16 अक्टूबर 2026
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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दिग्विजय सिंह की 'सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा' को दिया समर्थन, 20 अक्टूबर से उज्जैन से होगी शुरुआत

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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दिग्विजय सिंह की 'सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा' को दिया समर्थन, 20 अक्टूबर से उज्जैन से होगी शुरुआत

सारांश

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की 'सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा' को ज्योतिर्मठ के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का समर्थन मिला है। यह पदयात्रा 20 अक्टूबर को विजयदशमी पर उज्जैन से शुरू होकर अयोध्या तक जाएगी — धर्म के नाम पर अधर्म और मंदिरों में अनियमितताओं के विरुद्ध जन जागरण के संकल्प के साथ।

मुख्य बातें

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की 'सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा' को आधिकारिक समर्थन पत्र जारी कर समर्थन दिया।
पदयात्रा 20 अक्टूबर 2026 को विजयदशमी पर उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर से प्रारंभ होकर अयोध्या के श्री राम मंदिर तक जाएगी।
यात्रा का उद्देश्य धर्म के नाम पर हो रहे अधर्म और राम मंदिर में चढ़ावा चोरी जैसी कथित अनियमितताओं के विरुद्ध जनजागरण करना है।
ज्योतिर्मठ बदरिकाश्रम हिमालय की ओर से भी यात्रा के लिए शुभकामना संदेश जारी किया गया।
16 अक्टूबर को दिग्विजय सिंह ने स्वामी का समर्थन पत्र सार्वजनिक किया।

ज्योतिर्मठ बदरिकाश्रम के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कांग्रेस नेता एवं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की प्रस्तावित 'सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा' को अपना समर्थन दिया है। यह पदयात्रा 20 अक्टूबर 2026 को विजयदशमी के पर्व पर उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर से प्रारंभ होकर अयोध्या के श्री राम मंदिर तक जाएगी। 16 अक्टूबर को दिग्विजय सिंह ने स्वामी की ओर से प्राप्त समर्थन पत्र को सार्वजनिक किया।

यात्रा का उद्देश्य और पृष्ठभूमि

दिग्विजय सिंह की इस पदयात्रा का केंद्रीय उद्देश्य धर्म के आवरण में हो रहे अधर्म और देव स्थानों में व्याप्त अनियमितताओं के प्रति जन जागरण करना बताया गया है। यात्रा के माध्यम से श्री राम मंदिर, अयोध्या में चढ़ावे की कथित चोरी जैसे मुद्दों को भी उठाया जाएगा। गौरतलब है कि यह यात्रा ऐसे समय में आई है जब धार्मिक स्थलों में पारदर्शिता को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हुई है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का समर्थन पत्र

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपने पत्र में लिखा, "दिग्विजय सिंह की ओर से महाकाल धाम (उज्जैन) से श्रीराम धाम (अयोध्या) तक आयोजित यह पदयात्रा इसी सनातन तत्त्व और धर्म स्वाभिमान के जागरण का एक आवश्यक और सामयिक सत्प्रयास है। धर्म के नाम पर हो रहे किसी भी प्रकार के अधर्म और देव स्थानों की पवित्रता व व्यवस्था में व्याप्त दोषों के प्रति जन सामान्य को सचेत करना व उन्हें सनातन के वास्तविक व पवित्र स्वरूप से परिचित कराना प्रशंसनीय और आवश्यक कार्य है।"

उन्होंने आगे लिखा, "भगवान श्री महाकालेश्वर जी और मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीरामचंद्रजी महाराज की अनुकंपा से दिग्विजय सिंह व उनके सभी सहयात्रियों की यह यात्रा निर्विघ्न सम्पन्न हो, पथ में जन जन का उत्साहवर्द्धन हो और सनातन धर्म के वास्तविक स्वरूप की विजय हो — ऐसी हमारी मंगलकामना है।"

ज्योतिर्मठ बदरिकाश्रम का संदेश

ज्योतिर्मठ बदरिकाश्रम हिमालय की ओर से जारी संदेश में कहा गया कि दिग्विजय सिंह अपने अनेक साथियों के साथ धर्म के नाम पर हो रहे अधर्म और श्री राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के विरुद्ध जनजागरण के लिए 20 अक्टूबर से यह पदयात्रा करने जा रहे हैं।

