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राजस्थान के जर्जर स्कूलों की मरम्मत शुरू, सीजेपी के आशुतोष रांका बोले — 'यह छात्रों की जीत है'

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राजस्थान के जर्जर स्कूलों की मरम्मत शुरू, सीजेपी के आशुतोष रांका बोले — 'यह छात्रों की जीत है'

सारांश

जयपुर के पास बगरू के उस सरकारी स्कूल में मरम्मत शुरू हो गई है जहाँ बच्चे दो साल से भैंसों के बाड़े में पढ़ रहे थे। सीजेपी टीम पर हमले के बाद उठे विवाद के बीच राजस्थान सरकार ने राज्यभर के जर्जर स्कूलों के पुनर्निर्माण का अभियान छेड़ा है।

मुख्य बातें

राजस्थान सरकार ने 2 सितंबर 2026 को राज्यभर के जर्जर सरकारी स्कूलों की मरम्मत का अभियान शुरू किया।
जयपुर के निकट बगरू के सरकारी स्कूल में मरम्मत कार्य आरंभ हुआ, जहाँ छात्र दो साल से अधिक समय से भैंसों के बाड़े में पढ़ रहे थे।
21 अगस्त को निरीक्षण के दौरान सीजेपी की टीम पर कथित तौर पर पथराव हुआ और महिला सदस्यों के साथ बदसलूकी की गई।
सीजेपी सह-संयोजक आशुतोष रांका ने मरम्मत शुरू होने को 'छात्रों की जीत' बताया।
उपमुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने सभी जर्जर स्कूलों की मरम्मत के लिए आवश्यक फंड स्वीकृत कर दिया है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि स्कूल भवनों की जर्जर स्थिति किसी एक सरकार की देन नहीं, बल्कि वर्षों पुरानी समस्या है।

राजस्थान सरकार ने 2 सितंबर 2026 को राज्यभर के जर्जर और असुरक्षित सरकारी स्कूलों की मरम्मत एवं पुनर्निर्माण का व्यापक अभियान शुरू किया है। इस पहल का स्वागत करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने इसे छात्रों की जीत करार दिया। यह घोषणा जयपुर के निकट बगरू स्थित एक सरकारी स्कूल में मरम्मत कार्य आरंभ होने के बाद आई है।

बगरू स्कूल में मरम्मत और पृष्ठभूमि

21 अगस्त को सीजेपी की एक टीम ने बगरू के इसी सरकारी स्कूल का निरीक्षण किया था, जिस दौरान टीम पर कथित तौर पर पथराव हुआ, महिला सदस्यों के साथ बदसलूकी की गई और उनकी कार की खिड़कियाँ तोड़ी गईं। उस घटना के बाद स्कूल की बदहाल स्थिति सार्वजनिक चर्चा का केंद्र बन गई थी।

रांका ने कहा: 'हमें खुशी है कि आज उस स्कूल में मरम्मत का काम शुरू हो गया है, भले ही हम पर पत्थर फेंके गए, महिलाओं के साथ बदसलूकी की गई और हमारी कार की खिड़कियाँ तोड़ी गईं। हमारे अलावा, यह उन छात्रों की जीत है जो दो साल से अधिक समय से भैंसों के बाड़े में पढ़ाई कर रहे हैं।'

सरकार की प्रतिक्रिया

राजस्थान के उपमुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा ने बुधवार को बताया कि राज्य सरकार ने सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढाँचे को सुधारने के लिए सबसे पहले यह अभियान शुरू किया है। उन्होंने कहा कि जर्जर हालत में पाए गए सभी स्कूलों को मज़बूत और ठीक किया जाएगा।

बैरवा ने स्पष्ट किया कि बगरू के स्कूल में बुलडोज़र का उपयोग कोई अकेली घटना नहीं थी — सरकार ने राज्यभर में क्षतिग्रस्त या असुरक्षित इमारतों वाले स्कूलों की पहचान की है और मुख्यमंत्री ने उनकी मरम्मत के लिए आवश्यक फंड स्वीकृत कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि जहाँ भी ज़रूरत थी, वैकल्पिक व्यवस्था पहले से की जा रही थी।

