दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा उज्जैन से रवाना, 930 किमी की पदयात्रा अयोध्या तक
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा का 20 अक्टूबर 2026 को दशहरे के शुभ अवसर पर उज्जैन से भव्य आगाज हुआ। यह पदयात्रा करीब 930 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए अयोध्या में भगवान श्रीराम के धाम तक पहुँचेगी। वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और देशभर से आए सैकड़ों साधु-संतों के जयघोष के बीच इस यात्रा की शुरुआत हुई।
यात्रा का शुभारंभ और धार्मिक अनुष्ठान
यात्रा के प्रारंभ से पूर्व दिग्विजय सिंह ने चिंतामन गणेश मंदिर में भगवान गणेश के दर्शन किए, इसके बाद महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल का आशीर्वाद लिया और हरसिद्धि मंदिर में पूजा-अर्चना की। नृसिंह घाट के समीप बालाजी गार्डन में पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं पूजन अनुष्ठान आयोजित हुआ। भजन और आरती के उपरांत पूरे परिसर में भक्तिमय वातावरण छा गया।
शंकराचार्यों और संतों का समर्थन
यात्रा को व्यापक धार्मिक समर्थन भी मिला है। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने पत्र जारी कर अपना आशीर्वाद और समर्थन दिया। अग्निपीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर ब्रह्मर्षि रामकृष्णानंद ने भी यात्रा का समर्थन किया। अयोध्या के संत एवं राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे संतोष दुबे ने भी इस पहल के प्रति अपना समर्थन जताया है।
यात्रा के प्रमुख मुद्दे
दिग्विजय सिंह ने इस यात्रा के माध्यम से सनातन धर्म के मूल्यों, सत्य और पारदर्शिता का संदेश जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लिया है। यात्रा के प्रमुख मुद्दों में धार्मिक स्थलों पर चढ़ावे और दान की व्यवस्था में पारदर्शिता, चंदा चोरी के मामलों की निष्पक्ष जाँच और वोट चोरी के मुद्दे पर जनजागरण शामिल हैं। गौरतलब है कि यह यात्रा धार्मिक आस्था के साथ-साथ सत्य, न्याय और जवाबदेही के सवालों को भी समाज के बीच ले जाने की एक राजनीतिक-सामाजिक पहल बताई जा रही है।
यात्रा का स्वरूप और मार्ग
यात्रा में सबसे आगे साधु-संतों का जत्था चल रहा है, जिसके पीछे दिग्विजय सिंह और उनके समर्थक हैं। उज्जैन से निकलकर यह पदयात्रा 930 किलोमीटर का लंबा सफर तय करते हुए अयोध्या पहुँचेगी। यह ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस धार्मिक मुद्दों पर अपनी पहुँच बढ़ाने की कोशिश में जुटी है।
आगे क्या
यात्रा के अयोध्या पहुँचने पर भगवान श्रीराम के धाम में धार्मिक आयोजन प्रस्तावित बताए जा रहे हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नज़र इस यात्रा पर बनी रहेगी, क्योंकि यह मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश दोनों में धार्मिक मतदाताओं तक कांग्रेस की पहुँच का एक प्रयोग भी मानी जा रही है।