जेपीएससी-जेएसएससी विवाद: हंगामे में झारखंड विधानसभा मानसून सत्र एक दिन पहले अनिश्चितकाल के लिए स्थगित
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र 11 अगस्त 2026 को रांची में भारी हंगामे और नारेबाजी के बीच निर्धारित कार्यक्रम से एक दिन पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, छात्रों पर पुलिस लाठीचार्ज और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के आह्वान पर हुए झारखंड बंद को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी टकराहट ने सदन को ठप कर दिया। विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने 'भारी और दुखी मन' से यह घोषणा की।
सदन में क्या हुआ
दोपहर 12 बजे कार्यवाही दोबारा शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों ने जेपीएससी-जेएसएससी मामले पर नारेबाजी शुरू कर दी। इसी दौरान मंत्री इरफान अंसारी ने भाजपा विधायकों के खिलाफ 'चंदा चोर' के नारे लगाए। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने अपनी बात रखने का प्रयास किया, लेकिन हंगामा बढ़ता गया।
सत्ता पक्ष की ओर से मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, इरफान अंसारी, शिल्पी नेहा तिर्की और योगेंद्र महतो समेत कई विधायक सदन के वेल में पहुँच गए। विपक्षी विधायक भी वेल में आकर सरकार के खिलाफ नारे लगाते रहे। इसी बीच वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने भारी शोर-शराबे के बीच अपना प्रतिवेदन सदन में रखा और वह पारित कर दिया गया।
मुख्यमंत्री सोरेन का भाषण और विपक्ष पर आरोप
हंगामे के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जेपीएससी-जेएसएससी विवाद पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक रंग दे रहा है और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। सोरेन ने स्पष्ट किया कि सरकार भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
अध्यक्ष की नाराजगी और सत्र स्थगन
दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित होने के बाद जब सदन दोबारा बैठा, तो हंगामा थमा नहीं। सदन का संचालन लगातार बाधित होते देख विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि वह 'बहुत भारी और दुखी मन' से यह कदम उठा रहे हैं। अध्यक्ष ने यह भी कहा कि विपक्ष के रवैये से ऐसा प्रतीत होता है कि वह सदन को चलने ही नहीं देना चाहता।
जेपीएससी-जेएसएससी विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र लंबे समय से आंदोलनरत हैं। परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों के बाद हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा लाठीचार्ज की खबरें सामने आई थीं, जिसने विवाद को और हवा दी। BJP ने इसी मुद्दे पर झारखंड बंद का आह्वान किया था, जो मंगलवार को हुआ। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में सरकारी भर्तियों की पारदर्शिता पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं।
आगे क्या होगा
मानसून सत्र 12 अगस्त तक चलना निर्धारित था, लेकिन एक दिन पहले ही इसे स्थगित कर दिया गया। जेपीएससी-जेएसएससी मामले पर राजनीतिक टकराव थमने के आसार नहीं दिखते। छात्र संगठनों की माँगें अभी भी अनसुलझी हैं और यह मुद्दा झारखंड की राजनीति में केंद्रीय बना रहेगा।