12 अगस्त 2026
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झारखंड छात्र आंदोलन 19वें दिन: रात 12:30 बजे सिविल ड्रेस में पहुंची पुलिस, लाइटें बंद कर छात्रों को धमकाने का आरोप

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झारखंड छात्र आंदोलन 19वें दिन: रात 12:30 बजे सिविल ड्रेस में पहुंची पुलिस, लाइटें बंद कर छात्रों को धमकाने का आरोप

सारांश

रांची में JPSC-JSSC परीक्षा गड़बड़ियों के खिलाफ 19 दिनों से जारी छात्र धरने पर मंगलवार रात पुलिस का सिविल ड्रेस में दबिश, स्ट्रीट लाइटें बंद, तस्वीरें खींची गईं — छात्रों का आरोप है कि आंदोलन को तोड़ने की कोशिश हो रही है, लेकिन वे एकजुट हैं।

मुख्य बातें

रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में JPSC और JSSC परीक्षा गड़बड़ियों के खिलाफ छात्र आंदोलन 19वें दिन भी जारी।
मंगलवार रात 12:30 बजे एसपी, डीसी, एसएसपी समेत अधिकारी सिविल ड्रेस में धरनास्थल पर पहुंचे।
छात्रों का आरोप — स्ट्रीट लाइटें बंद कर, तस्वीरें खींचकर और नाम नोट कर डराने-धमकाने की कोशिश की गई।
भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों को उठाकर अस्पताल ले जाने की धमकी का आरोप; रात को एंबुलेंस भी तैनात।
मीडिया के पहुंचने के बाद पुलिस तड़के 3:30 बजे वापस लौटी।
बाबूलाल मरांडी बुधवार सुबह धरनास्थल पर पहुंचे और छात्रों से मुलाकात की।

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहा छात्र धरना बुधवार, 12 अगस्त 2026 को अपने 19वें दिन में प्रवेश कर गया। प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि मंगलवार रात 12:30 बजे पुलिस अधिकारी सिविल ड्रेस में धरनास्थल पर पहुंचे, स्ट्रीट लाइटें बंद करवाईं और छात्रों की तस्वीरें लेकर उन्हें धमकाने का प्रयास किया।

रात के अंधेरे में पुलिस का दौरा

छात्रों के अनुसार, मंगलवार रात करीब 12:30 बजे एसपी, डीसी, एसएसपी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी सिविल ड्रेस में धरनास्थल पर पहुंचे। करीब एक घंटे बाद महिला पुलिसकर्मी भी बिना वर्दी के वहाँ आईं। एक प्रदर्शनकारी ने बताया, 'अधिकारियों ने सबसे पहले स्टेडियम और आसपास की सभी स्ट्रीट लाइटें बंद करवा दीं। इसके बाद छात्रों की पहचान कर उनके नाम नोट किए गए और मोबाइल से तस्वीरें ली गईं।' यह सिलसिला तड़के साढ़े तीन बजे तक चलता रहा।

छात्रों पर दबाव और विभाजन की कोशिश का आरोप

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिसकर्मी JPSC और JSSC के छात्रों को अलग-अलग करने का प्रयास कर रहे थे। एक छात्र ने कहा, 'सरकार हमें बांटने का प्रयास कर रही है ताकि छात्र अलग-अलग ग्रुपों में बंट जाएं, लेकिन हम एक हैं। जब तक हमारी माँगें पूरी नहीं होतीं, हम अपनी बात पर अड़े रहेंगे।' छात्रों का यह भी कहना है कि पुलिस उनके घरों पर भी भेजी जा रही है।

गौरतलब है कि छात्रों ने 10 अगस्त को विधानसभा तक मार्च किया था। उनका आरोप है कि सरकार ने 8 अगस्त को ही धरनास्थल से छात्रों को हटाने की कोशिश शुरू कर दी थी।

