र में विदेशी निवेश का क्या योगदान है?
वैश्विक स्तर पर डेटा सेंटर क्षेत्र में विदेशी निवेश का महत्वपूर्ण योगदान है, जो विकास को गति दे रहा है।
Nation Press