जयपुर के रामपुरा-कंवरपुरा में सीजेपी के स्कूल दौरे पर बवाल, कांग्रेस-भाजपा आमने-सामने
सारांश
मुख्य बातें
जयपुर के रामपुरा-कंवरपुरा गांव में 21 अगस्त को सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी) के कार्यकर्ताओं के एक स्कूल दौरे को लेकर तीखा विवाद खड़ा हो गया। ग्रामीणों ने कथित तौर पर कार्यकर्ताओं के स्कूल परिसर में प्रवेश का विरोध किया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच कथित झड़प और मारपीट के आरोप-प्रत्यारोप सामने आए। इस घटना ने राजस्थान की राजनीति में नई हलचल मचा दी है।
मुख्य घटनाक्रम
प्रत्यक्षदर्शी होने का दावा करने वाले ग्रामीण जगदीश शर्मा के अनुसार, सुबह पहले 5 से 7 लोग स्कूल पहुंचे थे। ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि स्कूल के लिए आवश्यक कार्य पहले ही पूरा हो चुका है, जिसके बाद वे वापस चले गए। हालांकि, लगभग आधे से एक घंटे बाद कथित तौर पर 50 से 70 लोग दोबारा वहां पहुंचे और जबरदस्ती स्कूल में प्रवेश का प्रयास किया। शर्मा ने आरोप लगाया कि इस दौरान गाली-गलौज और धक्का-मुक्की हुई तथा दोबारा आए लोगों की गाड़ियों में लाठी, सरिया और डंडे जैसी सामग्री मौजूद थी। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
एक अन्य ग्रामीण राकेश मुंजाल ने दावा किया कि सुबह करीब 9 बजे सीजेपी से जुड़े 5 से 10 लोग गांव पहुंचे थे। उनके अनुसार, ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि स्कूल के लिए फंड पहले ही स्वीकृत हो चुका है। मुंजाल ने आरोप लगाया कि इसके बाद कार्यकर्ता कथित बदसलूकी करके चले गए और बाद में बड़ी संख्या में वापस लौटे, जिन्होंने महिलाओं और बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार किया। मुंजाल ने कहा कि गांव के लोग किसी भी राजनीतिक गतिविधि को स्वीकार नहीं करेंगे।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि जो लोग सरकार के खिलाफ मुद्दे उठा रहे हैं या सवाल पूछ रहे हैं, उनके खिलाफ इस तरह का माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने दिल्ली की घटनाओं का भी हवाला देते हुए कहा कि विरोध करने वालों पर कार्रवाई हो रही है और राजस्थान में भी ऐसी स्थिति दिखाई दे रही है। डोटासरा ने स्कूल में जाने वाले लोगों पर कथित तौर पर पत्थर फेंके जाने का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि ऐसी घटनाओं के बीच देश में कानून का राज कहां है। उन्होंने बच्चों पर लाठी और पेलेट गन चलाने की बात का भी जिक्र किया।
नेता प्रतिपक्ष टीका राम जूली ने भी इस घटना की निंदा की और कहा कि राजस्थान की परंपरा सदा 'अतिथि देवो भव' की रही है। उन्होंने कहा कि यदि बच्चे या छात्र अपनी आवाज उठाना और अपने मुद्दे सामने रखना चाहते थे, तो सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए थी। जूली ने सरकार पर मुद्दों को दबाने का आरोप लगाते हुए इसे 'तानाशाही' करार दिया।
सरकार का पक्ष
राजस्थान सरकार में मंत्री जोगाराम पटेल ने सीजेपी कार्यकर्ताओं के दौरे पर अलग रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार किसी सरकारी कार्यालय, विद्यालय या महाविद्यालय में केवल वही व्यक्ति प्रवेश कर सकता है जिसे निरीक्षण या प्रवेश का अधिकार प्राप्त हो। पटेल ने स्पष्ट किया कि यदि किसी ने शिक्षा मंत्री, शिक्षा विभाग या प्रधानाचार्य से अनुमति लिए बिना स्कूल में प्रवेश किया और बच्चों को भड़काने का प्रयास किया, तो ऐसे व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने बिना अनुमति स्कूल में प्रवेश को नियमों के विपरीत और निंदनीय बताया।
आम जनता पर असर
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब राजस्थान में सामाजिक संगठनों और सरकारी संस्थाओं के बीच संबंधों को लेकर पहले से ही बहस चल रही है। गौरतलब है कि सीजेपी जैसे संगठनों का स्कूलों में दौरा एक संवेदनशील विषय है, क्योंकि इसमें बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा का प्रश्न सीधे जुड़ा होता है। ग्रामीणों का कहना है कि वे किसी भी राजनीतिक हस्तक्षेप के बिना अपने गांव की समस्याओं का समाधान चाहते हैं।
क्या होगा आगे
अभी तक इस मामले में किसी के खिलाफ औपचारिक प्राथमिकी दर्ज होने की पुष्टि नहीं हुई है। कांग्रेस ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बिना अनुमति स्कूल में प्रवेश को नियम-विरुद्ध ठहराया है। आने वाले दिनों में यह मामला राजस्थान विधानसभा में भी गूंज सकता है।