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राजस्थान विधानसभा में सीजेपी कार्यकर्ताओं पर हमले को लेकर हंगामा, कांग्रेस विधायकों के प्रवेश पर रोक का मुद्दा गरमाया

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राजस्थान विधानसभा में सीजेपी कार्यकर्ताओं पर हमले को लेकर हंगामा, कांग्रेस विधायकों के प्रवेश पर रोक का मुद्दा गरमाया

सारांश

राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र का दूसरा दिन हंगामेदार रहा — सीजेपी कार्यकर्ताओं पर कथित हमले और विधायकों के प्रवेश पर रोक के दोहरे मुद्दों ने सदन को ठप कर दिया। भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी नारेबाजी के बाद सदन दो बार स्थगित हुआ, और UCC बिल इस सत्र में पेश होने से चूक गया।

मुख्य बातें

राजस्थान विधानसभा मानसून सत्र के दूसरे दिन 21 अगस्त को सीजेपी कार्यकर्ताओं पर कथित हमले को लेकर भारी हंगामा हुआ।
विपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने गुरुवार को विधानसभा गेट पर कांग्रेस विधायकों को रोके जाने और 'स्कूल ठीक करो' अभियान के दौरान हमले का मुद्दा उठाया।
स्पीकर वासुदेव देवनानी ने सुबह 11:05 बजे सदन को दोपहर तक स्थगित किया; दोपहर में भी हंगामा जारी रहा।
संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कांग्रेस पर 'लोकतंत्र की हत्यारी' होने का आरोप लगाया।
यूसीसी बिल इस दो-दिवसीय सत्र में पेश नहीं होगा; नवंबर में अगले सत्र में चर्चा की संभावना।

राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन 21 अगस्त को सदन में भारी हंगामा देखने को मिला, जब विपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने 'स्कूल ठीक करो' अभियान के तहत स्कूलों का निरीक्षण करने गए सीजेपी (Citizens for Justice and Peace) कार्यकर्ताओं पर कथित हमले का मुद्दा उठाया। इसके साथ ही उन्होंने गुरुवार को विधानसभा गेट पर कांग्रेस विधायकों को रोके जाने पर चर्चा की माँग की, जिससे सदन की कार्यवाही बाधित हो गई।

मुख्य घटनाक्रम

कार्यवाही शुरू होते ही जूली ने स्पीकर से प्रश्नकाल के दौरान सीजेपी हमले का मुद्दा उठाने की अनुमति माँगी। स्पीकर वासुदेव देवनानी ने यह अनुमति नहीं दी, जिसके बाद कांग्रेस विधायक सदन के वेल में उतर आए, नारे लगाने लगे और भजनलाल शर्मा सरकार को 'भगोड़ा' बताने वाले पोस्टर लहराए। जवाब में भाजपा विधायकों ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ नारेबाजी की और उन्हें 'भगोड़ा' और 'चोर' कहा।

दोनों पक्षों के बीच तीखी नारेबाजी के बाद सुबह 11:05 बजे स्पीकर देवनानी ने सदन को दोपहर तक के लिए स्थगित कर दिया। दोपहर 12 बजे कार्यवाही पुनः शुरू होने पर भी हंगामा नहीं थमा।

विपक्ष के आरोप

जूली ने सदन में कहा कि राजस्थान में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बेहद खराब है। उन्होंने सवाल किया कि जब 'स्कूल ठीक करो' अभियान के तहत स्कूलों का निरीक्षण करने गए कार्यकर्ताओं पर कथित तौर पर हमला हो रहा था, तो सरकार मौन क्यों रही।

विधानसभा गेट पर विधायकों को रोके जाने के मुद्दे पर जूली ने कहा, 'विधानसभा में प्रवेश करते समय विधायकों को गेट पर कभी नहीं रोका गया' और यह भी जोड़ा कि जब भाजपा विपक्ष में थी, तब भी उसके विधायक विरोध प्रदर्शन करते हुए उसी गेट से अंदर गए थे। उन्होंने इस घटना की जाँच की माँग की और उन दावों को सिरे से खारिज किया कि कांग्रेस विधायक स्वयं सदन में प्रवेश नहीं करना चाहते थे। जूली ने स्पष्ट किया, 'हम जनता से जुड़े मुद्दे उठाना चाहते हैं। हम उन मामलों पर चर्चा करना चाहते हैं जो लोगों पर असर डालते हैं।'

