दिग्विजय सिंह का बड़ा बयान: 'हिंदुत्व सनातन धर्म नहीं', सावरकर का दिया हवाला
सारांश
मुख्य बातें
वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने 6 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि 'हिंदुत्व' और 'सनातन धर्म' दो अलग-अलग अवधारणाएँ हैं। उन्होंने दिवंगत वीर सावरकर का हवाला देते हुए कहा कि स्वयं सावरकर ने माना था कि हिंदुत्व का धर्म से कोई सीधा संबंध नहीं है। यह बयान गुरुवार को उनके उस विवादास्पद वक्तव्य के एक दिन बाद आया, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) पर हिंदुत्व की आड़ में घृणा फैलाने का आरोप लगाया था।
विवाद की पृष्ठभूमि
गुरुवार को दिग्विजय सिंह ने कहा था कि नफ़रत फैलाना हिंदुत्व है, जिसका पालन RSS और VHP करते हैं — ये दोनों संगठन वीर सावरकर को अपना वैचारिक नेता मानते हैं। इस बयान ने राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया जन्म दी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया।
गौरतलब है कि 'सनातन धर्म' बनाम 'हिंदुत्व' की यह बहस भारतीय राजनीति में पिछले कुछ वर्षों से लगातार उठती रही है। DMK नेताओं के बयानों के बाद से यह विमर्श और तेज़ हुआ है।
दिग्विजय सिंह के मुख्य तर्क
दिग्विजय सिंह ने शुक्रवार को सवाल उठाया कि क्या BJP, VHP और RSS वास्तव में सनातन धर्म में विश्वास रखते हैं। उनका तर्क था कि 'हिंदुत्व' शब्द का प्रथम प्रयोग स्वयं वीर सावरकर ने किया था और सावरकर ने यह भी कहा था कि हिंदुत्व का धर्म से कोई नाता नहीं है।
उन्होंने कहा, 'हमारा धर्म सनातन धर्म है, जो इस देश में हज़ारों वर्षों से विद्यमान है। जब भी कोई धार्मिक आयोजन होता है, हम नारा लगाते हैं — धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, सभी प्राणियों में सद्भाव हो और संसार समृद्ध हो।' उन्होंने कहा कि यही सनातन धर्म की असली भावना है।
BJP और RSS पर आरोप
दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि RSS और VHP जैसे संगठन घृणा को बढ़ावा देने वाली विचारधारा का अनुसरण करते हैं, जिसका सनातन धर्म के व्यापक दर्शन से कोई संबंध नहीं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके द्वारा यह मुद्दा उठाने के बाद ही BJP ने सनातन धर्म की चर्चा शुरू की।
उन्होंने कहा कि BJP की वैचारिक जड़ें सनातन धर्म के बजाय हिंदुत्व में हैं और हिंदुत्व घृणा फैलाता है, हिंदू धर्म नहीं।
सनातन धर्म की दिग्विजय की परिभाषा
दिग्विजय सिंह ने सनातन धर्म को सभी धर्मों के प्रति सम्मान और विश्व कल्याण की भावना से जोड़ा। उनके अनुसार सनातन धर्म समावेशी और सार्वभौमिक है, जबकि हिंदुत्व एक राजनीतिक विचारधारा के रूप में कार्य करता है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में धार्मिक पहचान और राजनीतिक विचारधारा को लेकर बहस तेज़ हो रही है। आगे संभावना है कि BJP इस पर तीखी प्रतिक्रिया दे और यह विवाद संसद के शीतकालीन सत्र में भी गूँज सकता है।