राजस्थान में जर्जर स्कूलों के जीर्णोद्धार पर ₹550 करोड़, डिप्टी सीएम बैरवा बोले — सभी स्कूल होंगे मजबूत
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के उपमुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा ने बुधवार, 2 सितंबर को स्पष्ट किया कि राज्य सरकार प्रदेश भर के जर्जर और असुरक्षित सरकारी स्कूलों की पहचान कर उन्हें पुनर्स्थापित करने का व्यापक अभियान चला रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने इस कार्य के लिए आवश्यक बजट स्वीकृत कर दिया है और बिना किसी अपवाद के सभी जर्जर स्कूल भवनों को सुदृढ़ किया जाएगा।
मुख्य घटनाक्रम
बैरवा ने बताया कि जिस स्कूल को लेकर हाल ही में विवाद उठा, वहाँ बुलडोजर का उपयोग एक पृथक कार्रवाई नहीं थी, बल्कि यह राज्यव्यापी अभियान का हिस्सा है। उन्होंने कहा, 'पहले से ही हर जगह काम किया जा रहा था, सभी समस्याग्रस्त स्कूलों की पहचान कर उन्हें वैकल्पिक व्यवस्थाओं के माध्यम से चलाया जा रहा था।' सरकार ने क्षतिग्रस्त भवनों वाले स्कूलों को चिह्नित कर वहाँ अस्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की है।
उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कई भवन दशकों पुराने हैं और उनकी जर्जर स्थिति के लिए किसी एक सरकार को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा, 'ये पुरानी इमारतें हैं जो बहुत पहले बनी थीं... ऐसा नहीं है कि यह केवल भाजपा के सत्ता में आने के बाद ही हुआ है। फिर भी, हमने उन सभी की पहचान कर ली है, बजट आवंटित कर दिया है।'
विवाद की पृष्ठभूमि
यह बयान ऐसे समय में आया है जब राजस्थान में स्कूली बुनियादी ढाँचे की स्थिति पर गहन जाँच चल रही है। विवाद तब सुर्खियों में आया जब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की एक टीम जयपुर के पास बागरू में एक सरकारी स्कूल का निरीक्षण करने गई — जहाँ यह आरोप था कि स्कूल एक गौशाला से संचालित हो रहा है — और टीम पर हमला किया गया। रिपोर्टों के अनुसार, उस स्कूल की मूल इमारत को पिछले वर्ष असुरक्षित घोषित कर बंद कर दिया गया था और छात्रों को एक अस्थायी बाड़े में स्थानांतरित किया गया था।
गौरतलब है कि इससे पहले राजस्थान सरकार ने विधानसभा में स्वीकार किया था कि 611 सरकारी स्कूल अपनी खुद की इमारत के बिना संचालित हो रहे हैं। इस खुलासे के बाद विपक्ष ने असुरक्षित परिसरों को लेकर सरकार को घेरना शुरू किया।
सरकार की प्रतिक्रिया और बजट आवंटन
भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार ने मौजूदा बुनियादी ढाँचे की खामियों के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली पिछली कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। इन कमियों को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने मौजूदा स्कूल भवनों की मरम्मत और नवीनीकरण के लिए ₹550 करोड़ आवंटित किए हैं। इसके अतिरिक्त, जिन स्कूलों के पास अपना भवन नहीं है या जो जर्जर परिसरों से चल रहे हैं, उनके लिए नए भवन निर्माण हेतु ₹450 करोड़ अलग से निर्धारित किए गए हैं।
राज्य सरकार ने आगे घोषणा की है कि विभिन्न वित्त स्रोतों के माध्यम से स्कूल भवनों के निर्माण, मरम्मत और रखरखाव के लिए प्रतिवर्ष ₹2,500 करोड़ उपलब्ध कराए जाएंगे। यह पाँच वर्षों में कुल ₹12,500 करोड़ होगा, जिसका घोषित उद्देश्य पूरे राजस्थान में स्कूली बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करना है।
आम जनता और छात्रों पर असर
राजस्थान में लाखों बच्चे सरकारी स्कूलों पर निर्भर हैं। 611 स्कूलों का बिना स्वयं के भवन के संचालन और सैकड़ों जर्जर परिसरों की स्थिति यह दर्शाती है कि शैक्षणिक गुणवत्ता के साथ-साथ छात्रों की सुरक्षा भी दाँव पर है। अस्थायी बाड़ों और वैकल्पिक स्थानों में पढ़ाई करने वाले बच्चों की संख्या कितनी है, इसका स्वतंत्र सत्यापन अभी शेष है।
क्या होगा आगे
सरकार के अनुसार, चिह्नित जर्जर स्कूलों में मरम्मत और पुनर्निर्माण का काम प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया जाएगा। मुख्यमंत्री द्वारा समीक्षा की जा चुकी है और बजट स्वीकृत हो चुका है। यह देखना होगा कि ₹12,500 करोड़ की यह पाँच वर्षीय योजना धरातल पर कितनी प्रभावी साबित होती है और क्या 611 भवनहीन स्कूलों को निर्धारित समय में स्थायी छत मिल पाती है।