22 अगस्त 2026
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राजस्थान सरकारी स्कूलों की बदहाली पर रांका का हमला, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का इस्तीफा माँगा

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राजस्थान सरकारी स्कूलों की बदहाली पर रांका का हमला, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का इस्तीफा माँगा

सारांश

राजस्थान में सरकारी स्कूलों की दुर्दशा का मुद्दा अब सड़क पर आ गया है। सीजेपी नेता आशुतोष रांका ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का इस्तीफा माँगा है और जयपुर में बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। कथित तौर पर एक स्कूल ढाई से चार साल से भैंसों के तबेले में चल रहा है।

मुख्य बातें

सीजेपी नेता आशुतोष रांका ने 22 अगस्त 2026 को शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के इस्तीफे की माँग की।
एक सरकारी स्कूल कथित तौर पर ढाई से चार वर्षों से भैंसों के तबेले में संचालित हो रहा है।
रांका के पास हालिया घटना के कथित तौर पर अनएडिटेड वीडियो हैं; राजस्थान पुलिस से वीडियो के आधार पर गिरफ्तारी की माँग की गई।
राजस्थान के अलग-अलग जिलों से स्कूलों की दुर्दशा के वीडियो सामने आने लगे हैं।
कार्रवाई न होने पर जयपुर में बड़े पैमाने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

सीजेपी नेता आशुतोष रांका ने 22 अगस्त 2026 को राजस्थान सरकार पर सरकारी स्कूलों की दुर्दशा को नज़रअंदाज़ करने का गंभीर आरोप लगाते हुए शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के तत्काल इस्तीफे की माँग की। रांका ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने समय रहते कदम नहीं उठाए, तो जयपुर में बड़े स्तर पर आंदोलन छेड़ा जाएगा।

मुख्य घटनाक्रम

रांका ने बताया कि राजस्थान के एक सरकारी स्कूल में कथित तौर पर पिछले ढाई से चार वर्षों से बच्चे भैंसों के तबेले में पढ़ने को मजबूर हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने स्वयं पिछले वर्ष उस स्कूल का निरीक्षण किया था और वहाँ की स्थिति का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया था। उनके अनुसार टिन शेड की स्थिति भी जर्जर है और कभी भी दुर्घटना का खतरा हो सकता है।

वीडियो साक्ष्य और पुलिस से माँग

रांका ने कहा कि उनके पास हालिया घटनाक्रम से जुड़े कथित तौर पर कई अनएडिटेड वीडियो मौजूद हैं, जिन्हें एक्स और इंस्टाग्राम सहित विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि इन वीडियो में कथित तौर पर पत्थरबाजी करने वाले लोगों के चेहरे स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। राजस्थान पुलिस से माँग करते हुए उन्होंने कहा कि वीडियो फुटेज के आधार पर संदिग्धों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए।

रांका ने यह भी कहा कि यदि पुलिस या दूसरे पक्ष के पास कोई अलग साक्ष्य है, तो उसे भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, केवल बयानबाजी से आरोपों की पुष्टि नहीं होती — सबूत सामने रखे जाने चाहिए। उन्होंने राजस्थान पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मामले पर पूरे देश की नज़र है और जाँच की दिशा से पुलिस की निष्पक्षता भी परखी जाएगी।

आंदोलन का विस्तार

रांका ने स्पष्ट किया कि उनका अभियान किसी राजनीतिक दल के विरुद्ध चुनावी राजनीति के लिए नहीं है, बल्कि उद्देश्य उन स्कूलों की वास्तविक स्थिति सामने लाना है जहाँ बच्चे कथित तौर पर असुरक्षित परिस्थितियों में पढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हालिया घटना के बाद राजस्थान के अलग-अलग जिलों से स्कूलों की दुर्दशा दिखाते वीडियो सामने आने लगे हैं, जो यह साबित करते हैं कि यह समस्या किसी एक स्थान तक सीमित नहीं है।

यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में सरकारी शिक्षा व्यवस्था पहले से ही आलोचनाओं के घेरे में है। गौरतलब है कि स्कूल भवनों की जर्जर हालत और बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा राजस्थान में बार-बार उठता रहा है।

सरकार पर आरोप

रांका ने आरोप लगाया कि सरकार स्कूलों की बदहाली से जुड़े सवालों का जवाब देने के बजाय कथित तौर पर अलग-अलग नैरेटिव सामने ला रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्वीकार नहीं है कि स्कूलों की स्थिति पर सवाल उठाए जाएँ, जबकि बच्चों का खराब परिस्थितियों में पढ़ना उसे मंजूर है।

आगे की राह

रांका ने साफ किया कि यदि कथित पत्थरबाजी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई और संबंधित स्कूल की मरम्मत शुरू नहीं कराई गई, तो जयपुर में बड़े पैमाने पर आंदोलन होगा। उन्होंने शिक्षा विभाग से जर्जर भवनों की मरम्मत, स्कूलों में बुनियादी सुविधाएँ और बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने की माँग की। अब आंदोलन में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के इस्तीफे की माँग भी शामिल कर ली गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सुर्खियाँ बनती हैं और फिर ठंडे बस्ते में चला जाता है। रांका का आंदोलन तब तक प्रतीकात्मक रहेगा जब तक वे ठोस जवाबदेही तंत्र — जैसे स्वतंत्र ऑडिट या न्यायिक निगरानी — की माँग नहीं उठाते। असली सवाल यह है कि राज्य के शिक्षा बजट का कितना हिस्सा वास्तव में बुनियादी ढाँचे पर खर्च हो रहा है और उसकी निगरानी कौन कर रहा है — यह पहलू मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर गायब रहता है।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आशुतोष रांका कौन हैं और उन्होंने क्या माँग की है?
आशुतोष रांका सीजेपी (CJP) के नेता हैं जो राजस्थान में सरकारी स्कूलों की दुर्दशा के विरुद्ध अभियान चला रहे हैं। उन्होंने 22 अगस्त 2026 को शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के इस्तीफे की माँग की और जयपुर में बड़े आंदोलन की चेतावनी दी।
राजस्थान के सरकारी स्कूलों की स्थिति कितनी खराब है?
रांका के अनुसार, एक सरकारी स्कूल कथित तौर पर ढाई से चार वर्षों से भैंसों के तबेले में चल रहा है, जहाँ टिन शेड की हालत भी जर्जर है और दुर्घटना का खतरा बना रहता है। उन्होंने दावा किया कि पिछले वर्ष स्वयं उस स्कूल का निरीक्षण कर वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया था।
रांका ने राजस्थान पुलिस से क्या माँग की है?
रांका ने कहा कि उनके पास हालिया घटना के कथित तौर पर अनएडिटेड वीडियो हैं जिनमें पत्थरबाजी करने वाले लोगों के चेहरे दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने राजस्थान पुलिस से इन वीडियो के आधार पर संदिग्धों की पहचान कर गिरफ्तारी करने की माँग की है।
अगर सरकार ने कार्रवाई नहीं की तो क्या होगा?
रांका ने चेतावनी दी है कि यदि कथित पत्थरबाजी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई और स्कूल की मरम्मत शुरू नहीं हुई, तो जयपुर में बड़े पैमाने पर आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आंदोलन अब केवल स्कूल मरम्मत तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा भी इसका हिस्सा होगा।
क्या यह विवाद केवल एक स्कूल तक सीमित है?
नहीं। रांका के अनुसार हालिया घटनाक्रम के बाद राजस्थान के अलग-अलग जिलों से सरकारी स्कूलों की दुर्दशा दिखाते वीडियो सामने आने लगे हैं। इससे स्पष्ट है कि यह समस्या प्रदेश के कई हिस्सों में व्याप्त है।
राष्ट्र प्रेस
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