झारखंड विधानसभा मानसून सत्र: जेपीएससी-जेएसएससी धांधली पर भाजपा का हंगामा, कार्यवाही 12:30 बजे तक स्थगित
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन, 7 अगस्त को पहली पाली में जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर जोरदार हंगामा हुआ और सदन की कार्यवाही दोपहर 12:30 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायकों ने सदन के अंदर और बाहर प्रदर्शन कर सरकार को घेरा।
नेता प्रतिपक्ष की तत्काल चर्चा की माँग
कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी अपनी सीट पर खड़े हो गए और इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा, परीक्षाओं को रद्द करने तथा पूरे मामले की उच्च न्यायालय की निगरानी में सीबीआई से जाँच कराने की माँग रखी।
मरांडी ने कहा कि सहायक आचार्य, सीजीएल, उत्पाद सिपाही, पीजीटी शिक्षक नियुक्ति और 11वीं से 14वीं जेपीएससी जैसी लगभग सभी हालिया परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि राज्य के अभ्यर्थी भारी बारिश के बीच सड़कों पर बैठने को मजबूर हैं और इससे राज्य की बदनामी हो रही है। माँग पूरी न होने पर भाजपा और अन्य विपक्षी दलों के विधायक वेल में उतर आए और सरकार-विरोधी नारेबाजी शुरू कर दी।
सरकार की प्रतिक्रिया
विपक्ष के इस रवैये पर संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रथम अनुपूरक बजट पेश किया जाना अत्यंत महत्वपूर्ण है और कार्यमंत्रणा की बैठक में इस मुद्दे पर विधिवत चर्चा कराने पर सहमति बन चुकी थी। उनके अनुसार, विधिवत वाद-विवाद के दौरान विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलेगा, इसलिए सदन को बाधित करना अनुचित है।
कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने भी विपक्ष पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और सीआईडी जाँच में अब तक 20 से अधिक आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि फिर नेता प्रतिपक्ष को सीआईडी पर भरोसा क्यों नहीं है। यादव ने यह भी कहा कि आज सीबीआई की विश्वसनीयता पर स्वयं सवाल हैं और विपक्ष को पहली से तीसरी जेपीएससी की नियुक्तियों पर भी अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए।
मंत्री का नेता प्रतिपक्ष पर निशाना
मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने नेता प्रतिपक्ष पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि उन्हें सार्वजनिक रूप से यह बताना चाहिए कि झारखंड गठन के शुरुआती दौर में पहली और दूसरी जेपीएससी परीक्षाओं के ज़रिये उनके अपने कितने रिश्तेदार और करीबी नौकरियाँ पा चुके हैं। यह आरोप सदन में राजनीतिक तनाव को और गहरा कर गया।
अध्यक्ष की टिप्पणी और स्थगन
हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने व्यंग्यात्मक लहजे में पूछा कि आज सदन में नीट का मुद्दा उठेगा या जेपीएससी का। उन्होंने यह भी कहा कि सत्र में राज्य की कृषि और किसानों की समस्याओं पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। लगातार शोर-शराबे और नारेबाजी के बीच अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12:30 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लंबे समय से चल रहा है और राज्य की परीक्षा नियामक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हैं। मानसून सत्र के शेष दिनों में यह विवाद और गहराने की आशंका है।