सरकार की प्रतिक्रिया

संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कांग्रेस पर 'लोकतंत्र की हत्यारी' होने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है। सरकार के मुख्य सचेतक योगेश्वर गर्ग ने दावा किया कि गुरुवार को कांग्रेस विधायकों के साथ कुछ कथित असामाजिक तत्व भी मौजूद थे, और विधायक इन लोगों को विधानसभा परिसर के भीतर लाना चाहते थे — इसीलिए उन्हें गेट पर रोका गया। गर्ग के इस दावे का विपक्ष ने खंडन किया।

यूसीसी बिल की स्थिति

इस हंगामे के बीच यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) विधेयक को लेकर भी स्पष्टता आई। शुक्रवार के विधानसभा एजेंडे में यह बिल शामिल नहीं है, और कथित तौर पर इसे टाला जाने वाला है। गौरतलब है कि सरकार के मुख्य सचेतक ने गुरुवार को संकेत दिया था कि बिल को सत्र में पेश किया जा सकता है, लेकिन मौजूदा दो-दिवसीय मानसून सत्र इसके बिना ही समाप्त होने की संभावना है। विधानसभा के नवंबर में पुनः बैठने की उम्मीद है, जब UCC बिल और वृक्ष संरक्षण बिल पर चर्चा हो सकती है।

आगे क्या

शुक्रवार के एजेंडे में प्रश्नकाल और शून्यकाल के बाद कुछ विभागों के लिए अतिरिक्त माँगों को मंजूरी देना और विनियोग विधेयक संख्या 3 पर चर्चा व उसे पारित करना शामिल है। हंगामे के बावजूद सरकार इन विधायी कार्यों को पूरा करने की कोशिश में है। यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान में भाजपा सरकार और कांग्रेस के बीच शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर टकराव लगातार बढ़ रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह भाजपा और कांग्रेस के बीच जमीनी राजनीति की उस बड़ी लड़ाई का प्रतिबिंब है जो शिक्षा और सार्वजनिक सेवाओं के मुद्दों पर छिड़ी है। 'स्कूल ठीक करो' अभियान एक राष्ट्रव्यापी विपक्षी रणनीति है, और उसके कार्यकर्ताओं पर कथित हमले को सदन में न उठाने देना सरकार की छवि के लिए प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। दूसरी ओर, UCC बिल का इस सत्र में न आना यह संकेत देता है कि सरकार संवेदनशील विधायी मुद्दों पर फिलहाल सावधानी बरत रही है — जो अपने आप में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत है।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान विधानसभा में 21 अगस्त को हंगामा क्यों हुआ?
मानसून सत्र के दूसरे दिन 'स्कूल ठीक करो' अभियान के तहत स्कूलों का निरीक्षण करने गए सीजेपी कार्यकर्ताओं पर कथित हमले और गुरुवार को कांग्रेस विधायकों को विधानसभा गेट पर रोके जाने के मुद्दे पर विपक्ष ने सदन में जमकर हंगामा किया। स्पीकर द्वारा प्रश्नकाल में मुद्दा उठाने की अनुमति न मिलने पर कांग्रेस विधायक वेल में उतर आए।
सीजेपी कार्यकर्ताओं पर हमला किस संदर्भ में हुआ?
सीजेपी (Citizens for Justice and Peace) के कार्यकर्ता देशव्यापी 'स्कूल ठीक करो' अभियान के तहत राजस्थान में सरकारी स्कूलों का निरीक्षण कर रहे थे, उसी दौरान उन पर कथित तौर पर हमला हुआ। विपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने भजनलाल शर्मा सरकार से इस पर जवाब माँगा।
कांग्रेस विधायकों को विधानसभा गेट पर क्यों रोका गया था?
सरकार के मुख्य सचेतक योगेश्वर गर्ग के अनुसार, गुरुवार को कांग्रेस विधायकों के साथ कुछ कथित असामाजिक तत्व भी थे जिन्हें परिसर में प्रवेश से रोकने के लिए विधायकों को गेट पर रोका गया। कांग्रेस ने इस दावे को खारिज किया और जाँच की माँग की।
राजस्थान में UCC बिल कब पेश होगा?
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) विधेयक इस दो-दिवसीय मानसून सत्र में पेश नहीं होगा, क्योंकि यह शुक्रवार के एजेंडे में शामिल नहीं है। विधानसभा के नवंबर में पुनः बैठने की उम्मीद है, जब UCC बिल और वृक्ष संरक्षण बिल पर चर्चा हो सकती है।
राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र में और क्या होना बाकी है?
शुक्रवार के एजेंडे में प्रश्नकाल और शून्यकाल के बाद कुछ विभागों के लिए अतिरिक्त माँगों को मंजूरी देना और विनियोग विधेयक संख्या 3 पर चर्चा व उसे पारित करना शामिल है। UCC बिल और वृक्ष संरक्षण बिल नवंबर के सत्र तक के लिए टाले जाने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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