जमुई छेड़छाड़ कांड पर प्रशांत किशोर का सम्राट चौधरी पर तीखा हमला — 'यह कैसा मंगल राज'
सारांश
मुख्य बातें
जन सुराज पार्टी के संस्थापक और विधायक प्रशांत किशोर ने 22 सितंबर 2026 को बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़ की घटना पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि जो सरकार 'जंगल राज' खत्म करने का दावा करती थी, उसके कार्यकाल में लड़कियों के साथ खुलेआम छेड़छाड़ क्यों हो रही है।
घटनाक्रम और आरोपी की स्थिति
प्रशांत किशोर ने कहा कि नाबालिग आरोपी को गिरफ्तार कर जुवेनाइल कोर्ट में पेश किया जाएगा, जिसके बाद उसे रिहा कर दिया जाएगा। उन्होंने इसे व्यवस्था की एक बड़ी विफलता बताया। उनके अनुसार, 'किस्मत भी एक कारक होती है' और जब अपराधी नाबालिग होने का दावा कर छूट जाते हैं, तो पीड़ित को न्याय नहीं मिल पाता।
छह महीनों में 20 घटनाएँ — प्रशांत का आरोप
प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि पिछले छह महीनों में ऐसी कम से कम 20 घटनाएँ घटी हैं। उन्होंने बेगूसराय की घटना का हवाला दिया, जिसमें कथित तौर पर एक लड़की को रात में उसके पिता के सामने होटल से खींचकर बाहर निकालने की कोशिश की गई थी। उन्होंने रोशन यादव, बंटी यादव और अन्य की हत्याओं का उल्लेख करते हुए कहा, 'अगर यह छिटपुट घटना है तो गंभीर घटना क्या है?'
सरकार और समाज पर सवाल
प्रशांत किशोर ने कहा कि घटना तीन-चार दिन पहले हुई थी, फिर भी सरकार, पुलिस और समाज को इसकी भनक तक नहीं लगी। उन्होंने कहा कि यदि अपराधियों ने खुद वीडियो रिकॉर्ड करके जारी न किया होता, तो यह मामला सामने ही नहीं आता। उनके अनुसार, यह इस बात का प्रमाण है कि 'समाज से सरकार का डर पूरी तरह खत्म हो गया है।'
मुख्यमंत्री और बिहार के मंत्री पर निशाना
बिहार के मंत्री श्रवण कुमार के बयान पर टिप्पणी करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि यह उनकी मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी रोज इस्तीफे की बात करते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत उनके दावों से उलट है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट माँगने वाले नेताओं से पूछा कि पीड़ित बच्ची के बारे में पीएम क्या कहेंगे।
आगे क्या होगा
प्रशांत किशोर ने कहा कि जो लोग 20 वर्षों से 'जंगल राज' का डर दिखाकर सत्ता में रहे, उन्हें अब यह बताना होगा कि यह कैसा 'मंगल राज' है। उन्होंने बिहार की जनता से अपील की कि वे अपराधियों को वोट देकर मज़बूत न करें, क्योंकि अपराध और अपराधियों को संरक्षण देने पर अपराध-मुक्त समाज की कल्पना नहीं की जा सकती। यह मामला आगामी दिनों में राजनीतिक रूप से और तूल पकड़ने की संभावना है।