लालू-राबड़ी सुरक्षा विवाद: गिरिराज सिंह बोले— नियम के बाहर हैं तो सुरक्षा कैसे दें
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने 6 जून 2026 को राजद नेता लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की सुरक्षा कटौती को लेकर उठे विवाद पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि सरकारी सुरक्षा नियमों के तहत दी जाती है, और यदि कोई उन नियमों के दायरे में नहीं आता तो उसे सुरक्षा देने का औचित्य नहीं बनता। उन्होंने कहा कि लालू यादव और राबड़ी देवी की किसी से व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है, इसलिए खतरे के आधार पर सुरक्षा का मूल्यांकन होना स्वाभाविक है।
गिरिराज सिंह का रुख
गिरिराज सिंह ने कहा, जेड और जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा के लिए निर्धारित मानदंड होते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि वे स्वयं मंत्री होते हुए जेड श्रेणी की सुरक्षा के लिए धरने पर बैठ जाएँ, तो यह उचित नहीं होगा। उनके अनुसार सुरक्षा या तो नियमों के आधार पर दी जाती है या वास्तविक खतरे के आकलन पर।
जदयू नेताओं की प्रतिक्रिया
जनता दल (यूनाइटेड) के नेता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि राजद की दबाव की राजनीति से कुछ हासिल नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनेताओं को दी गई सुरक्षा का समय-समय पर राज्य सुरक्षा नीति के तहत आकलन किया जाता है और खतरे का स्तर तय होने के बाद ही सुरक्षा श्रेणी निर्धारित की जाती है। उन्होंने कहा कि यह एक प्रक्रिया है और सभी को इसका सम्मान करना चाहिए।
जदयू नेता नीरज कुमार ने इस पूरे विवाद को विधान परिषद चुनाव से जोड़ते हुए कहा कि परिवार में आंतरिक कलह इसी कारण उभर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि लालू परिवार ने पद और सुविधाओं को परिवार तक सीमित रखा है और विपक्ष के नेता के रूप में मिली सुविधाएँ भी लौटाई जानी चाहिए। नीरज कुमार ने यह भी कहा कि नौकरी के बदले ज़मीन घोटाले में ली गई ज़मीन कम से कम संबंधित परिवारों को लौटाई जानी चाहिए।
राजद का पलटवार
राजद नेता मृत्युंजय तिवारी ने एनडीए नेताओं के बयानों को 'ओछी सियासत' करार दिया। उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद यादव का कद बिहार तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में उनकी बड़ी पहचान है। तिवारी ने आरोप लगाया कि लालू यादव और राबड़ी देवी को सरकारी बंगले से बेदखल करने और उनकी सुरक्षा घटाने की कोशिश की जा रही है, जिसका नुकसान अंततः उन्हीं को उठाना पड़ेगा।
विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि बिहार में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार द्वारा लालू यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा श्रेणी की समीक्षा के बाद यह विवाद सामने आया। राजद ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया है, जबकि सत्तापक्ष इसे नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया करार दे रहा है। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब बिहार में विधान परिषद चुनाव की तैयारियाँ चल रही हैं और राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है।
आने वाले दिनों में राजद इस मुद्दे को और तेज़ करने की रणनीति पर काम कर रही है, जबकि एनडीए के नेता इसे विशुद्ध रूप से प्रशासनिक निर्णय बताकर राजनीतिक बहस से बचने की कोशिश कर रहे हैं।