12 अगस्त 2026
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रांची में रात को धरनास्थल पर पहुंची पुलिस, भाजपा नेताओं का आरोप — 'छात्रों को जबरन हटाने की कोशिश'

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रांची में रात को धरनास्थल पर पहुंची पुलिस, भाजपा नेताओं का आरोप — 'छात्रों को जबरन हटाने की कोशिश'

सारांश

जेपीएससी अनियमितता के खिलाफ रांची में धरने पर बैठे छात्रों के बीच 12 अगस्त की रात पुलिस पहुंची। भाजपा नेताओं ने जबरन हटाने का आरोप लगाया, पुलिस ने असामाजिक तत्वों की जांच बताई। छात्र अब भी धरनास्थल पर डटे हैं और जेएसएससी सीजीएल रद्द करने की मांग पर अड़े हैं।

मुख्य बातें

12 अगस्त 2026 की देर रात रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम के पास जेपीएससी विरोधी धरनास्थल पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे।
भाजपा विधायक राज सिन्हा और नेता अमर कुमार बाउरी ने आरोप लगाया कि पुलिस छात्रों को रात में जबरन हटाने आई थी।
सिटी एसपी पारस राणा ने कहा कि अधिकारी असामाजिक तत्वों की पहचान के लिए वहां पहुंचे थे, न कि छात्रों को हटाने।
छात्र नेता राजेश प्रसाद ने जेएसएससी सीजीएल रद्द करने की मांग दोहराई और सीआईडी रिपोर्ट को कोर्ट में दाखिल करने की अपील की।
रात भर बातचीत के बाद भी छात्र धरनास्थल पर डटे रहे और आंदोलन जारी है।

झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) में कथित अनियमितताओं के खिलाफ रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम के निकट धरने पर बैठे छात्रों के प्रदर्शन स्थल पर 12 अगस्त 2026 की देर रात पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने आरोप लगाया कि अधिकारी अंधेरे की आड़ में छात्रों को धरनास्थल से जबरन हटाने आए थे, जबकि पुलिस ने इसे असामाजिक तत्वों की जांच बताया। यह घटना हालिया विधानसभा मार्च के ठीक बाद घटित हुई, जिससे तनाव और बढ़ गया।

रात का घटनाक्रम

देर रात धरनास्थल पर सिटी एसपी पारस राणा, सीओ शिव शंकर पांडे, डीसी और एसपी सहित वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे। छात्र नेता राजेश प्रसाद के अनुसार, अधिकारियों ने पहले भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों से उनके नाम और पते की जानकारी मांगी। इसके बाद डीसी ने बाहर आकर जेएसएससी सीजीएल के अभ्यर्थियों को बुलाकर उनसे सवाल-जवाब किए।

अधिकारियों के पहुंचने की सूचना मिलते ही भाजपा विधायक राज सिन्हा सहित कई नेता तत्काल मौके पर पहुंच गए। इसके बाद देर रात तक अधिकारियों, छात्र नेताओं और भाजपा नेताओं के बीच बातचीत का दौर चला।

भाजपा नेताओं के आरोप

भाजपा विधायक राज सिन्हा ने कहा, 'हमें जानकारी मिली थी कि प्रशासन छात्रों को डराने-धमकाने आया था और रात में विरोध-प्रदर्शन वाली जगह को खाली कराने की कोशिश कर रहा था। हम यह देखने आए कि क्या हो रहा है।' उन्होंने यह भी कहा कि अगर प्रशासन कोई कार्रवाई करना चाहता है, तो उसे दिन के उजाले में करनी चाहिए।

भाजपा नेता अमर कुमार बाउरी ने आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारी छात्रों को बलपूर्वक हटाने आए थे। उन्होंने कहा, 'यह एक लोकतांत्रिक देश है और आप इस तरह से व्यवहार नहीं कर सकते। हम ऐसा कभी नहीं होने देंगे।' भाजपा के पूर्व विधायक भानु प्रताप शाही ने कहा कि रात के समय छात्रों पर दबाव बनाना अस्वीकार्य है और छात्र अकेले नहीं हैं।

