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लालू परिवार की जेड प्लस सुरक्षा वापसी पर सियासत, अरुण भारती बोले — खतरे के आकलन से तय होती है सुरक्षा

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लालू परिवार की जेड प्लस सुरक्षा वापसी पर सियासत, अरुण भारती बोले — खतरे के आकलन से तय होती है सुरक्षा

सारांश

लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव की जेड प्लस सुरक्षा वापसी ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। LJP सांसद अरुण भारती ने इसे खतरे के आकलन पर आधारित प्रशासनिक निर्णय बताया, जबकि कांग्रेस ने इसे विपक्ष को दबाने की कोशिश करार दिया।

मुख्य बातें

लालू प्रसाद यादव , राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव की जेड प्लस सुरक्षा वापस लिए जाने पर राजनीतिक विवाद शुरू।
LJP (रामविलास) सांसद अरुण भारती ने कहा — सुरक्षा खतरे के आकलन और समीक्षा रिपोर्टों के आधार पर तय होती है, कोई स्थायी प्रावधान नहीं।
BJP एमएलसी श्रीकांत पंडितराव भारतीय ने कहा — निर्णय खुफिया रिपोर्टों के विस्तृत विश्लेषण के बाद लिया जाता है।
कांग्रेस नेता नसीम खान ने आरोप लगाया — BJP सरकारें विपक्षी नेताओं को डराने-धमकाने का प्रयास कर रही हैं।
बिहार सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की जेड प्लस सुरक्षा वापस लिए जाने के मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के सांसद अरुण भारती ने 6 जून को स्पष्ट किया कि सुरक्षा का स्तर खतरे के आकलन के आधार पर घटाया या बढ़ाया जाता है, न कि राजनीतिक कारणों से।

अरुण भारती का रुख

अरुण भारती ने कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि को सुरक्षा प्रदान करने या उसमें बदलाव करने का अधिकार पूरी तरह बिहार पुलिस और गृह विभाग के पास होता है। उनके अनुसार सुरक्षा व्यवस्था की समय-समय पर समीक्षा की जाती है और परिस्थितियों तथा समीक्षा रिपोर्टों के आधार पर निर्णय लिया जाता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी जनप्रतिनिधि को आजीवन सुरक्षा दिए जाने का कोई स्थायी प्रावधान नहीं है।

भाजपा एमएलसी की दलील

महाराष्ट्र से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एमएलसी श्रीकांत पंडितराव भारतीय ने कहा कि जेड प्लस जैसी उच्चस्तरीय सुरक्षा विशेष नियमों और निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत ही प्रदान की जाती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सुरक्षा देने या हटाने का निर्णय विभिन्न एजेंसियों से प्राप्त सूचनाओं और खुफिया रिपोर्टों के विस्तृत विश्लेषण के बाद ही लिया जाता है। उनके अनुसार यह कोई सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक सुनिश्चित तंत्र पर आधारित निर्णय है।

कांग्रेस की आपत्ति

कांग्रेस नेता नसीम खान ने इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए आरोप लगाया कि केंद्र और विभिन्न राज्यों में BJP सरकारें विपक्षी नेताओं पर दबाव बनाने और उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं के साथ जिस प्रकार का व्यवहार हो रहा है, वह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। नसीम खान ने यह भी कहा कि सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों को राजनीतिक नज़रिए से नहीं देखा जाना चाहिए।

विवाद की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव तीनों को पहले जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त थी, जो देश की सर्वोच्च सुरक्षा श्रेणियों में से एक है। सुरक्षा वापसी के इस फैसले ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, जहाँ राजद और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच पहले से ही तनाव बना हुआ है। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में 2025 के विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ जोर पकड़ रही हैं।

आगे की स्थिति

फिलहाल बिहार सरकार की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। सुरक्षा समीक्षा की प्रक्रिया जारी रहने की संभावना है, और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएँ आने वाले दिनों में इस विवाद को और गहरा कर सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह तथ्य नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता कि यह निर्णय बिहार चुनावों की तैयारी के ठीक बीच आया है। जब सत्तारूढ़ दल के नेताओं की सुरक्षा बरकरार रहती है और विपक्ष की घटाई जाती है, तो 'खतरे के आकलन' की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। आलोचकों का कहना है कि बिना पारदर्शी मानदंडों के ऐसे फैसले राजनीतिक हथियार बन सकते हैं। सुरक्षा तंत्र की विश्वसनीयता के लिए ज़रूरी है कि समीक्षा प्रक्रिया सार्वजनिक रूप से परिभाषित और दलगत राजनीति से मुक्त हो।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लालू परिवार की जेड प्लस सुरक्षा क्यों वापस ली गई?
अधिकारियों के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था की नियमित समीक्षा और खतरे के आकलन के आधार पर यह निर्णय लिया गया है। बिहार पुलिस और गृह विभाग के पास जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा में बदलाव का अधिकार होता है।
जेड प्लस सुरक्षा क्या होती है और यह किसे मिलती है?
जेड प्लस भारत की सर्वोच्च सुरक्षा श्रेणियों में से एक है, जिसमें NSG कमांडो सहित बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं। यह खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट और खतरे के विस्तृत आकलन के बाद विशेष प्रक्रिया के तहत प्रदान की जाती है।
अरुण भारती ने इस विवाद पर क्या कहा?
LJP (रामविलास) सांसद अरुण भारती ने कहा कि सुरक्षा का स्तर खतरे के आकलन और समीक्षा रिपोर्टों के अनुसार तय होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी जनप्रतिनिधि को आजीवन सुरक्षा देने का कोई स्थायी प्रावधान नहीं है।
कांग्रेस ने इस मामले पर क्या आपत्ति जताई?
कांग्रेस नेता नसीम खान ने आरोप लगाया कि BJP सरकारें विपक्षी नेताओं को दबाने और डराने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों को राजनीतिक नज़रिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
इस विवाद का बिहार की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब बिहार में चुनावी तैयारियाँ जोर पकड़ रही हैं। राजद और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच पहले से तनावपूर्ण माहौल में यह मुद्दा विपक्षी एकजुटता और सरकार की जवाबदेही की बहस को और तेज़ कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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