जमुई पीड़िता पहचान उजागर मामला: भाजपा एमएलसी शीला पंडित ने मीसा भारती के खिलाफ FIR आवेदन दिया
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) की विधान परिषद सदस्य शीला पंडित ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की सांसद मीसा भारती के खिलाफ 26 सितंबर 2026 को प्राथमिकी दर्ज कराने का आवेदन दिया है। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि मीसा भारती ने जमुई की पीड़ित नाबालिग बच्ची के परिवार की तस्वीर कथित तौर पर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के समक्ष सार्वजनिक की और सोशल मीडिया पर प्रसारित की, जिससे पीड़िता की पहचान उजागर होने का गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।
आवेदन में क्या कहा गया
शीला पंडित के आवेदन के अनुसार, मीसा भारती द्वारा पीड़ित नाबालिग बच्ची के परिवार की तस्वीर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सामने सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत की गई तथा सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर पोस्ट अथवा प्रसारित की गई। आवेदन में कहा गया है कि इस कृत्य से पीड़िता और उसके परिवार की निजता, गरिमा एवं सुरक्षा गंभीर रूप से प्रभावित होने की आशंका है।
आवेदक ने स्पष्ट किया है कि यह कार्य पॉक्सो एक्ट की धारा 23 तथा किशोर न्याय अधिनियम की धारा 74 के अंतर्गत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। आवेदन में पॉक्सो एक्ट की धारा 23(2) का विशेष उल्लेख भी किया गया है।
डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित करने की माँग
आवेदन में संबंधित अधिकारियों से अनुरोध किया गया है कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर सार्वजनिक किए गए वीडियो फुटेज, फोटो, सोशल मीडिया पोस्ट, यूआरएल एवं अन्य डिजिटल साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित किया जाए। इसके साथ ही संलग्नक के रूप में मीडिया के समक्ष तस्वीर सार्वजनिक किए जाने का वीडियो/फुटेज भी आवेदन में शामिल किया गया है।
आवेदन में यह भी अपील की गई है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इन वीडियो और फोटो की गोपनीयता सुनिश्चित की जाए, ताकि पीड़िता की पहचान आगे और उजागर न हो।
जमुई मामले की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि जमुई की इस घटना को लेकर पहले से राजनीतिक विवाद चल रहा था। सांसद मीसा भारती इस मामले में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के उद्देश्य से पुलिस के पास पहुँची थीं। वहीं, इस मामले में सीएम कार्यालय के एक कर्मचारी के खिलाफ प्राथमिकी पहले ही दर्ज हो चुकी है।
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में नाबालिगों से जुड़े मामलों में पीड़िता की पहचान उजागर होने को लेकर कानूनी और नैतिक सवाल पहले से उठाए जाते रहे हैं। पॉक्सो एक्ट के प्रावधान पीड़ित बच्चों की पहचान के संबंध में मीडिया और सोशल मीडिया पर सख्त पाबंदी लगाते हैं।
आगे क्या होगा
अब यह आवेदन संबंधित पुलिस अधिकारियों के समक्ष विचाराधीन है। शीला पंडित ने माँग की है कि मामले में निष्पक्ष और शीघ्र जाँच की जाए तथा कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। आलोचकों का कहना है कि इस विवाद ने एक बार फिर यह रेखांकित किया है कि राजनीतिक प्रदर्शन के दौरान बाल पीड़ितों की पहचान की सुरक्षा के कानूनी दायित्व का पालन किस हद तक होता है।