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जमुई पीड़िता फोटो विवाद: मीसा भारती ने बिहार CM सम्राट चौधरी के खिलाफ मांगी FIR, पुलिस ने किया इनकार

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जमुई पीड़िता फोटो विवाद: मीसा भारती ने बिहार CM सम्राट चौधरी के खिलाफ मांगी FIR, पुलिस ने किया इनकार

सारांश

राजद सांसद मीसा भारती का पटना के सचिवालय थाने में पहुँचना और पुलिस का शिकायत लेने से इनकार — जमुई पीड़िता की तस्वीर एक्स पर शेयर करने और 20 मिनट में डिलीट करने का यह विवाद अब सीधे CM सम्राट चौधरी तक पहुँच गया है। 250 से अधिक आम लोगों पर FIR और मुख्यमंत्री पर चुप्पी — यही सवाल अब राजनीतिक केंद्र में है।

मुख्य बातें

राजद सांसद मीसा भारती ने 25 सितंबर 2026 को पटना के सचिवालय थाने में बिहार CM सम्राट चौधरी के खिलाफ FIR की माँग की।
मीसा भारती के अनुसार पुलिस ने उनकी लिखित शिकायत स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
CM सम्राट चौधरी ने जमुई पीड़िता के परिवार की तस्वीर एक्स पर शेयर की और कथित तौर पर 20 मिनट बाद हटा दी — राजद का आरोप है कि यह पॉक्सो अधिनियम का उल्लंघन है।
तस्वीर से जुड़ी सामग्री शेयर करने पर न्यूज़ चैनल कर्मचारियों व आम नागरिकों सहित कथित तौर पर 250 से अधिक लोगों के खिलाफ FIR दर्ज हो चुकी है।
तेजस्वी यादव ने चेतावनी दी कि यदि पुलिस CM के खिलाफ मामला दर्ज नहीं करती, तो वे अदालत जाएँगे।
मीसा भारती ने बिहार के जमुई, समस्तीपुर, बांका, मधेपुरा और दरभंगा में महिला सुरक्षा की स्थिति पर भी चिंता जताई।

राजद की राज्यसभा सांसद मीसा भारती ने शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को पटना के सचिवालय थाने पहुँचकर जमुई छेड़छाड़ मामले की नाबालिग पीड़िता के परिवार की तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर करने के आरोप में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की माँग की। हालाँकि, उनके अनुसार पुलिस ने उनकी लिखित शिकायत स्वीकार करने से इनकार कर दिया और वह बिना मामला दर्ज हुए थाने से लौट गईं।

मुख्य घटनाक्रम

सचिवालय थाने से बाहर आकर मीसा भारती ने कहा, 'हम सचिवालय थाने में जाति की राजनीति करने नहीं आए हैं। हम जनता के चुने हुए प्रतिनिधि और सांसद हैं। अगर मेरी एफआईआर दर्ज नहीं हो रही है तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि बिहार के थानों में आम लोगों की क्या स्थिति होती होगी।' उन्होंने सवाल उठाया कि जब एक निर्वाचित सांसद की शिकायत पर कार्रवाई नहीं होती, तो बिहार के आम नागरिक थाने में न्याय के लिए कहाँ जाएँ।

मीसा भारती ने यह भी रेखांकित किया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास गृह मंत्री का प्रभार भी है, जो इस मामले में प्रशासनिक जवाबदेही के सवाल को और गंभीर बनाता है।

विवाद की जड़: जमुई तस्वीर प्रकरण

यह विवाद तब शुरू हुआ जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को जमुई में नाबालिग पीड़िता के परिवार से मुलाकात के दौरान ली गई एक तस्वीर एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर शेयर की और कथित तौर पर करीब 20 मिनट बाद उसे हटा दिया। मीसा भारती का आरोप है कि यह लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन हो सकता है।

उन्होंने तर्क दिया कि एक ओर इस मामले से जुड़ी सामग्री प्रसारित करने के आरोप में न्यूज़ चैनलों के कर्मचारियों, यूट्यूबर्स और आम नागरिकों सहित कथित तौर पर 250 से अधिक लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है, तो कानून मुख्यमंत्री पर भी समान रूप से लागू होना चाहिए।

