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झारखंड में 30 दिनों में स्वाइन फ्लू के 36 मामले, 18 बच्चे-किशोर संक्रमित; स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

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झारखंड में 30 दिनों में स्वाइन फ्लू के 36 मामले, 18 बच्चे-किशोर संक्रमित; स्वास्थ्य विभाग अलर्ट

सारांश

झारखंड में 30 दिनों में स्वाइन फ्लू के 36 मामले — और आधे मरीज़ बच्चे व किशोर हैं। अंतरराज्यीय यात्रा से फैलते संक्रमण के बीच स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को अलर्ट किया, RIMS और MGM में जाँच सुविधा शुरू की और हर ज़िले से रोज़ाना रिपोर्ट माँगी जा रही है।

मुख्य बातें

झारखंड में पिछले 30 दिनों में H1N1 (स्वाइन फ्लू) के कुल 36 मामले दर्ज किए गए हैं।
कुल संक्रमितों में से 18 मरीज़ बच्चे और किशोर हैं, जो कुल का 50% है।
दिल्ली, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र और राजस्थान से लौटने वाले यात्रियों के ज़रिए संक्रमण फैलने की आशंका।
रांची (RIMS) और जमशेदपुर (MGM) में H1N1 व H3N2 की आधुनिक जाँच सुविधा उपलब्ध।
सभी मेडिकल कॉलेज व सदर अस्पतालों में 10-10 अतिरिक्त बेड आरक्षित; ICU, HDU व स्टाफ की 24 घंटे उपलब्धता अनिवार्य।
प्रदीप भट्टाचार्य (RIMS) के अनुसार स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन बुज़ुर्गों, बच्चों और गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

झारखंड में स्वाइन फ्लू (H1N1) संक्रमण के मामलों में तेज़ी से वृद्धि ने स्वास्थ्य तंत्र को सतर्क कर दिया है। 2 सितंबर 2026 तक उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, पिछले 30 दिनों में राज्यभर में H1N1 संक्रमण के कुल 36 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 18 मरीज़ बच्चे और किशोर हैं — यानी कुल संक्रमितों का ठीक आधा। बढ़ते संक्रमण को देखते हुए राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने सभी प्रमुख अस्पतालों को अलर्ट मोड पर रखने के निर्देश जारी किए हैं।

संक्रमण का स्रोत और अंतरराज्यीय आवाजाही

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, दूसरे राज्यों से यात्रा कर झारखंड लौटने वाले लोगों के ज़रिए भी संक्रमण का प्रसार हो रहा है। दिल्ली, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र और राजस्थान में मौसमी फ्लू के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए अंतरराज्यीय आवाजाही पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशनों और अंतरराज्यीय बस अड्डों जैसे उच्च-यातायात वाले स्थानों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। साथ ही जिला स्तर से प्रतिदिन रिपोर्ट तलब की जा रही है।

जाँच और चिकित्सा व्यवस्था

संक्रमण की सटीक पहचान के लिए रांची स्थित रिम्स (RIMS) और जमशेदपुर स्थित एमजीएम (MGM) अस्पताल में H1N1 तथा H3N2 वायरस की जाँच की आधुनिक व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। राज्य स्वास्थ्य निदेशालय ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारियों को संदिग्ध मरीज़ों की त्वरित पहचान, जाँच और समुचित उपचार सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं।

राज्य के सभी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों और सदर अस्पतालों में कम से कम 10-10 अतिरिक्त बेड आरक्षित रखने का आदेश दिया गया है। इसके अलावा पर्याप्त ऑक्सीजन आपूर्ति, आवश्यक दवाओं का भंडार, ICU, HDU तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल स्टाफ की 24 घंटे उपलब्धता अनिवार्य कर दी गई है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

रिम्स के क्रिटिकल केयर विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप भट्टाचार्य ने कहा कि H1N1 एक इन्फ्लुएंज़ा वायरस है और इसे लेकर घबराने की आवश्यकता नहीं है। हालाँकि उन्होंने स्पष्ट किया कि बुज़ुर्गों, छोटे बच्चों और पहले से कैंसर, डायबिटीज़ या उच्च रक्तचाप जैसी गंभीर बीमारियों से ग्रस्त मरीज़ों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।

