क्या झारखंड विधानसभा सत्र के अंतिम दिन विपक्ष ने सरकार को घेर लिया?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या झारखंड विधानसभा सत्र के अंतिम दिन विपक्ष ने सरकार को घेर लिया?

सारांश

झारखंड विधानसभा सत्र के अंतिम दिन विपक्ष ने सरकार के खिलाफ जबरदस्त प्रदर्शन किया, शिक्षा और स्वास्थ्य के मुद्दों पर तानाशाही रवैये का आरोप लगाया। क्या यह हंगामा सरकार के लिए एक चेतावनी है?

मुख्य बातें

विपक्ष ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
झारखंड विश्वविद्यालय विधेयक पर सवाल उठाया गया।
सीबीआई जांच की मांग की गई।
किसानों के मुद्दों को प्रमुखता दी गई।
राजनीतिक पूर्वाग्रह पर चिंता व्यक्त की गई।

रांची, 28 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड विधानसभा के पूरक मानसून सत्र के चौथे और अंतिम दिन विपक्ष ने सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरते हुए सदन के भीतर और बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों ने झारखंड विश्वविद्यालय विधेयक-2025 को राज्यपाल के संवैधानिक अधिकारों पर हमला करार देते हुए इसे वापस लेने की मांग की।

विपक्ष का आरोप था कि सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे अहम विषयों पर राजनीतिक पूर्वाग्रह से फैसले ले रही है। सुबह 11 बजकर 8 मिनट पर कार्यवाही शुरू होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही वेल में आ गए और नारेबाजी करने लगे। हंगामे की वजह से प्रश्नकाल बाधित हुआ और स्पीकर ने नाराजगी जताई।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि लगातार हंगामे से एक भी दिन प्रश्नकाल नहीं चल पाया है, आगे यदि यही स्थिति रही तो प्रश्न स्वीकार करने पर भी विचार करना पड़ेगा। बावजूद इसके हंगामा थमा नहीं और सदन की कार्यवाही अपराह्न 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। हालांकि हंगामे के बीच कांग्रेस के के प्रदीप यादव ने सदन में दिग्गज आदिवासी नेता शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की मांग रखी।

उन्होंने विधानसभा परिसर में डॉ. भीमराव अंबेडकर, सिद्धू-कान्हू और शिबू सोरेन की प्रतिमा लगाने का भी प्रस्ताव रखा। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मीडिया से कहा कि सत्र की शुरुआत से ही विपक्ष जनहित के मुद्दों को उठा रहा है, लेकिन सरकार तानाशाही रवैया अपनाए हुए है।

उन्होंने गोड्डा के सूर्या हांसदा एनकाउंटर की सीबीआई जांच की मांग दोहराई और आरोप लगाया कि एक निर्दोष आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता की फर्जी मुठभेड़ में हत्या कर दी गई।

मरांडी ने रांची के नगड़ी में रिम्स टू हॉस्पिटल परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार आदिवासियों और रैयतों की जमीन जबरन छीन रही है। 24 अगस्त को किसानों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का प्रयोग किया और बाद में 85 किसानों पर प्राथमिकी दर्ज कर दी। मरांडी ने मांग की कि किसानों को उनकी जमीन लौटाई जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह महत्वपूर्ण है कि हम विपक्ष की चिंताओं को गंभीरता से लें। सरकार को जनता के मुद्दों का समाधान करना चाहिए, अन्यथा यह स्थिति और खराब हो सकती है। यह हंगामा एक संकेत है कि जनता की आवाज को अनसुना नहीं किया जा सकता।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड विधानसभा सत्र में क्या हुआ?
विपक्ष ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया और झारखंड विश्वविद्यालय विधेयक को वापस लेने की मांग की।
भाजपा ने किस मुद्दे पर सरकार को घेरा?
भाजपा ने झारखंड विश्वविद्यालय विधेयक-2025 को राज्यपाल के संवैधानिक अधिकारों पर हमला करार दिया।
विपक्ष ने किस प्रकार के मुद्दों को उठाया?
विपक्ष ने शिक्षा, स्वास्थ्य और भूमि अधिग्रहण जैसे मुद्दों को उठाया।
राष्ट्र प्रेस