₹575 करोड़ के जेट-हेलीकॉप्टर सौदे पर कांग्रेस का हमला, MP सरकार से माँगा पूरा खर्च ब्योरा
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश कांग्रेस ने 23 अक्टूबर 2026 को भोपाल में राज्य की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर ₹575 करोड़ की संयुक्त लागत से एक जेट विमान और एक हेलीकॉप्टर की खरीद को लेकर तीखे सवाल दागे। विपक्ष का आरोप है कि यह खर्च ऐसे समय में किया गया जब राज्य कर्ज के बोझ तले दबा है और सामाजिक सुरक्षा पेंशन तथा मध्याह्न भोजन तैयार करने वाले महिला स्व-सहायता समूहों के मानदेय भुगतान में देरी हो रही है।
खरीद का ब्योरा और लागत में वृद्धि
मध्य प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने बताया कि राज्य मंत्रिमंडल ने 10 जुलाई 2024 को इन खरीदों को मंजूरी दी थी। उनके अनुसार जेट की प्रारंभिक लागत लगभग ₹234 करोड़ थी, जो बढ़कर ₹350 करोड़ हो गई। इसी तरह हेलीकॉप्टर की कीमत ₹125 करोड़ से बढ़कर ₹225 करोड़ तक पहुँच गई।
नायक ने दावा किया कि जेट के आंतरिक साज-सज्जा (इंटीरियर कस्टमाइज़ेशन) पर लगभग ₹60 करोड़ और हेलीकॉप्टर के इंटीरियर पर ₹20 करोड़ अतिरिक्त खर्च किए गए। उन्होंने कहा, 'जनता का पैसा लोगों की जरूरतों पर खर्च किया जाना चाहिए, न कि ऐसी सुविधाओं पर जिनकी आवश्यकता और लागत ही गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती हैं।'
कांग्रेस की माँगें
कांग्रेस ने मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार से खरीद के निविदा दस्तावेज, अनुबंध, भुगतान रिकॉर्ड तथा सीमा शुल्क, जीएसटी, बीमा और अन्य घटकों पर हुए खर्च का पूरा विवरण सार्वजनिक करने की माँग की है। नायक ने सवाल उठाया, 'जब नियमित हवाई सेवाएँ उपलब्ध हैं तो सरकार को जनता के पैसे से इतना महंगा विमान और हेलीकॉप्टर खरीदने की क्या जरूरत थी?'
गौरतलब है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी इस विमान खरीद में ₹100 करोड़ के कमीशन सहित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं और निष्पक्ष जाँच की माँग की है।
सामाजिक खर्च और बुनियादी ढाँचे के मुद्दे
नायक ने राज्य की खर्च प्राथमिकताओं पर प्रश्न उठाते हुए सामाजिक सुरक्षा पेंशन लाभार्थियों और मिड-डे मील तैयार करने वाले महिला समूहों को मानदेय भुगतान में देरी की शिकायतों का हवाला दिया। उन्होंने ठेकेदारों के लंबित भुगतानों और अधूरी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं का मुद्दा भी उठाया।
इसके अलावा नायक ने सतना और मैहर में ₹3,200 करोड़ की पेयजल योजना का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की कमी जारी रहने के बावजूद योजना से काफी धनराशि निकाल ली गई है। उन्होंने किए गए कार्यों का विवरण और परियोजना पूर्ण करने की समय-सीमा सार्वजनिक करने की माँग की।
सरकार की प्रतिक्रिया
फिलहाल मुख्यमंत्री मोहन यादव या उनके प्रवक्ताओं की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह मामला राज्य विधानसभा सत्र से पहले राजनीतिक रूप से संवेदनशील बनता जा रहा है।
आगे क्या होगा
कांग्रेस ने संकेत दिया है कि यदि खर्च का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया तो वह इस मुद्दे को विधानसभा और जन अदालतों में उठाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी खरीद में पारदर्शिता की यह माँग राज्य के वित्तीय प्रशासन पर व्यापक बहस का हिस्सा है।