चिकित्सकों के अनुसार तेज़ बुखार, ठंड लगना, खाँसी, गले में खराश, शरीर दर्द और बच्चों में उल्टी-दस्त इस संक्रमण के प्रमुख लक्षण हैं। लक्षण दिखने पर स्वयं दवा लेने के बजाय तुरंत चिकित्सक से संपर्क करने की सलाह दी गई है।

आम जनता पर असर और स्थिति का आकलन

यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में मौसमी फ्लू का प्रकोप बढ़ा हुआ है और झारखंड में मानसून के बाद संक्रामक बीमारियों का जोखिम स्वाभाविक रूप से अधिक रहता है। गौरतलब है कि विभाग द्वारा इन्फ्लुएंज़ा जैसे लक्षणों वाली बीमारियों (ILI) और गंभीर श्वसन संक्रमण (SARI) के मामलों पर भी कड़ी नज़र रखी जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और समय पर उपचार से मरीज़ पूरी तरह स्वस्थ हो रहे हैं। आने वाले हफ्तों में निगरानी तंत्र और मज़बूत किए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह तथ्य कि आधे मरीज़ बच्चे और किशोर हैं, एक महत्वपूर्ण जनस्वास्थ्य संकेत है जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। अंतरराज्यीय आवाजाही को संक्रमण के वाहक के रूप में चिह्नित करना सही दिशा में कदम है, लेकिन एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशनों पर निगरानी की व्यावहारिक क्षमता पर सवाल बने रहते हैं। मानसून के बाद का यह मौसम झारखंड में हर वर्ष श्वसन संक्रमणों के लिए संवेदनशील रहता है — फिर भी जाँच सुविधाएँ अभी भी केवल दो बड़े शहरों तक सीमित हैं, जो ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में समय पर निदान की चुनौती को रेखांकित करता है।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड में स्वाइन फ्लू (H1N1) के कितने मामले सामने आए हैं?
स्वास्थ्य विभाग के आँकड़ों के अनुसार, पिछले 30 दिनों में झारखंड में H1N1 संक्रमण के कुल 36 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से 18 मरीज़ बच्चे और किशोर हैं।
झारखंड में स्वाइन फ्लू की जाँच कहाँ होती है?
रांची स्थित RIMS और जमशेदपुर स्थित MGM अस्पताल में H1N1 तथा H3N2 वायरस की जाँच की आधुनिक सुविधा उपलब्ध कराई गई है। संदिग्ध मरीज़ों को इन केंद्रों पर भेजने के निर्देश जिला स्तर पर दिए गए हैं।
स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षण क्या हैं और किन्हें ज़्यादा खतरा है?
चिकित्सकों के अनुसार तेज़ बुखार, ठंड लगना, खाँसी, गले में खराश, शरीर दर्द और बच्चों में उल्टी-दस्त H1N1 के प्रमुख लक्षण हैं। बुज़ुर्गों, छोटे बच्चों और कैंसर, डायबिटीज़ या उच्च रक्तचाप से ग्रस्त लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
झारखंड में संक्रमण फैलने का कारण क्या बताया जा रहा है?
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार दिल्ली, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र और राजस्थान से यात्रा कर लौटने वाले लोगों के ज़रिए भी संक्रमण का प्रसार हो रहा है। इसी कारण एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशनों और अंतरराज्यीय बस अड्डों पर निगरानी बढ़ाई गई है।
क्या झारखंड में स्वाइन फ्लू की स्थिति खतरनाक है?
RIMS के क्रिटिकल केयर विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप भट्टाचार्य के अनुसार स्थिति नियंत्रण में है और घबराने की ज़रूरत नहीं है। स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि समय पर उपचार से मरीज़ पूरी तरह स्वस्थ हो रहे हैं, हालाँकि उच्च जोखिम वाले समूहों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
राष्ट्र प्रेस
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