2 सितंबर 2026
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राजस्थान में जर्जर स्कूलों के जीर्णोद्धार पर ₹550 करोड़, डिप्टी सीएम बैरवा बोले — सभी स्कूल होंगे मजबूत

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राजस्थान में जर्जर स्कूलों के जीर्णोद्धार पर ₹550 करोड़, डिप्टी सीएम बैरवा बोले — सभी स्कूल होंगे मजबूत

सारांश

राजस्थान में 611 सरकारी स्कूल बिना अपने भवन के चल रहे हैं और सैकड़ों जर्जर हैं — इस विवाद के बीच डिप्टी सीएम बैरवा ने ₹12,500 करोड़ की पाँच वर्षीय योजना का बचाव किया। असली सवाल यह है कि घोषणाएँ ज़मीन पर कब उतरेंगी।

मुख्य बातें

राजस्थान के उपमुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा ने 2 सितंबर को कहा कि प्रदेश के सभी जर्जर सरकारी स्कूलों को सुदृढ़ किया जाएगा।
मौजूदा स्कूल भवनों की मरम्मत के लिए ₹550 करोड़ और भवनहीन स्कूलों के निर्माण के लिए ₹450 करोड़ आवंटित।
पाँच वर्षों में स्कूल बुनियादी ढाँचे पर प्रतिवर्ष ₹2,500 करोड़ यानी कुल ₹12,500 करोड़ खर्च का लक्ष्य।
विधानसभा में सरकार ने स्वीकार किया था कि 611 सरकारी स्कूल बिना अपने भवन के संचालित हो रहे हैं।
विवाद जयपुर के पास बागरू के एक स्कूल से जुड़े आरोपों और निरीक्षण दल पर हमले के बाद तेज हुआ।
BJP सरकार ने बुनियादी ढाँचे की खामियों के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

राजस्थान के उपमुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा ने बुधवार, 2 सितंबर को स्पष्ट किया कि राज्य सरकार प्रदेश भर के जर्जर और असुरक्षित सरकारी स्कूलों की पहचान कर उन्हें पुनर्स्थापित करने का व्यापक अभियान चला रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने इस कार्य के लिए आवश्यक बजट स्वीकृत कर दिया है और बिना किसी अपवाद के सभी जर्जर स्कूल भवनों को सुदृढ़ किया जाएगा।

मुख्य घटनाक्रम

बैरवा ने बताया कि जिस स्कूल को लेकर हाल ही में विवाद उठा, वहाँ बुलडोजर का उपयोग एक पृथक कार्रवाई नहीं थी, बल्कि यह राज्यव्यापी अभियान का हिस्सा है। उन्होंने कहा, 'पहले से ही हर जगह काम किया जा रहा था, सभी समस्याग्रस्त स्कूलों की पहचान कर उन्हें वैकल्पिक व्यवस्थाओं के माध्यम से चलाया जा रहा था।' सरकार ने क्षतिग्रस्त भवनों वाले स्कूलों को चिह्नित कर वहाँ अस्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की है।

उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कई भवन दशकों पुराने हैं और उनकी जर्जर स्थिति के लिए किसी एक सरकार को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा, 'ये पुरानी इमारतें हैं जो बहुत पहले बनी थीं... ऐसा नहीं है कि यह केवल भाजपा के सत्ता में आने के बाद ही हुआ है। फिर भी, हमने उन सभी की पहचान कर ली है, बजट आवंटित कर दिया है।'

विवाद की पृष्ठभूमि

यह बयान ऐसे समय में आया है जब राजस्थान में स्कूली बुनियादी ढाँचे की स्थिति पर गहन जाँच चल रही है। विवाद तब सुर्खियों में आया जब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की एक टीम जयपुर के पास बागरू में एक सरकारी स्कूल का निरीक्षण करने गई — जहाँ यह आरोप था कि स्कूल एक गौशाला से संचालित हो रहा है — और टीम पर हमला किया गया। रिपोर्टों के अनुसार, उस स्कूल की मूल इमारत को पिछले वर्ष असुरक्षित घोषित कर बंद कर दिया गया था और छात्रों को एक अस्थायी बाड़े में स्थानांतरित किया गया था।

गौरतलब है कि इससे पहले राजस्थान सरकार ने विधानसभा में स्वीकार किया था कि 611 सरकारी स्कूल अपनी खुद की इमारत के बिना संचालित हो रहे हैं। इस खुलासे के बाद विपक्ष ने असुरक्षित परिसरों को लेकर सरकार को घेरना शुरू किया।

सरकार की प्रतिक्रिया और बजट आवंटन

भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार ने मौजूदा बुनियादी ढाँचे की खामियों के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली पिछली कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। इन कमियों को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने मौजूदा स्कूल भवनों की मरम्मत और नवीनीकरण के लिए ₹550 करोड़ आवंटित किए हैं। इसके अतिरिक्त, जिन स्कूलों के पास अपना भवन नहीं है या जो जर्जर परिसरों से चल रहे हैं, उनके लिए नए भवन निर्माण हेतु ₹450 करोड़ अलग से निर्धारित किए गए हैं।

