दिग्विजय सिंह की 'सनातन स्वाभिमान यात्रा' पर BJP का पलटवार, राकेश सिंह बोले — चुनावी स्वार्थ है असली मकसद
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने 6 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की प्रस्तावित सनातन स्वाभिमान यात्रा पर कड़ा प्रहार किया और इसे सत्ता-प्राप्ति की कोशिश करार दिया। दिग्विजय सिंह 20 अक्टूबर को महाकाल (उज्जैन) से अयोध्या तक की यह यात्रा प्रारंभ करने वाले हैं, जिसे वे पूरी तरह अराजनीतिक बता रहे हैं।
राकेश सिंह का आरोप: चुनाव नजदीक आते ही जागी धार्मिक चेतना
मंत्री राकेश सिंह ने सवाल उठाया कि जब अयोध्या का मुद्दा सबसे संवेदनशील दौर में था और देश में कांग्रेस की सरकार थी, तब दिग्विजय सिंह ने सनातन धर्म की रक्षा के लिए कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया? उन्होंने कहा, 'अब चुनाव नजदीक हैं और अचानक सनातन स्वाभिमान याद आ गया। आपकी यह पदयात्रा किसी धर्म की रक्षा के लिए नहीं, बल्कि सत्ता पाने के लिए है।'
राकेश सिंह ने यह भी जोड़ा कि जनता बहुत बुद्धिमान है और वह देखती है कि किसने क्या किया। उन्होंने राम मंदिर निर्माण का उल्लेख करते हुए कहा कि मोदी सरकार में रामलला विराजमान हो चुके हैं, यह सबसे बड़ा सत्य है।
दिग्विजय सिंह का पक्ष: 'धर्म के नाम पर अधर्म के विरुद्ध जनजागरण'
दिग्विजय सिंह ने अपनी यात्रा का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए कहा कि सनातन स्वाभिमान यात्रा 'धर्म के नाम पर अधर्म के विरुद्ध जनजागरण' है। उन्होंने कहा, 'मैं 20 अक्टूबर को महाकाल से यह प्रार्थना करके अयोध्या के लिए प्रस्थान करूंगा कि वे मुझे वह शक्ति दें जिससे देश में धर्म के नाम पर मची लूट और आस्था के साथ हो रहे खिलवाड़ को रोकें।'
उन्होंने आगे बताया कि वे ओरछा में रामराजा और अयोध्या में रामलला से प्रार्थना करेंगे कि श्रद्धालुओं की आस्था की रक्षा हो और 'इस महाचोरी में शामिल लोगों को दण्डित किया जाए।' यात्रा का ध्येय वाक्य 'यतो धर्मस्ततो जयः' रखा गया है।
यात्रा की प्रकृति पर विवाद
दिग्विजय सिंह ने इस यात्रा को अराजनीतिक बताते हुए हर वर्ग, पंथ और विचारधारा के लोगों को आमंत्रित किया है। हालाँकि सूत्रों के अनुसार इस यात्रा में बड़ी संख्या में राजनीतिक व्यक्तित्व भी शामिल होंगे, जिससे इसकी 'अराजनीतिक' छवि पर प्रश्नचिह्न लग रहा है।
गौरतलब है कि यह यात्रा ऐसे समय में आई है जब मध्य प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मियाँ तेज हैं और सभी दल अपनी-अपनी रणनीति पर काम कर रहे हैं।
आगे क्या होगा
यात्रा की तैयारियाँ जोरों पर चल रही हैं और 20 अक्टूबर को उज्जैन से इसका आगाज़ होना तय बताया जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता इस यात्रा पर कड़ी नज़र रखे हुए हैं और विरोधी बयानों का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। यात्रा के राजनीतिक असर का आकलन अयोध्या पहुँचने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।