22 जुलाई 2026
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लालू-राबड़ी की सुरक्षा कटौती पर सियासत तेज़: विपक्ष ने BJP पर साधा निशाना, NDA बोला — 'स्टेटस सिंबल' नहीं है सुरक्षा

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लालू-राबड़ी की सुरक्षा कटौती पर सियासत तेज़: विपक्ष ने BJP पर साधा निशाना, NDA बोला — 'स्टेटस सिंबल' नहीं है सुरक्षा

सारांश

लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा हटाए जाने पर बिहार में सियासत गरमा गई है। विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन ने BJP सरकार पर विपक्ष को दबाने का आरोप लगाया, जबकि NDA ने कहा कि सुरक्षा कवर कोई स्टेटस सिंबल नहीं — यह सरकारी मानदंडों पर आधारित प्रक्रिया है।

मुख्य बातें

राबड़ी देवी और लालू प्रसाद यादव की सरकारी सुरक्षा में 6 जून 2026 को कटौती के बाद राजनीतिक विवाद तेज़ हुआ।
विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन ने BJP नेतृत्व वाली बिहार सरकार पर विपक्ष को दबाने का आरोप लगाया।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा — सुरक्षा 'स्टेटस सिंबल' नहीं, सरकारी नियमों पर आधारित है।
बिहार BJP अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा — पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते सरकार सुरक्षा देने को तैयार है।
JDU प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने इसे 'जानबूझकर मतभेद पैदा करने की कोशिश' बताया।

बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की नेता और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी तथा पार्टी प्रमुख लालू प्रसाद यादव की सरकारी सुरक्षा में कटौती के बाद 6 जून 2026 को राजनीतिक विवाद तेज़ हो गया। विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन के नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली बिहार सरकार पर विपक्ष को दबाने का आरोप लगाया, जबकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा कवर कोई 'स्टेटस सिंबल' नहीं है और इसके लिए सरकारी मानदंड तय हैं।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने बिहार सरकार पर असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'मैं तेजस्वी यादव से भी आग्रह करूंगा कि यह बहस का मुद्दा नहीं है, आप एक मज़बूत समाज के नेता हैं। सरकार हमेशा विपक्ष को निशाना बनाती है। उसके पास कोई और मुद्दा नहीं है।'

कांग्रेस नेता आरिफ नसीम खान ने इस मामले को 'दुर्भाग्यपूर्ण' और 'निंदनीय' करार दिया। उनके अनुसार, 'जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी, चाहे केंद्र सरकार के स्तर पर हो या राज्य स्तर पर, विपक्षी नेताओं को दबाने और डराने की कोशिश कर रही है, वह बेहद चिंताजनक है। यह देश के लोकतंत्र को धीरे-धीरे कमज़ोर कर रहा है।' उन्होंने यह भी कहा कि जिन नेताओं को सुरक्षा की आवश्यकता होती है, उन्हें उचित सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए।

NDA और सरकार का पक्ष

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि सुरक्षा के लिए सरकारी नियम निर्धारित हैं और जो उन नियमों के दायरे में आते हैं, उन्हें सुरक्षा दी जाती है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि अगर यह 'स्टेटस सिंबल' के लिए है, तो लालू प्रसाद यादव को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से सीधे अनुरोध करना चाहिए।

बिहार BJP अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि सरकार राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते उन्हें सुरक्षा देने को तैयार है, भले ही कथित तौर पर उन्होंने खुद सुरक्षा लेने से इनकार किया हो।

सहयोगी दलों की राय

राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख और सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि बिहार सरकार ने कुछ ज़रूरी कदम उठाए थे और उसी के जवाब में राबड़ी देवी और लालू प्रसाद यादव ने अपनी सुरक्षा छोड़ी।

जनता दल (यूनाइटेड) के प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने इसे 'जानबूझकर मतभेद पैदा करने की कोशिश' बताया। उनके अनुसार सुरक्षा तय करने की एक सरकारी प्रक्रिया है और उसका सम्मान किया जाना चाहिए।

आम जनता और लोकतंत्र पर असर

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब बिहार में 2025 के विधानसभा चुनावों के बाद से विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तनाव बना हुआ है। आलोचकों का कहना है कि विपक्षी नेताओं की सुरक्षा में कटौती राजनीतिक दबाव का एक उपकरण बन सकती है, जबकि सरकार का तर्क है कि सुरक्षा आवंटन खतरे के मूल्यांकन पर आधारित होता है, न कि राजनीतिक पद पर।

आगे क्या

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी राज्य में विपक्षी नेताओं की सुरक्षा को लेकर सियासत गरमाई हो। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा समीक्षा की प्रक्रिया पारदर्शी और खतरे के आकलन पर आधारित होनी चाहिए। फिलहाल यह मामला राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है और आने वाले दिनों में विधानसभा या संसद में भी इसे उठाए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी जड़ें गहरी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में हैं। बिहार में सत्तारूढ़ NDA और विपक्षी RJD के बीच यह तनाव नया नहीं है, पर सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषय को राजनीतिक हथियार बनाना लोकतांत्रिक मर्यादाओं पर सवाल खड़े करता है। मुख्यधारा की कवरेज इस बात को अक्सर नज़रअंदाज़ करती है कि खतरे के आकलन की प्रक्रिया पारदर्शी न हो तो वह किसी भी सरकार के लिए राजनीतिक विरोधियों को असहज करने का सुविधाजनक साधन बन सकती है। ज़रूरत इस बात की है कि सुरक्षा समीक्षा के लिए एक स्वतंत्र और निष्पक्ष तंत्र हो जो राजनीतिक रंग से परे हो।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा क्यों हटाई गई?
बिहार सरकार के अनुसार सुरक्षा आवंटन सरकारी नियमों और खतरे के मूल्यांकन पर आधारित होता है। NDA नेताओं का कहना है कि लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी उन मानदंडों को पूरा नहीं करते, इसलिए सुरक्षा में बदलाव किया गया।
विपक्ष ने इस मामले पर क्या कहा?
कांग्रेस नेता आरिफ नसीम खान ने इसे 'दुर्भाग्यपूर्ण' और लोकतंत्र को कमज़ोर करने वाला कदम बताया। पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने कहा कि BJP सरकार असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे विवाद खड़े करती है।
BJP और NDA का इस विवाद पर क्या रुख है?
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा कोई 'स्टेटस सिंबल' नहीं है और इसके लिए नियम तय हैं। बिहार BJP अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि सरकार पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते सुरक्षा देने को तैयार है।
JDU और NDA के सहयोगी दलों ने क्या कहा?
JDU प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने इसे जानबूझकर मतभेद पैदा करने की कोशिश बताया और कहा कि सुरक्षा तय करने की प्रक्रिया का सम्मान होना चाहिए। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि सरकार के कदमों के जवाब में लालू-राबड़ी ने खुद सुरक्षा छोड़ी।
क्या यह पहली बार है जब विपक्षी नेताओं की सुरक्षा को लेकर विवाद हुआ है?
नहीं, देश के कई राज्यों में इससे पहले भी विपक्षी नेताओं की सुरक्षा में बदलाव राजनीतिक विवाद का विषय बन चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि खतरे के आकलन की प्रक्रिया पारदर्शी और राजनीतिक प्रभाव से मुक्त होनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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