लालू परिवार की जेड प्लस सुरक्षा वापसी पर सियासत, अरुण भारती बोले — खतरे के आकलन से तय होती है सुरक्षा
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की जेड प्लस सुरक्षा वापस लिए जाने के मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के सांसद अरुण भारती ने 6 जून को स्पष्ट किया कि सुरक्षा का स्तर खतरे के आकलन के आधार पर घटाया या बढ़ाया जाता है, न कि राजनीतिक कारणों से।
अरुण भारती का रुख
अरुण भारती ने कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि को सुरक्षा प्रदान करने या उसमें बदलाव करने का अधिकार पूरी तरह बिहार पुलिस और गृह विभाग के पास होता है। उनके अनुसार सुरक्षा व्यवस्था की समय-समय पर समीक्षा की जाती है और परिस्थितियों तथा समीक्षा रिपोर्टों के आधार पर निर्णय लिया जाता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी जनप्रतिनिधि को आजीवन सुरक्षा दिए जाने का कोई स्थायी प्रावधान नहीं है।
भाजपा एमएलसी की दलील
महाराष्ट्र से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एमएलसी श्रीकांत पंडितराव भारतीय ने कहा कि जेड प्लस जैसी उच्चस्तरीय सुरक्षा विशेष नियमों और निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत ही प्रदान की जाती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सुरक्षा देने या हटाने का निर्णय विभिन्न एजेंसियों से प्राप्त सूचनाओं और खुफिया रिपोर्टों के विस्तृत विश्लेषण के बाद ही लिया जाता है। उनके अनुसार यह कोई सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक सुनिश्चित तंत्र पर आधारित निर्णय है।
कांग्रेस की आपत्ति
कांग्रेस नेता नसीम खान ने इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए आरोप लगाया कि केंद्र और विभिन्न राज्यों में BJP सरकारें विपक्षी नेताओं पर दबाव बनाने और उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं के साथ जिस प्रकार का व्यवहार हो रहा है, वह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। नसीम खान ने यह भी कहा कि सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों को राजनीतिक नज़रिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव तीनों को पहले जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त थी, जो देश की सर्वोच्च सुरक्षा श्रेणियों में से एक है। सुरक्षा वापसी के इस फैसले ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, जहाँ राजद और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच पहले से ही तनाव बना हुआ है। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में 2025 के विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ जोर पकड़ रही हैं।
आगे की स्थिति
फिलहाल बिहार सरकार की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। सुरक्षा समीक्षा की प्रक्रिया जारी रहने की संभावना है, और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएँ आने वाले दिनों में इस विवाद को और गहरा कर सकती हैं।