23 अक्टूबर 2026
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दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा का चौथा दिन: तिरंगे को सलामी, तराना से देवाखेड़ा रवाना

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दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा का चौथा दिन: तिरंगे को सलामी, तराना से देवाखेड़ा रवाना

सारांश

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की उज्जैन से अयोध्या तक 930 किमी लंबी सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा के चौथे दिन उन्होंने तिरंगे को सलामी दी और तराना से देवाखेड़ा के लिए कूच किया — मंदिर पारदर्शिता और बैलेट पेपर की माँग के साथ।

मुख्य बातें

दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा 23 अक्टूबर 2026 को चौथे दिन में प्रवेश कर गई।
उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को सलामी देकर और श्रीरामलला सरकार की आरती कर यात्रा आरंभ की।
चौथे दिन का पड़ाव तराना से देवाखेड़ा रहा; यात्रा कुल 930 किलोमीटर लंबी है।
यात्रा 20 अक्टूबर 2026 को उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर से विजयादशमी पर शुरू हुई।
ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव और मंदिरों में चढ़ावे की पारदर्शिता प्रमुख माँगें हैं।
यात्रा ओरछा के रामराजा सरकार मंदिर होते हुए अयोध्या पहुँचेगी।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की उज्जैन से अयोध्या तक की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा 23 अक्टूबर 2026 को अपने चौथे दिन में प्रवेश कर गई। उन्होंने यात्रा के इस पड़ाव की शुरुआत राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को ससम्मान सलामी अर्पित कर और धर्मरथ में विराजमान प्रभु श्रीरामलला सरकार की विधिवत आरती कर की। पवित्र नदियों के जल से सुशोभित कलशों की पूजा के बाद वे तराना से देवाखेड़ा के लिए रवाना हुए।

यात्रा का मार्ग और उद्देश्य

विजयादशमी के पावन अवसर पर 20 अक्टूबर 2026 को उज्जैन के प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर से आरंभ हुई यह पदयात्रा करीब 930 किलोमीटर लंबी है। यात्रा उज्जैन से ओरछा स्थित रामराजा सरकार मंदिर होते हुए अंततः अयोध्या पहुँचेगी। पहले दिन से ही बड़ी संख्या में साधु-संत और श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल हो रहे हैं।

दिग्विजय सिंह के अनुसार, यह पदयात्रा राष्ट्रप्रेम, सनातन धर्म के प्रति अटूट आस्था और सत्य के दृढ़ संकल्प को समर्पित है। उन्होंने कहा, 'हमारा संकल्प अटल है, हमारे कदम अविराम हैं।'

मुख्य मुद्दे: चंदा चोरी और वोट चोरी

यात्रा के दौरान दिग्विजय सिंह ने दो प्रमुख मुद्दे उठाए हैं — धार्मिक संस्थाओं में पारदर्शिता और चुनावी प्रक्रिया में सुधार। उन्होंने मंदिरों में श्रद्धालुओं के दान एवं चढ़ावे की व्यवस्था में अनियमितताओं की जाँच और जवाबदेही तय करने की माँग उठाई है।

इसके साथ ही उन्होंने कथित तौर पर ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने की माँग दोहराई और कहा कि चंदा चोरी करने वालों को पकड़कर जेल भेजा जाना चाहिए। लोकतंत्र में मताधिकार की रक्षा का मुद्दा भी इस यात्रा के केंद्र में है।

सनातन परंपरा और जनसंवाद

साधु-संतों और समर्थकों के साथ पैदल चलते हुए दिग्विजय सिंह सनातन परंपरा, धार्मिक स्थलों में पारदर्शिता और मताधिकार की रक्षा का संदेश जन-जन तक पहुँचा रहे हैं। उनका कहना है कि धर्म और आस्था से जुड़ी संस्थाओं में लोगों के विश्वास को बनाए रखने के लिए पारदर्शिता और ईमानदारी अनिवार्य है।

गौरतलब है कि यह यात्रा ऐसे समय में आई है जब मध्य प्रदेश में कांग्रेस विपक्ष में है और पार्टी हिंदू धार्मिक मुद्दों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश में है।

आगे का कार्यक्रम

यात्रा तराना-देवाखेड़ा पड़ाव के बाद अगले चरणों में आगे बढ़ते हुए ओरछा और फिर अयोध्या की ओर जारी रहेगी। लगभग 930 किलोमीटर की इस पदयात्रा के रूट पर हर पड़ाव पर धार्मिक आयोजन और जनसभाएँ प्रस्तावित बताई जा रही हैं। दिग्विजय सिंह की यह यात्रा मध्य प्रदेश की राजनीतिक एवं धार्मिक चर्चाओं में केंद्रीय स्थान बनाती दिख रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि कांग्रेस की उस रणनीतिक कोशिश का हिस्सा है जिसके तहत पार्टी मध्य प्रदेश में हिंदू धार्मिक प्रतीकों और भावनाओं से जुड़ने की कोशिश कर रही है। उज्जैन के महाकालेश्वर से अयोध्या तक का मार्ग — विजयादशमी पर आरंभ — प्रतीकात्मकता में किसी से कम नहीं है। हालाँकि, ईवीएम विरोध और मंदिर पारदर्शिता जैसे मुद्दों को धार्मिक यात्रा के आवरण में उठाना एक दिलचस्प राजनीतिक कदम है — जो दर्शाता है कि विपक्षी दल धर्म और लोकतंत्र को एक साथ साधने की कोशिश में हैं। सवाल यह है कि क्या यह 'सॉफ्ट हिंदुत्व' की राह पार्टी के भीतर और बाहर एकमत से स्वीकार्य होगी।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा क्या है?
यह कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की उज्जैन से अयोध्या तक की करीब 930 किलोमीटर लंबी पदयात्रा है, जो 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी के अवसर पर उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर से शुरू हुई। इसका उद्देश्य सनातन धर्म के प्रति आस्था व्यक्त करने के साथ-साथ मंदिरों में पारदर्शिता और मताधिकार की रक्षा जैसे मुद्दे उठाना है।
दिग्विजय सिंह यात्रा के दौरान कौन-से मुद्दे उठा रहे हैं?
दिग्विजय सिंह यात्रा में मुख्यतः दो मुद्दे उठा रहे हैं — पहला, मंदिरों में श्रद्धालुओं के दान और चढ़ावे की व्यवस्था में पारदर्शिता; दूसरा, ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने की माँग। उन्होंने कहा है कि चंदा चोरी करने वालों को जेल भेजा जाना चाहिए।
यात्रा का पूरा मार्ग क्या है?
यात्रा उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर से शुरू होकर ओरछा स्थित रामराजा सरकार मंदिर होते हुए अयोध्या पहुँचेगी। कुल दूरी करीब 930 किलोमीटर है और यात्रा पदयात्रा के रूप में की जा रही है।
चौथे दिन दिग्विजय सिंह ने यात्रा कहाँ से शुरू की?
चौथे दिन, 23 अक्टूबर 2026 को, दिग्विजय सिंह ने तराना से देवाखेड़ा के लिए प्रस्थान किया। उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को सलामी अर्पित की और धर्मरथ में विराजमान श्रीरामलला सरकार की आरती कर यात्रा की शुरुआत की।
इस यात्रा में कौन शामिल हो रहे हैं?
यात्रा में पहले दिन से ही बड़ी संख्या में साधु-संत, श्रद्धालु और कांग्रेस समर्थक शामिल हो रहे हैं। दिग्विजय सिंह इन सबके साथ पैदल चलते हुए सनातन परंपरा और सामाजिक मुद्दों पर जनसंवाद कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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