सेंसेक्स 374 अंक टूटा, 76,570 पर बंद; मध्य पूर्व तनाव से ऑटो-IT शेयरों में बिकवाली
सारांश
मुख्य बातें
BSE सेंसेक्स बुधवार, 2 सितंबर को 373.93 अंक यानी 0.49 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,570.35 पर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी 50 141.35 अंक यानी 0.59 प्रतिशत फिसलकर 23,914.45 पर आ गया। अमेरिका-ईरान के बीच नए सिरे से बढ़े तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 95 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँचने से वैश्विक बाज़ारों के साथ-साथ भारतीय बाज़ार पर भी दबाव बना।
व्यापक बाज़ार में गिरावट
गिरावट केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही — निफ्टी मिडकैप 100 332.90 अंक यानी 0.53 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ 63,001.60 पर और निफ्टी स्मॉलकैप 100 74 अंक यानी 0.37 प्रतिशत की गिरावट के साथ 19,812.25 पर बंद हुआ। यह दर्शाता है कि बिकवाली का दबाव बाज़ार के हर वर्ग पर था।
सेक्टोरल प्रदर्शन
गिरावट का नेतृत्व निफ्टी ऑटो ने 1.79 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ किया। इसके बाद निफ्टी मीडिया 1.75 प्रतिशत, निफ्टी IT 1.25 प्रतिशत, निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग 0.81 प्रतिशत, निफ्टी सर्विसेज 0.75 प्रतिशत, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज 0.73 प्रतिशत और निफ्टी कंजम्पशन 0.67 प्रतिशत लुढ़का।
दूसरी ओर, ऊर्जा और बुनियादी ढाँचे से जुड़े सेक्टर हरे निशान में रहे। निफ्टी एनर्जी 0.59 प्रतिशत, निफ्टी कमोडिटीज 0.54 प्रतिशत, निफ्टी PSE 0.38 प्रतिशत, निफ्टी ऑयल एंड गैस 0.33 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी 0.21 प्रतिशत और निफ्टी इन्फ्रा 0.03 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए।
गेनर्स और लूज़र्स
सेंसेक्स पैक में अदाणी पोर्ट्स, बजाज फिनसर्व, पावर ग्रिड, NTPC, टाइटन, ट्रेंट, बजाज फाइनेंस, सन फार्मा और ITC बढ़त में रहे। वहीं एशियन पेंट्स, M&M, HDFC बैंक, HCL टेक, BEL, इन्फोसिस, SBI, इंडिगो, HUL, TCS, टेक महिंद्रा, ICICI बैंक, मारुति सुज़ुकी, भारती एयरटेल, एक्सिस बैंक, इटरनल, टाटा स्टील और अल्ट्राटेक सीमेंट नुकसान में रहे।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
बाज़ार विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच नए सिरे से बढ़े तनाव ने मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति को अस्थिर कर दिया है। इसके परिणामस्वरूप कच्चे तेल की कीमतें 95 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई हैं, जिसका सीधा असर आयात-निर्भर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। गौरतलब है कि भारत अपनी कुल तेल ज़रूरत का लगभग 85 प्रतिशत आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में हर उछाल मुद्रास्फीति और चालू खाता घाटे दोनों को प्रभावित करता है।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक निवेशक अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की ब्याज दर नीति और चीन की आर्थिक सुस्ती को लेकर पहले से सतर्क हैं। बाज़ार विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में तनाव के जल्द शांत न होने की स्थिति में ऑटो, IT और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर दबाव जारी रह सकता है। अगले कुछ सत्रों में कच्चे तेल की कीमतों की दिशा और वैश्विक संकेत बाज़ार की चाल तय करेंगे।