ऐतिहासिक संदर्भ और जवाबदेही

उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अनेक स्कूल भवन कई वर्ष पुराने हैं और उनकी जर्जर अवस्था किसी एक सरकार की देन नहीं है। उन्होंने कहा कि यह कहना उचित नहीं होगा कि यह समस्या भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सत्ता में आने के बाद ही उत्पन्न हुई। गौरतलब है कि देशभर में सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढाँचे की बदहाली एक पुरानी और व्यापक समस्या रही है।

सीजेपी की माँग और आगे की राह

रांका ने ज़ोर देकर कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हर छात्र का अधिकार है — चाहे वह राजस्थान में हो या देश के किसी भी कोने में — और सीजेपी इस मुद्दे पर अपनी लड़ाई जारी रखेगी। उन्होंने माँग की कि देशभर के सभी जर्जर स्कूलों की मरम्मत इसी तरह प्राथमिकता के आधार पर होनी चाहिए।

यह अभियान राजस्थान में स्कूली शिक्षा के बुनियादी ढाँचे को लेकर बढ़ती जवाबदेही की माँग के बीच आया है। आने वाले हफ्तों में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार कितने स्कूलों की मरम्मत पूरी कर पाती है और क्या यह अभियान दीर्घकालिक सुधार की दिशा में ठोस कदम साबित होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल बना रहता है कि क्या यह अभियान सियासी दबाव में उठाया गया प्रतीकात्मक कदम है या दीर्घकालिक नीतिगत बदलाव की शुरुआत। उपमुख्यमंत्री का यह तर्क कि समस्या पुरानी है और किसी एक सरकार की देन नहीं, जवाबदेही से बचने का प्रयास भी लग सकता है — खासकर तब जब बच्चे दो साल से भैंसों के बाड़े में पढ़ रहे थे। असली परीक्षा यह होगी कि राज्य सरकार कितने स्कूलों की मरम्मत समयबद्ध तरीके से पूरी करती है और क्या इसके लिए कोई पारदर्शी निगरानी तंत्र स्थापित किया जाता है।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान सरकार का जर्जर स्कूलों की मरम्मत अभियान क्या है?
राजस्थान सरकार ने 2 सितंबर 2026 को राज्यभर के क्षतिग्रस्त और असुरक्षित सरकारी स्कूल भवनों की पहचान कर उन्हें मज़बूत और ठीक करने का अभियान शुरू किया है। मुख्यमंत्री ने इसके लिए आवश्यक फंड स्वीकृत कर दिया है।
बगरू स्कूल विवाद क्या था और सीजेपी की भूमिका क्या रही?
जयपुर के निकट बगरू के एक सरकारी स्कूल में छात्र दो साल से अधिक समय से भैंसों के बाड़े में पढ़ रहे थे। 21 अगस्त को सीजेपी की निरीक्षण टीम पर कथित तौर पर पथराव हुआ, महिला सदस्यों के साथ बदसलूकी की गई और उनकी कार की खिड़कियाँ तोड़ी गईं। इस घटना के बाद स्कूल की स्थिति सार्वजनिक चर्चा में आई।
आशुतोष रांका ने मरम्मत को 'छात्रों की जीत' क्यों कहा?
सीजेपी सह-संयोजक आशुतोष रांका के अनुसार, टीम पर हमले और बदसलूकी के बावजूद स्कूल में मरम्मत शुरू होना उन छात्रों की जीत है जो लंबे समय से अनुचित परिस्थितियों में पढ़ रहे थे। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हर छात्र का अधिकार है।
उपमुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा ने स्कूलों की जर्जर स्थिति पर क्या कहा?
उपमुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा ने कहा कि अनेक स्कूल भवन कई साल पुराने हैं और उनकी खराब स्थिति के लिए किसी एक सरकार को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने बताया कि सरकार पहले से ही जर्जर स्कूलों की पहचान कर वैकल्पिक व्यवस्था करती रही है।
इस अभियान से राजस्थान के छात्रों पर क्या असर पड़ेगा?
इस अभियान के तहत राज्यभर के असुरक्षित स्कूल भवनों की मरम्मत होगी, जिससे छात्रों को बेहतर और सुरक्षित शिक्षा वातावरण मिलेगा। हालाँकि, अभियान की दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार कितने स्कूलों की मरम्मत समयबद्ध ढंग से पूरी करती है।
राष्ट्र प्रेस
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