जयपुर के सरकारी स्कूल निरीक्षण पर सीजेपी टीम पर हमला, भाजपा और शिक्षा मंत्री पर गंभीर आरोप
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान की राजधानी जयपुर के रामपुरा-कंवरपुरा इलाके में 21 अगस्त को एक सरकारी स्कूल के निरीक्षण के दौरान सिटिज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी) की टीम पर कथित तौर पर हमला किया गया, जिसने राजस्थान की राजनीति में तीखा विवाद खड़ा कर दिया है। सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका और अन्य स्वयंसेवकों के घायल होने की बात कही जा रही है। आरोप सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राज्य के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पर लगाए गए हैं।
घटनाक्रम: क्या हुआ रामपुरा-कंवरपुरा में
सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि रामपुरा-कंवरपुरा का यह सरकारी स्कूल पिछले कई वर्षों से भैंसों के तबेले में संचालित हो रहा है। जब उनकी टीम वहाँ निरीक्षण के लिए पहुँची, तो कथित तौर पर उन पर सरेआम मारपीट और पत्थरबाजी की गई। रांका के अनुसार, टीम की गाड़ियों के शीशे तोड़े गए, कार्यकर्ताओं के कपड़े फाड़े गए और उन्हें पीटा गया।
रांका ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'आज घिनौनेपन की सारी हदें पार हो गईं।' उन्होंने आगे आरोप लगाया कि यह हमला शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के इशारे पर हुआ। उनके अनुसार, 'मदन दिलावर को बच्चे भैंसों के तबेले में पढ़ते रहें, यह मंजूर है लेकिन स्कूल ठीक हो जाए यह मंजूर नहीं। आपने आज गुंडे भेजकर पूरे देश में राजस्थान को शर्मसार कर दिया लेकिन हम इस गुंडागर्दी से डरने वाले लोग नहीं हैं। स्कूल तो ठीक कराने ही होंगे।'
सीजेपी संस्थापक की प्रतिक्रिया
सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी एक्स पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, 'राजस्थान में आखिर हो क्या रहा है? भाजपा के लोगों ने आशुतोष रांका और सीजेपी के वॉलंटियर्स पर हमले किए हैं। राजस्थान पुलिस इस तरह के हमले की इजाजत कैसे दे सकती है?' एक अन्य पोस्ट में दिपके ने कहा कि भाजपा के कथित गुंडों ने आशुतोष रांका और अन्य स्वयंसेवकों को पीटा है और वे घायल हुए हैं।
गौरतलब है कि सीजेपी एक नागरिक अधिकार संगठन है जो समय-समय पर सरकारी सुविधाओं की स्थिति पर नज़र रखता है। यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान में सरकारी शिक्षा व्यवस्था की दुर्दशा पहले से ही चर्चा का विषय रही है।
नेता प्रतिपक्ष की प्रतिक्रिया
राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस घटना को भाजपा की विफलता बताया। उन्होंने कहा, 'यह भाजपा की गलती है। किसी को भी विरोध करने से नहीं रोकना चाहिए और ऐसी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। स्कूलों की हालत जनता के सामने आनी चाहिए। आपको अपना एक्शन प्लान बताना चाहिए कि आप क्या करना चाहते हैं।'
उल्लेखनीय है कि इस घटना पर राजस्थान पुलिस या शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। भाजपा ने भी इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
आम जनता और शिक्षा व्यवस्था पर असर
रामपुरा-कंवरपुरा के इस स्कूल की स्थिति — जहाँ बच्चे कथित तौर पर भैंसों के तबेले में पढ़ने को मजबूर हैं — राजस्थान के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में सरकारी शिक्षा की बदहाली की बड़ी तस्वीर पेश करती है। आलोचकों का कहना है कि ऐसे निरीक्षणों को रोकने की कोशिश पारदर्शिता की राह में बाधा है।
आगे क्या होगा
सीजेपी ने संकेत दिया है कि वह इस मामले में कानूनी कार्रवाई और आगे के निरीक्षण अभियान जारी रखेगी। राजनीतिक दबाव के बीच यह देखना अहम होगा कि राजस्थान पुलिस इस शिकायत पर क्या कदम उठाती है और सरकार स्कूल की स्थिति सुधारने के लिए क्या ठोस कार्रवाई करती है।