भूख हड़ताल और एंबुलेंस की तैनाती

धरनास्थल पर कई छात्र भूख हड़ताल पर बैठे हैं और उनकी तबीयत बिगड़ने की खबरें हैं। छात्रों का आरोप है कि प्रशासन ने कहा था कि 'जो लोग भूख हड़ताल पर हैं उन्हें उठाकर अस्पताल ले जाया जाएगा।' इसी संदर्भ में देर रात धरनास्थल पर एंबुलेंस भी तैनात कर दी गई थी। हालांकि मीडियाकर्मियों के पहुंचने और सवाल पूछने के बाद पुलिसकर्मी रजिस्टर में नाम लिखकर वापस चले गए।

बाबूलाल मरांडी की मुलाकात

बुधवार सुबह बाबूलाल मरांडी धरनास्थल पर पहुंचे और छात्रों से मुलाकात की। एक प्रदर्शनकारी के अनुसार, मरांडी ने मीडिया के सामने छात्रों की स्थिति पर बात की। यह आंदोलन ऐसे समय में और तेज हो रहा है जब झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की माँग लंबे समय से उठती रही है।

आंदोलन की पृष्ठभूमि और आगे की राह

एक प्रदर्शनकारी ने कहा, 'हमें लगता है कि जब से यह सरकार सत्ता में आई है, तब से हम परेशानियां झेल रहे हैं। यह कोई एक-दो साल की बात नहीं है।' 19 दिनों से जारी इस धरने में सैकड़ों छात्र-छात्राएं डटी हुई हैं और उनकी माँगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया है। प्रशासन और छात्रों के बीच तनाव बढ़ने के साथ यह देखना होगा कि सरकार इन माँगों पर कोई ठोस कदम उठाती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लाइटें बंद करना और छात्रों की तस्वीरें लेना — ये कदम प्रशासनिक दबाव की उस पुरानी रणनीति की याद दिलाते हैं जो आंदोलनों को खुलेआम दबाने की बजाय अदृश्य तरीकों से कमज़ोर करती है। सवाल यह है कि यदि प्रशासन की मंशा सिर्फ 'कानून-व्यवस्था' बनाए रखना था, तो सिविल ड्रेस और अंधेरे की ज़रूरत क्यों पड़ी? JPSC-JSSC परीक्षा पारदर्शिता की माँग कोई नई नहीं है — यह झारखंड में युवाओं के उस व्यापक असंतोष का हिस्सा है जो वर्षों से सुनवाई की प्रतीक्षा में है। सरकार अगर इस आंदोलन को केवल 'कानून-व्यवस्था की समस्या' मानती रही, तो यह तनाव और गहरा होगा।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड छात्र आंदोलन किस माँग को लेकर हो रहा है?
यह आंदोलन JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में है। सैकड़ों छात्र-छात्राएं रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में 19 दिनों से धरने पर बैठे हैं और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की माँग कर रहे हैं।
रात को पुलिस धरनास्थल पर क्यों पहुंची?
प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। छात्रों का आरोप है कि पुलिस अधिकारी मंगलवार रात 12:30 बजे सिविल ड्रेस में पहुंचे, स्ट्रीट लाइटें बंद करवाईं और छात्रों की पहचान कर उन्हें धमकाने की कोशिश की।
क्या भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की तबीयत बिगड़ रही है?
हाँ, प्रदर्शनकारियों के अनुसार कई छात्रों की तबीयत खराब हो रही है। रात को धरनास्थल पर एंबुलेंस भी तैनात की गई थी और आरोप है कि प्रशासन ने भूख हड़ताली छात्रों को अस्पताल ले जाने की बात कही थी।
बाबूलाल मरांडी का इस आंदोलन से क्या संबंध है?
बाबूलाल मरांडी बुधवार सुबह धरनास्थल पर पहुंचे और छात्रों से मुलाकात की। उन्होंने मीडिया के सामने छात्रों की स्थिति पर बात की, हालांकि उनके दौरे का कोई आधिकारिक परिणाम अभी सामने नहीं आया है।
आंदोलन आगे कहाँ जाएगा?
छात्रों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी माँगें पूरी नहीं होतीं, वे धरना जारी रखेंगे। 10 अगस्त को विधानसभा मार्च के बाद तनाव बढ़ा है और सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है।
राष्ट्र प्रेस
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