संदेश में सनातन धर्म की व्याख्या करते हुए कहा गया, "सनातन वह नित्य, शाश्वत और अपौरुषेय धर्म तत्त्व है, जो किसी काल, देश और व्यक्ति विशेष से सीमित नहीं है। सत्य, अहिंसा, पवित्रता, नीति, और देवालयों की मर्यादा ही सनातन का वास्तविक स्वरूप हैं।"

धर्म और स्वाभिमान का समन्वय

ज्योतिर्मठ के संदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि जब धर्म के आवरण में अधर्म, अनाचार और देव स्थानों पर अर्पित सामग्री का अपहरण होने लगे, तब उसके विरुद्ध आवाज़ उठाना ही वास्तविक धर्म स्वाभिमान है। संदेश में कहा गया कि "बिना स्वाभिमान के सनातन धर्म का आचरण क्षीण हो जाता है, और बिना सनातन (सत्य नीति) के स्वाभिमान दिग्भ्रमित हो सकता है।"

राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ

यह यात्रा ऐसे समय में शुरू हो रही है जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) शासित राज्यों में धार्मिक न्यासों और मंदिर प्रशासन की पारदर्शिता पर विपक्ष सवाल उठा रहा है। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की इस पहल को पार्टी की ओर से धार्मिक मुद्दों पर नई राजनीतिक रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। यात्रा का समापन कब और किस रूप में होगा, इसका विस्तृत कार्यक्रम अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह BJP और RSS के निकट माने जाने वाले ट्रस्ट के अधीन है — इसलिए यात्रा का स्वर धार्मिक होते हुए भी उसका निशाना स्पष्ट रूप से राजनीतिक है। मुख्यधारा की कवरेज इस यात्रा को केवल 'धार्मिक जागरण' के रूप में प्रस्तुत कर सकती है, लेकिन इसका समय — मध्य प्रदेश में BJP सरकार और उत्तर प्रदेश में 2027 चुनाव की आहट के बीच — इसे एक सुनियोजित राजनीतिक कदम भी बनाता है।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा' क्या है?
यह कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह द्वारा आयोजित एक पदयात्रा है, जो 20 अक्टूबर 2026 को उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर से प्रारंभ होकर अयोध्या के श्री राम मंदिर तक जाएगी। इसका उद्देश्य धर्म के नाम पर हो रहे अधर्म और मंदिरों में कथित अनियमितताओं के विरुद्ध जन जागरण करना है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस यात्रा को क्यों समर्थन दिया?
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि धर्म के नाम पर हो रहे अधर्म और देव स्थानों में व्याप्त दोषों के विरुद्ध आवाज़ उठाना सनातन धर्म के वास्तविक स्वरूप की रक्षा के लिए आवश्यक है। उन्होंने इसे 'सनातन तत्त्व और धर्म स्वाभिमान के जागरण का सामयिक सत्प्रयास' बताया।
यह पदयात्रा कब और कहाँ से शुरू होगी?
यह पदयात्रा 20 अक्टूबर 2026 को विजयदशमी के अवसर पर उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर से शुरू होगी और समापन अयोध्या के श्री राम मंदिर में होगा।
ज्योतिर्मठ बदरिकाश्रम का इस यात्रा से क्या संबंध है?
ज्योतिर्मठ बदरिकाश्रम हिमालय की ओर से भी यात्रा के समर्थन में एक संदेश जारी किया गया है। संदेश में दिग्विजय सिंह और उनके सहयात्रियों को शुभकामनाएँ देते हुए सनातन धर्म में सत्य और शुचिता की पुनर्स्थापना पर ज़ोर दिया गया।
इस यात्रा का राजनीतिक महत्व क्या है?
यह यात्रा कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह द्वारा आयोजित है और इसे धार्मिक स्थलों में पारदर्शिता तथा प्रबंधन सुधार के राजनीतिक मुद्दे से जोड़कर देखा जा रहा है। इसे राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर विपक्ष के सवालों के संदर्भ में भी देखा जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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