पुलिस का पक्ष

सिटी एसपी पारस राणा ने कहा कि उन्हें सूचना मिली थी कि धरनास्थल पर कुछ असामाजिक तत्व और अपुष्ट पहचान वाले बाहरी लोग मौजूद हैं, इसलिए पहचान की पुष्टि के लिए वे वहां पहुंचे। सीओ शिव शंकर पांडे ने कहा कि उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि भीड़ में कोई असामाजिक तत्व न घुस आए।

पांडे ने यह भी बताया कि पुलिस छात्रों की एक प्रोफाइल तैयार करना चाहती है — जिसमें नाम और पते हों — ताकि जिला प्रशासन के लिए स्थिति पर नजर रखना आसान हो। उन्होंने कहा कि डीसी और एसपी केवल निरीक्षण के लिए पहुंचे थे।

छात्रों की मांग और आंदोलन की स्थिति

छात्र नेता राजेश प्रसाद ने स्पष्ट किया कि जेएसएससी सीजीएल को रद्द करने की मांग का ठोस आधार है और यह आधार सीआईडी की रिपोर्ट पर आधारित है, जिसे अभी तक न्यायालय में दाखिल नहीं किया गया। उन्होंने सरकार से अपील की कि सीआईडी रिपोर्ट में दर्ज बयानों को कोर्ट में जमा किया जाए।

गौरतलब है कि यह आंदोलन जेपीएससी में कथित अनियमितताओं को लेकर लंबे समय से चल रहा है। हालिया विधानसभा मार्च के बाद आंदोलन ने नई गति पकड़ी है। रात की इस घटना के बाद भी छात्र धरनास्थल पर डटे रहे और उनका प्रदर्शन जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब अधिकारी भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों के नाम-पते भी मांगते हैं। जेपीएससी-जेएसएससी विवाद झारखंड में युवा बेरोज़गारी और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता का गहरा प्रश्न है, जिसे रात की इस कार्रवाई ने और उलझा दिया। सीआईडी रिपोर्ट के अस्तित्व को स्वीकार करते हुए उसे कोर्ट में न दाखिल करना — यही वह विरोधाभास है जिस पर असली जवाबदेही बनती है।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रांची में जेपीएससी विरोधी धरनास्थल पर रात को क्या हुआ?
12 अगस्त 2026 की देर रात रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम के पास धरने पर बैठे छात्रों के प्रदर्शन स्थल पर सिटी एसपी, सीओ, डीसी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस छात्रों को जबरन हटाने आई थी, जबकि पुलिस ने इसे असामाजिक तत्वों की जांच बताया।
भाजपा नेताओं ने क्या आरोप लगाए?
भाजपा विधायक राज सिन्हा ने कहा कि प्रशासन छात्रों को डराने-धमकाने और रात में धरनास्थल खाली कराने आया था। नेता अमर कुमार बाउरी ने कहा कि पुलिस बलपूर्वक छात्रों को हटाने आई थी और यह लोकतांत्रिक देश में अस्वीकार्य है।
पुलिस ने रात में धरनास्थल पर जाने का क्या कारण बताया?
सिटी एसपी पारस राणा ने कहा कि उन्हें सूचना मिली थी कि कुछ असामाजिक तत्व और अपुष्ट पहचान वाले बाहरी लोग वहां मौजूद हैं। सीओ शिव शंकर पांडे ने कहा कि पुलिस छात्रों की प्रोफाइल बनाने और प्रदर्शन स्थल को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से वहां पहुंची।
जेएसएससी सीजीएल रद्द करने की मांग क्यों उठ रही है?
छात्र नेता राजेश प्रसाद के अनुसार, जेएसएससी सीजीएल रद्द करने की मांग का आधार सीआईडी की रिपोर्ट है, जिसमें अनियमितताओं का उल्लेख है। हालांकि, यह रिपोर्ट अभी तक न्यायालय में दाखिल नहीं की गई है, जिसे लेकर छात्र सरकार पर दबाव बना रहे हैं।
रात की घटना के बाद छात्रों के आंदोलन की क्या स्थिति है?
रात भर बातचीत और तनाव के बाद भी छात्र धरनास्थल पर डटे रहे। उनकी मांगें अभी पूरी नहीं हुई हैं और आंदोलन जारी है। हालिया विधानसभा मार्च के बाद यह आंदोलन और तेज हो गया है।
राष्ट्र प्रेस
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