जेपीएससी-जेएसएससी विवाद: रांची में भाजपा विधायकों ने किया सीएम आवास घेराव, पुलिस ने हिरासत में लिया
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड की राजधानी रांची में 10 अगस्त 2026 को जेपीएससी-जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के विरोध में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायकों और कार्यकर्ताओं ने कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया। पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान BJP के कई विधायकों सहित अनेक कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। इसी समय हजारों छात्र पुराने विधानसभा परिसर से नए विधानसभा भवन की ओर मार्च करते हुए आगे बढ़ रहे थे।
मुख्य घटनाक्रम
BJP ने मुख्यमंत्री आवास घेराव से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी की अध्यक्षता में पार्टी विधायकों की एक रणनीतिक बैठक आयोजित की। इस बैठक में छात्र आंदोलन और राज्य सरकार के रुख पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके बाद सोमवार सुबह करीब पौने दस बजे भाजपा विधायक और कार्यकर्ता अचानक मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ गए।
मुख्यमंत्री आवास के बाहर पहुँचकर प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की माँग करते हुए जोरदार नारेबाजी की। पुलिस ने पहले से बैरिकेडिंग लगाई थी और बड़ी संख्या में सुरक्षाबल तैनात किया गया था, फिर भी स्थिति तनावपूर्ण बनी रही।
छात्र आंदोलन का उभार
भाजपा के प्रदर्शन के समानांतर जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों का आंदोलन भी सोमवार को और तेज हो गया। पुराने विधानसभा परिसर के आसपास सुबह से ही बड़ी तादाद में छात्र एकत्रित हुए। तिरंगा, बैनर और तख्तियाँ थामे छात्र नारे लगाते हुए नए विधानसभा भवन की ओर बढ़े। इस दौरान कुछ छात्रों ने सुरक्षा के लिए लगाए गए पहले बैरिकेडिंग गेट को भी पार कर लिया।
गौरतलब है कि रविवार को सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच तीसरे दौर की वार्ता भी बेनतीजा रही थी। इसके बाद छात्रों ने सोमवार को विधानसभा घेराव का ऐलान किया था।
छात्रों की प्रमुख माँगें
छात्र मुख्यतः तीन माँगों पर अड़े हैं — जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की निष्पक्ष जाँच, विवादित परीक्षाओं को रद्द करना, और भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में परीक्षा पारदर्शिता को लेकर बहस पहले से ही उग्र रूप ले चुकी थी।
सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक दबाव
छात्रों के आंदोलन और BJP के घेराव के मद्देनज़र विधानसभा परिसर और मुख्यमंत्री आवास के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया। विधानसभा की ओर जाने वाले मार्गों पर भारी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए। राजधानी में राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव एक साथ बढ़ने से स्थिति संवेदनशील बनी रही।
आगे क्या
तीन दौर की वार्ता विफल होने के बाद सरकार पर छात्रों की माँगें मानने का दबाव बढ़ता जा रहा है। BJP के सड़क पर उतरने से विपक्षी दबाव और तेज हुआ है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि हेमंत सोरेन सरकार आंदोलन को शांत करने के लिए क्या कदम उठाती है।