दिग्विजय सिंह 20 अक्टूबर से उज्जैन-अयोध्या 'सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा': 930 किमी, मंदिर दान में पारदर्शिता की माँग
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी के अवसर पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से लगभग 930 किलोमीटर लंबी 'सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा' का आगाज़ करेंगे, जो अयोध्या के श्रीराम मंदिर पर जाकर सम्पन्न होगी। 7 अक्टूबर 2026 को भोपाल में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने यात्रा के उद्देश्यों और मार्ग की विस्तृत जानकारी दी।
यात्रा का मार्ग और धार्मिक महत्व
यह यात्रा उज्जैन से शुरू होकर शाजापुर, सारंगपुर, राजगढ़, चाचौड़ा, आरोन, अशोकनगर, चंदेरी और ओरछा से गुज़रेगी। इसके बाद यह उत्तर प्रदेश में प्रवेश करते हुए उरई, कालपी, कानपुर देहात, लखनऊ देहात और बाराबंकी होते हुए अयोध्या पहुँचेगी। यह यात्रा महाकालेश्वर मंदिर (उज्जैन), रामराजा सरकार मंदिर (ओरछा) और श्रीराम मंदिर (अयोध्या) — तीन प्रमुख धार्मिक केंद्रों — को एक सूत्र में पिरोएगी।
यात्रा तिरंगे और पाँच रंगों वाले धर्मध्वज के साथ 'यतो धर्मस्ततो जयः' (जहाँ धर्म है, वहीं विजय है) के संदेश को लेकर चलेगी। दिग्विजय सिंह ने कहा कि धर्मध्वज उन मूल्यों का प्रतीक होगा जिन्हें वे सनातन धर्म से जोड़ते हैं, जबकि तिरंगा राष्ट्रीय एकता का प्रतीक रहेगा।
मुख्य मुद्दे और माँगें
दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि यात्रा का प्रमुख लक्ष्य प्रमुख हिंदू धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। उनके अनुसार, उज्जैन में महाकाल लोक परियोजना से जुड़ी मूर्तियों की गुणवत्ता तथा भूमि संबंधी कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए जाएँगे। ओरछा में मंदिर के खातों, संपत्तियों, आभूषणों और दान राशि के उपयोग को लेकर जवाबदेही माँगी जाएगी। अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े दान, चढ़ावे, भूमि लेनदेन और व्यय में पारदर्शिता की माँग होगी।
दिग्विजय सिंह ने कहा, 'राम के नाम पर मिला दान केवल राम के कार्यों में और महाकाल के नाम पर मिला धन केवल महाकाल के कार्यों में इस्तेमाल होना चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि श्रद्धालु की आस्था और उसके दान — दोनों की सुरक्षा होनी चाहिए, और यही 'सनातन स्वाभिमान' है।
सनातन धर्म पर दिग्विजय का पक्ष
दिग्विजय सिंह ने यात्रा को विशुद्ध धार्मिक और सामाजिक बताते हुए कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति या धार्मिक अनुष्ठान नहीं है — उसका मूल सत्य, न्याय, सदाचार, करुणा, त्याग और धर्म के मार्ग पर चलने में निहित है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यह यात्रा पूरी तरह शांतिपूर्ण होगी और किसी भी धर्म, संप्रदाय या व्यक्ति के विरोध में नहीं है।
गौरतलब है कि यह यात्रा ऐसे समय में आई है जब कांग्रेस पार्टी हिंदुत्व के एजेंडे पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) से सीधे टकराने की बजाय 'सनातन मूल्यों' की व्यापक व्याख्या प्रस्तुत करने की कोशिश कर रही है।
डिजिटल अभियान और चुनावी सुधार
यात्रा के साथ-साथ दिग्विजय सिंह ने 'चंदा चोरी' और 'वोट चोरी' के मुद्दों पर एक डिजिटल याचिका और मिस्ड कॉल अभियान शुरू करने की भी घोषणा की। उन्होंने कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जाँच और चुनावी सुधारों की माँग करने का भी संकल्प व्यक्त किया।
यह यात्रा कांग्रेस के लिए मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में धार्मिक मतदाताओं तक पहुँचने का एक बड़ा सियासी अवसर भी मानी जा रही है। आने वाले हफ्तों में यात्रा की रूपरेखा और सहभागियों की संख्या इसकी राजनीतिक सफलता का पैमाना तय करेगी।