राज्य सरकार ने आगे घोषणा की है कि विभिन्न वित्त स्रोतों के माध्यम से स्कूल भवनों के निर्माण, मरम्मत और रखरखाव के लिए प्रतिवर्ष ₹2,500 करोड़ उपलब्ध कराए जाएंगे। यह पाँच वर्षों में कुल ₹12,500 करोड़ होगा, जिसका घोषित उद्देश्य पूरे राजस्थान में स्कूली बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करना है।

आम जनता और छात्रों पर असर

राजस्थान में लाखों बच्चे सरकारी स्कूलों पर निर्भर हैं। 611 स्कूलों का बिना स्वयं के भवन के संचालन और सैकड़ों जर्जर परिसरों की स्थिति यह दर्शाती है कि शैक्षणिक गुणवत्ता के साथ-साथ छात्रों की सुरक्षा भी दाँव पर है। अस्थायी बाड़ों और वैकल्पिक स्थानों में पढ़ाई करने वाले बच्चों की संख्या कितनी है, इसका स्वतंत्र सत्यापन अभी शेष है।

क्या होगा आगे

सरकार के अनुसार, चिह्नित जर्जर स्कूलों में मरम्मत और पुनर्निर्माण का काम प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया जाएगा। मुख्यमंत्री द्वारा समीक्षा की जा चुकी है और बजट स्वीकृत हो चुका है। यह देखना होगा कि ₹12,500 करोड़ की यह पाँच वर्षीय योजना धरातल पर कितनी प्रभावी साबित होती है और क्या 611 भवनहीन स्कूलों को निर्धारित समय में स्थायी छत मिल पाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

500 करोड़ की पाँच वर्षीय घोषणा प्रभावशाली लगती है, लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की है — राजस्थान में पहले भी शिक्षा बजट की घोषणाएँ हुई हैं जो ज़मीन पर उतरने में वर्षों लग गईं। यह भी उल्लेखनीय है कि 611 भवनहीन स्कूलों का खुलासा सरकार ने स्वयं विधानसभा में किया, लेकिन इसके लिए एक निरीक्षण दल पर हमले जैसी घटना को सुर्खियाँ बनानी पड़ीं। बुनियादी ढाँचे की जिम्मेदारी पिछली सरकार पर डालना राजनीतिक रूप से सुविधाजनक है, लेकिन वर्तमान सरकार दो वर्षों से अधिक समय से सत्ता में है — इस दौरान कितने स्कूलों का जीर्णोद्धार हुआ, इसका स्वतंत्र लेखा-जोखा अभी सामने नहीं आया है।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान में जर्जर स्कूलों की मरम्मत के लिए कितना बजट आवंटित किया गया है?
राजस्थान सरकार ने मौजूदा स्कूल भवनों की मरम्मत और नवीनीकरण के लिए ₹550 करोड़ और भवनहीन स्कूलों के नए निर्माण के लिए ₹450 करोड़ आवंटित किए हैं। इसके अलावा, पाँच वर्षों में प्रतिवर्ष ₹2,500 करोड़ यानी कुल ₹12,500 करोड़ खर्च करने का लक्ष्य रखा गया है।
राजस्थान में कितने सरकारी स्कूल बिना अपने भवन के चल रहे हैं?
राजस्थान सरकार ने विधानसभा में बताया था कि 611 सरकारी स्कूल वर्तमान में अपनी खुद की इमारत के बिना संचालित हो रहे हैं। इन स्कूलों के लिए नए भवन निर्माण हेतु ₹450 करोड़ अलग से निर्धारित किए गए हैं।
बागरू स्कूल विवाद क्या है और इसने राजस्थान में स्कूल बुनियादी ढाँचे पर बहस कैसे छेड़ी?
जयपुर के पास बागरू में एक सरकारी स्कूल पर आरोप था कि वह एक गौशाला से संचालित हो रहा है। जब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की एक टीम इसकी जाँच करने गई तो उस पर हमला किया गया। रिपोर्टों के अनुसार, उस स्कूल की मूल इमारत को पिछले वर्ष असुरक्षित घोषित कर बंद किया गया था और छात्रों को एक अस्थायी बाड़े में स्थानांतरित किया गया था। इस घटना ने राजस्थान में स्कूली बुनियादी ढाँचे की स्थिति पर व्यापक बहस छेड़ दी।
डिप्टी सीएम बैरवा ने स्कूलों की जर्जर स्थिति के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया?
उपमुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा ने कहा कि कई इमारतें दशकों पुरानी हैं और यह समस्या केवल वर्तमान सरकार के कार्यकाल में नहीं उत्पन्न हुई। भाजपा सरकार ने मौजूदा खामियों के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली पिछली कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।
राजस्थान सरकार जर्जर स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था कर रही है?
सरकार के अनुसार, असुरक्षित या जर्जर भवनों वाले स्कूलों की पहचान कर उन्हें वैकल्पिक स्थानों से संचालित किया जा रहा है। जहाँ भवन बंद किए गए हैं, वहाँ छात्रों को अस्थायी व्यवस्था के तहत पढ़ाई जारी रखने की सुविधा दी गई है और मरम्मत व निर्माण कार्य प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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