शेफाली वर्मा का खुलासा: टीम से बाहर रहने पर की कड़ी मेहनत, एशियन गेम्स 2026 गोल्ड जीतकर साबित किया दम
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सलामी बल्लेबाज़ शेफाली वर्मा ने एशियन गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल जीतने के बाद अपने संघर्षपूर्ण दौर को याद करते हुए कहा कि टीम से बाहर रहना उनके करियर का सबसे कठिन अध्याय था, लेकिन उसी समय की गई कड़ी मेहनत ने उन्हें आज यहाँ खड़ा किया है। JSW द्वारा आयोजित एक मीडिया राउंडटेबल में शेफाली ने खुलकर अपनी मानसिक यात्रा, परिवार के समर्थन और वापसी के संकल्प के बारे में बात की।
टीम से बाहर का वह दर्दनाक दौर
शेफाली वर्मा ने बताया, 'जब मुझे टीम से बाहर किया गया, तो वह मेरे क्रिकेट करियर का सबसे दुखद पल था। वह समय मेरे लिए बहुत मुश्किल था। टीम से बाहर रहने के दौरान मैंने कितनी मेहनत की, यह सिर्फ मुझे ही पता है।' उन्होंने कहा कि उन्होंने परिस्थितियों को स्वीकार किया और उसे अपनी कमज़ोरी नहीं, बल्कि अवसर बना लिया।
शेफाली ने आगे कहा, 'सबसे अच्छी बात यह रही कि मैंने सब कुछ स्वीकार कर लिया। हाँ, मैं टीम में नहीं हूँ, लेकिन मुझे कड़ी मेहनत करनी है और इस समय का सही इस्तेमाल करना है। मुझे यह साबित करना था कि मैं सबसे अच्छी हूँ — अपने देश और अपनी टीम के लिए।'
मानसिक सेहत, फिटनेस और स्किल्स पर फोकस
भारतीय सलामी बल्लेबाज़ ने बताया कि इस कठिन समय में उन्होंने अपनी मानसिक सेहत, तकनीकी कौशल और शारीरिक फिटनेस तीनों पर एकसाथ काम किया। उन्होंने कहा, 'मैंने खुद को किसी भी बुरी घटना या बातों का सामना नहीं करने दिया।' यह आत्म-नियंत्रण और अनुशासन उनकी वापसी की नींव बना।
शेफाली ने परिवार को भी इस पुनर्जन्म का श्रेय दिया — 'मुझे लगता है कि आखिर में परिवार ही हमारे लिए सब कुछ है। जिस तरह से उन्होंने उस समय मेरा साथ दिया, उसके लिए उनका शुक्रिया।'
एशियन गेम्स 2026 और जापान का अनुभव
एशियन गेम्स 2026 की मेज़बानी को लेकर शेफाली ने जापान की सराहना की। उन्होंने कहा, 'जब हम जापान गए थे, तो हमने सोचा भी नहीं था कि वहाँ की सुविधाएँ इतनी अच्छी होंगी। जापान ने जिस तरह से हमारा साथ दिया और मैदान से जुड़ी सुविधाएँ दीं, उसके लिए उनकी जितनी तारीफ की जाए कम है।'
उन्होंने कहा कि भारतीय महिला क्रिकेट के प्रति इस गंभीरता को देखकर पूरी टीम को और अच्छा करने की प्रेरणा मिली।
वनडे विश्व कप से शुरू हुई नई पारी
शेफाली ने वनडे विश्व कप की ट्रॉफी को एक भावनात्मक मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा, 'जब हमने वनडे वर्ल्ड कप जीता, तो खुशी के आँसू आ गए।' उनके अनुसार उस जीत के बाद से भारतीय महिला क्रिकेट लगातार आगे बढ़ रही है, हालाँकि रास्ते में कई मुश्किलें भी आईं।
शेफाली ने यह भी कहा कि जब टीम कोई ट्रॉफी या मेडल जीतती है, तो उनकी आँखों के सामने उनकी पूरी मेहनत जीवंत हो उठती है — 'एक खिलाड़ी के तौर पर इससे बड़ा सम्मान का पल और कोई नहीं हो सकता।'
आगे का सफर
एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल और वनडे विश्व कप की जीत के बाद भारतीय महिला क्रिकेट एक नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही है। शेफाली वर्मा जैसी खिलाड़ियों की व्यक्तिगत यात्रा न केवल टीम को बल देती है, बल्कि युवा क्रिकेटरों के लिए एक प्रेरक मिसाल भी पेश करती है।