दिग्विजय सिंह के 'हिंदुत्व' बयान पर मंत्री विश्वास सारंग का पलटवार, बोले- 'सनातन यात्रा' है विखंडन की यात्रा
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने 5 नवंबर 2026 को भोपाल में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के 'हिंदुत्व' संबंधी बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की और उन पर समाज को बाँटने की राजनीति करने का सीधा आरोप लगाया। सारंग ने दिग्विजय सिंह की 'सनातन यात्रा' को 'विखंडन की यात्रा' करार देते हुए कहा कि यह हिंदू धर्म और सनातन विचारधारा को बदनाम करने का प्रयास है।
विवाद की जड़: दिग्विजय सिंह का बयान
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने मध्य प्रदेश के गुना दौरे के दौरान मीडिया से बातचीत में कहा था कि सनातन धर्म सभी धर्मों का सम्मान करता है और पूरे विश्व के कल्याण की बात करता है। इससे पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने दावा किया था कि वे सनातन धर्म में विश्वास रखते हैं, परंतु सनातन धर्म और हिंदू धर्म को वे अलग मानते हैं।
दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा था कि 'हिंदुइज्म' शब्द को विनायक दामोदर सावरकर ने प्रचलित किया और 'हिंदू धर्म का समानता से कोई संबंध नहीं है।' उन्होंने पवित्र कुरान का भी उल्लेख करते हुए 'काफ़िर' शब्द को लेकर अपनी व्याख्या प्रस्तुत की थी। सनातन धर्म की परिभाषा बताते हुए उन्होंने कहा था कि उनकी माँ ने उन्हें सिखाया था कि यह धर्म प्रेम, स्नेह और करुणा का प्रतीक है।
मंत्री सारंग की तीखी प्रतिक्रिया
इस बयान पर पलटवार करते हुए मंत्री विश्वास सारंग ने कहा, 'दिग्विजय सिंह की सनातन यात्रा विखंडन की यात्रा है। यह हिंदू धर्म और सनातन विचारधारा को बदनाम करने की यात्रा है।' सारंग ने आगे कहा, 'जो व्यक्ति जाकिर नाइक जैसे राष्ट्रविरोधी और हिंदू विरोधी व्यक्ति का महिमामंडन करता है, क्या वह हमें हिंदुत्व की परिभाषा सिखाएगा? क्या वह हमें सनातन का पाठ पढ़ाएगा?'
सारंग ने यह भी आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह ने कहा कि हिंदू नफ़रत फैलाते हैं और समाज को बाँटते हैं। उन्होंने कहा, 'क्या वह केवल अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेंकने के लिए इतना नीचे गिर जाएँगे? यह बेहद आपत्तिजनक है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।'
शाइना एनसी का हमला: 'छद्म धर्मनिरपेक्षता की राजनीति'
शिवसेना नेता शाइना एनसी ने भी इस विवाद में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'दिग्विजय सिंह खुद स्वीकार करते हैं कि वे सनातन धर्म को मानते हैं। कांग्रेस पार्टी छद्म धर्मनिरपेक्षता की राजनीति करती है। यह सब वोटों के लिए किया जाता है और लोगों को खुश करने की कोशिश जारी रहती है।'
शाइना एनसी ने यह भी कहा कि दिग्विजय सिंह के पुराने बयानों को देखने पर उनके विचारों में मौजूद विरोधाभास और भ्रम को आसानी से समझा जा सकता है।
पुराने विवादों का संदर्भ
गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह अपने सनातन धर्म संबंधी बयानों को लेकर पहले भी विवादों में रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश में धार्मिक-राजनीतिक बयानबाज़ी का माहौल गर्म है और भारतीय जनता पार्टी (BJP) तथा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) दोनों ही 'हिंदुत्व' बनाम 'सनातन' की परिभाषा को लेकर आमने-सामने हैं। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान और पलटवार चुनावी दृष्टि से संवेदनशील राज्यों में सामाजिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देते हैं।
आगे क्या होगा
फिलहाल दिग्विजय सिंह की ओर से मंत्री सारंग के आरोपों पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है। यह विवाद मध्य प्रदेश की राजनीति में धर्म और पहचान के सवालों को एक बार फिर केंद्र में ले आया है, और आने वाले दिनों में इस पर बयानबाज़ी जारी रहने की संभावना है।