दिग्विजय सिंह की सनातन यात्रा पर विश्वास सारंग का हमला, बच्चियों से नारे लगवाने को बताया मानवाधिकार उल्लंघन
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने 23 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की 'सनातन यात्रा' पर कड़ा प्रहार किया। सारंग ने आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह इस यात्रा के माध्यम से सनातन धर्म को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं और राजनीतिक जुलूस में छोटी बच्चियों से नारे लगवाना उनके मानवाधिकारों का सीधा उल्लंघन है। इस पूरे विवाद के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी किया है।
विश्वास सारंग के आरोप और बयान
मंत्री सारंग ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'निश्चित रूप से इस तरह का कृत्य नहीं होना चाहिए। राजनीतिक कार्यक्रम में बच्चियों को बुलाना, उन पर दबाव बनाकर उन्हें कार्यक्रम में शामिल करना और उनसे नारे लगवाना, यह निश्चित रूप से मानवाधिकारों का हनन है।' उन्होंने NHRC के संज्ञान को उचित ठहराते हुए इस कदम का समर्थन किया।
सारंग ने धार्मिक संदर्भ का हवाला देते हुए कहा, 'नवरात्रि में हम शक्ति की पूजा करते हैं और दशहरे पर रावण रूपी बुराई को जलाने का संकल्प लेते हैं। पूरे हिंदुस्तान में जो भी सनातन को मानता है, वह कन्या पूजन करता है — लेकिन यहाँ कन्याओं पर राजनीतिक नारे लगाने का दबाव बनाया जा रहा है, जो गलत है।'
सनातन यात्रा विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह की 'सनातन यात्रा' के दौरान बच्चों को शामिल करने और उनसे राजनीतिक नारे लगवाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था। इस वीडियो के वायरल होने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया। BJP नेताओं ने इसे कांग्रेस की बाल अधिकारों के प्रति संवेदनहीनता का प्रमाण बताया।
सारंग ने यह भी कहा कि वे पहले से यह कहते आए हैं कि दिग्विजय सिंह सनातन धर्म को बदनाम करने के लिए यह यात्रा कर रहे हैं और अपनी राजनीतिक चमक के लिए इस तरह की यात्रा करने की कोई ज़रूरत नहीं है।
NHRC का संज्ञान और नोटिस
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी किया है। आयोग ने संबंधित अधिकारियों को मामले की निष्पक्ष जाँच कराने और दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
आयोग का स्पष्ट मत है कि राजनीतिक गतिविधियों में बच्चों का इस्तेमाल करना बाल अधिकारों का उल्लंघन है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में बाल श्रम और बच्चों के राजनीतिक दोहन पर संवेदनशीलता बढ़ी है।
कांग्रेस की चुप्पी पर सवाल
मंत्री सारंग ने इस पूरे मामले पर कांग्रेस की चुप्पी को भी निशाने पर लिया। उनके अनुसार, पार्टी नेतृत्व का मौन खुद इस कृत्य को अप्रत्यक्ष स्वीकृति देने जैसा है। आलोचकों का कहना है कि अगर कांग्रेस वाकई बाल अधिकारों की हिमायती है, तो उसे इस मामले में स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए था।
आगे क्या होगा
NHRC के नोटिस के बाद अब मध्य प्रदेश प्रशासन को दो सप्ताह के भीतर जाँच रिपोर्ट सौंपनी होगी। राजनीतिक तनातनी के बीच यह देखना होगा कि कांग्रेस इस आरोप का जवाब किस रूप में देती है और दिग्विजय सिंह की यात्रा का भविष्य क्या रहता है।