तेजस्वी यादव का रुख

राजद नेता तेजस्वी यादव ने भी मुख्यमंत्री की उस पोस्ट को पॉक्सो अधिनियम का उल्लंघन बताया और चेतावनी दी कि यदि पुलिस मुख्यमंत्री के खिलाफ मामला दर्ज नहीं करती, तो वे अदालत का रुख करेंगे। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि कानून के समक्ष सभी नागरिक बराबर हैं, चाहे वह सत्ता में हों या विपक्ष में।

महिला सुरक्षा पर व्यापक सवाल

मीसा भारती ने केवल जमुई तक सीमित न रहते हुए बिहार के जमुई, समस्तीपुर, बांका, मधेपुरा और दरभंगा में महिलाओं और लड़कियों से जुड़ी हालिया घटनाओं का भी हवाला दिया। उनका कहना है कि ये घटनाएँ राज्य में महिलाओं की सुरक्षा की स्थिति पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती हैं। गौरतलब है कि यह मुद्दा ऐसे समय में उठा है जब बिहार में अगले विधानसभा चुनाव की राजनीतिक सरगर्मी तेज़ है।

आगे क्या होगा

अब यह देखना होगा कि पुलिस मीसा भारती की लिखित शिकायत पर औपचारिक रूप से क्या कदम उठाती है। पॉक्सो एक्ट के कथित उल्लंघन का निर्धारण उपलब्ध साक्ष्यों, संबंधित तथ्यों और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर होगा। यदि पुलिस निष्क्रिय रहती है, तो तेजस्वी यादव के अनुसार राजद न्यायिक हस्तक्षेप की माँग कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो 'कानून सबके लिए बराबर है' की अवधारणा परीक्षण में है। गृह मंत्री का प्रभार मुख्यमंत्री के पास होने से जवाबदेही की रेखा और जटिल हो जाती है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक रही है, वह यह है कि अगर पुलिस इस शिकायत पर निष्क्रिय रहती है, तो यह संस्थागत पूर्वाग्रह का सबसे ठोस उदाहरण बन सकता है — और अदालती रास्ता इसे और बड़ी कानूनी मिसाल में बदल सकता है।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जमुई पीड़िता फोटो विवाद क्या है?
जमुई में एक नाबालिग लड़की से कथित छेड़छाड़ के मामले में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पीड़िता के परिवार से मुलाकात के दौरान ली गई तस्वीर एक्स पर शेयर की और कथित तौर पर करीब 20 मिनट बाद हटा दी। राजद का आरोप है कि यह पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन है।
मीसा भारती ने FIR की माँग क्यों की?
मीसा भारती का तर्क है कि जब पीड़िता से जुड़ी सामग्री साझा करने पर 250 से अधिक आम लोगों के खिलाफ FIR हो चुकी है, तो कानून मुख्यमंत्री पर भी समान रूप से लागू होना चाहिए। उन्होंने पॉक्सो अधिनियम के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए सचिवालय थाने में लिखित शिकायत दी, लेकिन पुलिस ने उसे स्वीकार करने से मना कर दिया।
पुलिस ने मीसा भारती की शिकायत क्यों नहीं ली?
मीसा भारती के अनुसार पटना के सचिवालय थाने की पुलिस ने उनकी लिखित शिकायत लेने और FIR दर्ज करने से इनकार कर दिया। पुलिस की ओर से इस इनकार का कोई आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
तेजस्वी यादव इस मामले में अदालत क्यों जाना चाहते हैं?
राजद नेता तेजस्वी यादव ने स्पष्ट किया है कि यदि पुलिस मुख्यमंत्री के खिलाफ FIR दर्ज नहीं करती, तो वे न्यायालय में याचिका दायर करेंगे। उनका कहना है कि कानून के समक्ष समानता का सिद्धांत सत्ता में बैठे व्यक्ति पर भी उतना ही लागू होता है।
इस मामले का पॉक्सो एक्ट से क्या संबंध है?
पॉक्सो अधिनियम यौन अपराधों की नाबालिग पीड़िताओं की पहचान उजागर करने पर रोक लगाता है। राजद का आरोप है कि मुख्यमंत्री द्वारा पीड़ित परिवार की तस्वीर एक्स पर साझा करना इस कानून का संभावित उल्लंघन है। हालाँकि इसका अंतिम निर्धारण उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर न्यायालय ही करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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